विभाजन की विभीषिका : बलोचों ने मजहब के नाम पर कराया था भारत आ रहे हिन्दुओं का कत्लेआम

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रामानुज शर्मा

नई दिल्ली, 12 अगस्त । पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई में हिन्दुस्तान से मदद की गुहार लगाने वाले बलोचिस्तान के बलोचों ने 1947 में देश के बंटवारे के समय मजहब के नाम पर भारत की ओर आ रहे हिन्दुओं का कत्लेआम कराया था और उनकी बलोच आर्मी ने पिंड दादन खान-कामोकी (गुजरांवाला) से भारत के अमृतसर जाने वाली ट्रेन से सैकड़ों महिला-पुरुष और युवाओं की हत्या करके करीब चार सौ हिन्दू युवतियों को अगवा कराया था।

करीब 77 साल पुराने इस खौफनाक हादसे के चश्मदीद गवाह 88 वर्षीय परमहंस लाल मेहता (पी.एल. मेहता) अपनी आपबीती सुनाते हुए आज भी सिहर उठते हैं। उनके और उनके जैसे सैकड़ों विस्थापित लोगों के लिए हर साल 15 अगस्त भारत की आज़ादी की खुशी के साथ विभाजन की विभीषिका की पीड़ा भी ताजा कर देती है। भारत के विभाजन का यह दर्द परमहंस जैसे देशवासियाें के लिए आज भी लाइलाज नासूर जैसा है। देश के बंटवारे के फैसले और लोगों के भीषण रक्तपात ने देशवासियाें काे झकझाेर कर रख दिया था। इसमें हजाराें लाेग