ऐसी आंधी कि लोग हवा में उड़े,111 जानें गईं:कहीं AC ब्लास्ट तो कहीं दिन में ‘रात’ जैसा अंधेरा; यूपी में ऐसा मौसम क्यों हो रहा?

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पहले 3 घटनाएं… 1- 13 मई को बरेली में 90 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलीं। एक शख्स 50 फीट तक हवा में उड़कर 100 मीटर दूर मक्के के खेत में जाकर गिरा। एक हाथ और पैर टूट गया। 2- अप्रैल-मई में नोएडा-गाजियाबाद में 6 बिल्डिंगों में लगे AC फट गए। कंप्रेसर 45°C की भीषण गर्मी झेल नहीं पाया। 3- 4 मई को लखनऊ में सुबह 9 बजे अचानक अंधेरा छा गया। सड़क पर चल रही गाड़ियों को हेडलाइट जलानी पड़ीं। फिर तेज हवा के साथ बारिश हुई। आसमान में उड़ता इंसान, फटते AC और सुबह 9 बजे ‘रात’ जैसा अंधेरा। ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, यूपी की गर्मी की तस्वीरें हैं। बेमौसम बारिश के बाद अब अनुमान है कि 30 मई तक दोबारा पारा 45°C से 47°C तक पहुंच जाएगा। हालांकि, तेज गर्मी के बावजूद मानसूनी बारिश इस बार लोगों को 7 दिन पहले राहत देने आ रही है। 18 जून तक यूपी में मानसून एंट्री ले लेगा। यूपी में इतनी तेज मौसम आखिर क्यों बदल रहा, जानिए संडे बिग स्टोरी में… यूपी कितना गर्म, नए रिकॉर्ड बने दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 37 यूपी के
23 अप्रैल को दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 92 शहर भारत के थे। इनमें 37 यूपी के थे। टॉप-5 में पहले नंबर पर महाराष्ट्र का खेड़ जिला था। इसके बाद यूपी के मुगलसराय, अमेठी, वाराणसी और गाजीपुर का नाम था। 27 अप्रैल को सारे रिकॉर्ड टूट गए। बांदा 47.6°C के साथ दुनिया की सबसे गर्म जगह के रूप में दर्ज हुआ। प्रयागराज, चित्रकूट, हमीरपुर जैसे जिलों में कई दिन पारा 45°C के ऊपर रहा। उस वक्त लोगों की जुबान से निकलता था- अप्रैल में इतनी गर्मी है, मई-जून में तो हालत खराब हो जाएगी। हालांकि, लोगों ने जैसा सोचा था, वैसा नहीं हुआ। मई के पहले हफ्ते में मौसम बदल गया। अचानक तापमान गिरने लगा। पश्चिमी यूपी से बारिश की शुरुआत हुई और फिर यूपी के हर हिस्से में बारिश हुई। 4 मई की सुबह राजधानी लखनऊ में धूप खिली हुई थी, हल्के बादल थे। लेकिन, 9 बजते-बजते अंधेरा छा गया। सड़कों पर गाड़ियों से चल रहे लोगों को हेडलाइट जलानी पड़ गईं। इसके बाद तेज बारिश हुई। 4 और 5 मई को यूपी के लगभग हर जिले में बारिश हुई। इस तरह मई के पहले हफ्ते में 27.4 mm बारिश दर्ज हुई। यह मई में होने वाली औसत बारिश 3.3 mm से 7 गुना ज्यादा थी। इसके बाद यूपी में 13 मई को आए आंधी और तूफान से 111 लोगों की जान गई। ये पिछले 10 साल में मौसम की वजह से एक दिन में मौत का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस दिन प्रयागराज में 21 और भदोही में 17 लोगों की जान चली गई। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी इन मौतों पर दुख जताया था। आखिर इतनी तेज मौसम क्यों बदल रहा है? गर्म और ठंडी हवाओं के टकराने से भयानक आंधी आ रही मौसम में आ रहे लगातार बदलाव का एनालिसिस आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र (लखनऊ) के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अतुल सिंह कर चुके हैं। वह कहते हैं- बदलाव को 3 स्टेप में समझ सकते हैं- ऊपर ठंडी और नीचे गर्म हवा चल रही- आसमान में ऊपर की तरफ (क्षोभमंडल के बीच में) वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से पश्चिम दिशा से सूखी और ठंडी हवाएं चल रही थीं। ठीक उसी समय, जमीन के थोड़ा ऊपर (निचले क्षोभमंडल में) पूरब दिशा से बिल्कुल इसके उलट, गर्म और नमी वाली हवाएं आ रही थीं। हवाओं का आपस में टकराना- जब एक तरफ से ठंडी-सूखी हवा और दूसरी तरफ से गर्म-नम हवा आपस में मिलती हैं, तो मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसे ही वैज्ञानिकों ने ‘वायुमंडल की अस्थिरता’ कहा है। चक्रवात ने भड़काया- हवाओं के इस टकराव के बीच पश्चिमी यूपी के आसमान में हवा का एक चक्रवात पहले से बना हुआ था। इसने उस बिगड़े हुए संतुलन को और ज्यादा भड़का दिया। नतीजा ये हुआ कि जब गर्म हवा तेजी से ऊपर उठी और ठंडी हवा से टकराई। फिर इसने अचानक भयानक आंधी, कड़कती बिजली और तूफान का रूप ले लिया। यही कारण था कि बरेली में इतनी तेज आंधी आई और लखनऊ में दिन में ही अंधेरा छा गया। क्या मौसम में ऐसा बदलाव पहली बार हुआ? वैज्ञानिक बोले- पहले भी आंधी-तूफान आए, लेकिन इस बार स्पीड ज्यादा थी
