कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मीरी पीरी चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को खारिज करते हुए फैसला हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के पक्ष में सुनाया है। इसके साथ ही अब शाहाबाद जीटी रोड स्थित मीरी-पीरी संस्थान का प्रबंधन HSGMC संभालेगी। सूत्रों के अनुसार कमेटी जल्द ही संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथों में ले सकती है। फैसले से पहले ही कुरुक्षेत्र स्थित HSGMC मुख्यालय में प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने सदस्यों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की थी। प्रधान बोले- संगत की भावनाओं के अनुरूप चलेगा प्रबंधन फैसले के बाद झींडा ने कहा कि संस्थान के किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा और न ही संस्थान का नाम बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि HSGMC का उद्देश्य केवल संस्थान की सेवाओं को बेहतर बनाना और संगत की भावनाओं के अनुरूप प्रबंधन चलाना है। वहीं पूर्व प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल ने सभी सिख संगत का आभार जताया है। यह मामला आज मंगलवार को जस्टिस जगमोहन बंसल की कोर्ट में सुनवाई के लिए लगा था। इससे पहले 8 मई को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को जैसे ही फैसला आया, कुरुक्षेत्र से लेकर शाहाबाद तक सिख संगत और संस्थान से जुड़े लोगों में हलचल तेज हो गई। 2022 के बाद शुरू हुआ था विवाद दरअसल यह विवाद वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को मान्यता दिए जाने के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने चुनाव तक एडहॉक कमेटी बनाई थी। फिर 4 सितंबर 2024 को HSGMC ने मेडिकल सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से एक मेडिकल बोर्ड गठित किया था। इस मेडकिल बोर्ड में ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों को भी शामिल किया गया था। लेकिन ट्रस्ट प्रबंधन ने इसे निजी ट्रस्ट के मामलों में दखल बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। 3 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने बोर्ड के गठन पर स्टे लगा दिया था, जो अब तक जारी था। सुप्रीम कोर्ट जा सकती है एसजीपीसी हाईकोर्ट द्वारा ट्रस्ट की याचिका खारिज किए जाने के बाद HSGMC को संस्थान की सेवा-संभाल का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से जुड़े नेताओं ने पहले ही संकेत दिए थे कि यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आया, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। SGPC के पूर्व उपाध्यक्ष हरभजन मसाना ने कहा था कि SGPC हर साल संस्थान पर करोड़ों रुपए खर्च करती है और जरूरत पड़ने पर वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान का प्रबंधन अब संभालेगी HSGMC:हाईकोर्ट में ट्रस्ट की याचिका खारिज; 2022 से चल रहा था विवाद
