मध्य प्रदेश में घर बनाने के लिए अब लोगों को कागजी उलझनों में नहीं फंसना पड़ेगा। सरकार ऐसा सिस्टम ला रही है, जहां एक आवेदन पर नगर निगम से लेकर बिजली कंपनी तक की मंजूरियां मिल जाएंगी। सरकार सिंगल एजेंसी क्लियरेंस सिस्टम लागू करने जा रही है। इसके जरिए मकान की परमिशन, बिजली कनेक्शन और गुमास्ता लाइसेंस लेना आसान होगा। यह पहल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसका खाका तैयार कर लिया है। इसका प्रजेंटेशन 13 मई को मंत्रालय में दिया जाएगा। मंडे स्टोरी में पढ़िए, सिंगल एजेंसी क्लियरेंस सिस्टम कैसे काम करेगा… क्या है यह नया सिस्टम? यह एक डिजिटल सेतु की तरह काम करेगा। बिल्डिंग परमिशन के लिए अब फायर ब्रिगेड, पर्यावरण विभाग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, जल विभाग और बिजली कंपनी के अलग-अलग चक्कर नहीं लगाने होंगे। एक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन से लेकर जांच और अंतिम मंजूरी तक की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी। यह आधुनिक सिस्टम कैसे काम करेगा? प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। मौजूदा से कितना अलग प्रस्तावित सिस्टम
अभी नक्शा, फायर एनओसी और बिजली-पानी के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें 30 से 90 दिन तक लग जाते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में नक्शा अपलोड होते ही सिस्टम नियमों (FAR, सेटबैक, ऊंचाई) की जांच करेगा। सभी एनओसी बैकएंड में एक साथ प्रोसेस होंगी। जो काम 3 महीने में होता था, वह 7 से 21 दिनों में पूरा हो जाएगा। नगर निगम और विभागों पर क्या असर पड़ेगा? नगर निगम अब ‘नोडल एजेंसी’ के रूप में काम करेगा। किसी विभाग से समय पर जवाब नहीं आने पर ‘डीम्ड अप्रूवल’ (स्वतः मंजूरी) लागू होगी।
मकान बनाने-बिजली कनेक्शन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा:एमपी में लागू होगा सिंगल एजेंसी क्लियरेंस सिस्टम, केवल एक फॉर्म भरने पर मिलेंगी सुविधाएं