वैज्ञानिक अतुल कहते हैं- ऐसा नहीं है। साल 2016, 2018 और 2020 में बड़े पैमाने पर आंधी-तूफान आए। तमाम लोगों की जान चली गई। हालांकि, इस साल हवा की स्पीड पहले के मुकाबले ज्यादा रही। पहले स्पीड 60 से 80 किमी/घंटा रहती थी, लेकिन इस बार कई जगहों पर 100 किमी की स्पीड पार हो गई। ऐसा कम ही होता है। हवा की स्पीड जियोलॉजिकल स्थिति और लोकल कंडीशन पर निर्भर करती है। एक जिले में कहीं 110 किमी/घंटा तो उसी जिले के दूसरे हिस्से में 50 किमी/घंटा स्पीड होती है। मार्च के बाद से मानसून आने तक ऐसा मौसम कई बार रहता है। हम इसे प्री-मानसून सीजन कहते जरूर है, लेकिन इस बार तेजी से स्थितियां बदल रही हैं। आखिर क्या है ‘अल नीनो’ मौसम के तेज बदलाव के पीछे की वजह
इस बार गर्मी के बीच अचानक आंधी-बारिश का जो दौर चल रहा, उसके पीछे प्रशांत महासागर के पानी के ज्यादा तपने को वजह बताया जा रहा है। वैज्ञानिक भाषा में इसको अल नीनो कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में होने वाले बदलाव को अल नीनो कहते हैं। इस बार समुद्र का पूर्वी और मध्य हिस्सा सामान्य से कहीं ज्यादा तप रहा है। वहां पानी का तापमान 24°C तक पहुंच चुका है। जब समुद्र इस तरह उबलता है, तो भारत के मौसम का मिजाज भी बिगड़ जाता है। इसी वजह से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है, तो कभी अचानक आंधी-बारिश आ जा रही है। यहां ये जान लीजिए कि अल नीनो अकेला मानसून को कंट्रोल नहीं करता, बल्कि दूसरे कई मौसम फैक्टर भी इसमें अपनी भूमिका निभाते हैं। क्या मानसून जल्दी आएगा? मानसूनी हवाएं सुपर एक्टिव, तेजी से बढ़ रहा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून सिर्फ अल नीनो के भरोसे नहीं बनता। भारत में मानसून लाने के असली ‘इंजन’ हमारे पास ही हैं, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी। इस बार इन दोनों समुद्रों का तापमान सामान्य से ज्यादा है, जिससे वहां भारी मात्रा में नमी बन रही है। इसके चलते मानसूनी हवाएं सुपर एक्टिव हो गई हैं और उन्होंने तेजी से आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। इसी समुद्री हलचल का नतीजा है कि जो मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल पहुंचता था, वो इस बार 4 दिन पहले यानी 26 मई को ही केरल में एंट्री मार देगा। यूपी में एंट्री- इस बार 18 जून तक मानसून यूपी पहुंच जाएगा। पहले अनुमान था कि यूपी वालों को जुलाई के पहले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ेगा। अब एक सवाल उठता है कि इस साल कैसी बारिश हो सकती है? अमेरिका की मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (नोआ) के मुताबिक, इस साल सुपर अल नीनो का आना लगभग तय हो गया है। इससे मानसून कमजोर रहने वाला है। सूखे और हीटवेव की आशंका बढ़ गई है। अगले 10 दिन में कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 10 दिनों में फिर से भीषण गर्मी झुलसाएगी। प्रयागराज, बांदा, चित्रकूट जैसे जिलों का तापमान एक बार फिर 45°C से ज्यादा होने का अनुमान है। वेस्ट यूपी में भी सूरज ज्यादा तपाने वाला है। ————————- ये खबरें भी पढ़ें – वीडियो बनाकर करोड़पति बन रहे क्रिएटर, कोई ‘हलो फ्रेंडा’ से हिट, कोई ‘बिस्कुट का रेट’ पूछकर फेमस औरैया की शिवानी कुमारी। एक वीडियो में हैलो फ्रैंड की जगह हलो फ्रेंडा बोलकर वायरल हो गईं। उनकी बोलने की अलग स्टाइल ही पहचान बनी। आज इनकी नेटवर्थ करोड़ों में है। मेरठ के शादाब जकाती। सऊदी अरब में ड्राइवर थे। 10 रुपए वाला बिस्कुट कितने का है जी… वीडियो से इतना फेमस हुए कि रैपर बादशाह और क्रिकेटर रिंकू सिंह ने उनकी थीम पर वीडियो बनाए। पढ़िए पूरी खबर… हर्षा ने संन्यास लिया, IITian बाबा ने शादी की:माला बेचने वाली लड़की शादी करके फंसी; महाकुंभ के 3 चेहरे फिर से चर्चा में महाकुंभ खत्म हुए सालभर से ज्यादा बीत चुका है। लेकिन, 3 चेहरे आज भी चर्चा में बने हैं। पहला- माला बेचने वाली एक लड़की, जो अपनी आंखों की वजह से वायरल हो गई। दूसरा- आईआईटीएन बाबा, जिन्होंने IIT बॉम्बे से पढ़ाई की, फिर सब छोड़कर संन्यास ले लिया। तीसरी- हर्षा रिछारिया, जो निरंजनी अखाड़े के रथ पर भगवा पहनकर सवार हुईं तो सबकी नजरें उनकी ओर टिक गईं। पढ़िए पूरी खबर…