राज्यसभा की 26 सीटों पर 18 जून को चुनाव:खड़गे-दिग्विजय समेत 24 सांसदों का जून-जुलाई में रिटायरमेंट; 2 सीटों पर उपचुनाव भी

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12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। चुनाव आयोग (EC) ने शुक्रवार को यह ऐलान किया। रिटायर हो रहे सदस्यों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सीनियर लीडर दिग्विजय सिंह, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा समेत 24 सांसद शामिल हैं। इन सभी सीटों से मौजूदा सदस्य 21 जून से 19 जुलाई के बीच रिटायर हो रहे हैं। इनके अलावा, दो रिक्त सीट पर भी उपचुनाव होगा। ये सीटें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के नेता सीवी षणमुगम के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। स्टेटवाइज लिस्ट देखिए 16 मार्च: राज्यसभा की 11 सीटों में से 9 पर कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स जीते हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए थे। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की थी। राज्यवार सीटों की बात करें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर NDA प्रत्याशी विजयी रहे थे। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 NDA और 1 बीजद उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। पूरी खबर पढ़ें… ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। राज्यसभा में NDA को बहुमत NDA को राज्यसभा में दोबारा बहुमत मिला 16 मार्च हुए चुनाव के बाद राज्यसभा में बीजेपी के 106 सांसदों के साथ अब NDA के कुल सांसदों की संख्या 140 हुई है। यानी NDA को पास दोबारा बहुमत है। NDA को कोई भी बड़ा बिल पास कराने के लिए BJD, YSRCP या निर्दलीय सांसदों की जरूरत नहीं पड़ेगी। NDA के सांसद इसके लिए काफी होंगे। विपक्ष के वॉकआउट या विरोध के बावजूद बिल अटकेंगे नहीं। इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है। अगर किसी बड़ी पार्टी के पास बहुमत है तो इसका फायदा यह है कि सरकार को क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बदले उनकी अनुचित मांगों के सामने झुकना नहीं पड़ता। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है। 1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत होता था। तब ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी, लेकिन 1989 के बाद की सभी सरकारों को राज्यसभा में अहम बिल पास कराने में छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है। ………………… यह खबर भी पढ़ें… बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में 2 सीटें एक्स्ट्रा कैसे जीतीं: अब राज्यसभा में मोदी सरकार बहुमत से 17 ज्यादा, इसका क्या असर पड़ेगा फरवरी-मार्च 2026 में राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 40 कैंडिडेट्स ने पर्चा भरा। इनमें से 7 राज्यों के 26 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिसमें क्रॉस-वोटिंग का खेल हुआ। इसके चलते ओडिशा में बीजेपी ने 1 एक्स्ट्रा सीट जीती थी। राज्यसभा में NDA ने दोबारा बहुमत हासिल किया था। पूरी खबर पढ़ें…