‘हम सभी लोग पूरी व्यवस्था से नाव चलाएंगे। लाइफ जैकेट पहनाकर 15 सवारियां लेकर ही चलेंगे, ताकि दोबारा वैसा हादसा न हो। लोग यमुना में गहरे पानी में नहाने चले जाते हैं, उनको हम रोकते भी हैं, लेकिन नहीं मानते। प्रशासन को बैरीकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की ओर भी ध्यान देना चाहिए।’ ये कहना है मथुरा के वृंदावन स्थित केशीघाट के नाविकों का। 10 अप्रैल को यहां हुए हादसे में 16 पर्यटकों की मौत हो गई थी। इसके बाद 23 दिन तक नावों का संचालन बंद रहा। सुरक्षा मानकों को पूरा करने और रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने के बाद 3 मई (सोमवार) को संचालन फिर शुरू हो गया है। दैनिक भास्कर ने यहां सुरक्षा मानकों का हाल जाना। हम देखना चाहते थे कि वृंदावन हादसे के बाद क्या कुछ बदला? क्या नाव पर बैठने वाली सवारियों को लाइफ जैकेट दिए जा रहे। सवारियों लाइफ जैकेट के साथ बैठ रही हैं या नहीं? तय मानकों का कितना पालन हो रहा? प्रशासन कितना अलर्ट मोड पर है? पढ़िए खास रिपोर्ट… केशीघाट पर दिखने लगे श्रद्धालु हम सबसे पहले उसी केशीघाट पर पहुंचे, जहां हादसा हुआ था। यहां का माहौल पूरी तरह बदल गया है। पहले यहां हमेशा चहल-पहल और रौनक रहती थी, वहां अब सन्नाटा सा पसरा हुआ है। हालांकि, धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं। कुछ श्रद्धालु फिर से घाट पर नजर आने लगे हैं। यमुना की लहरों पर अब नावों ने हिलोरे मारना शुरू कर दिया है। नाविक जुटे तैयारी में, लेकिन रौनक कम यहां हमें कुछ नाविक अपनी नावों को तैयार करते नजर आए। कोई नाव में पेंट कर रहा था, तो कोई उसकी साफ-सफाई में लगा था। यमुना में फिलहाल इक्का-दुक्का मोटर बोट ही चलती दिखीं। उनमें सवार लोग लाइफ जैकेट पहने हुए थे। नाविकों का कहना है कि पहले जैसी रौनक लौटने में अभी समय लगेगा। नाविक प्रेम बोले- सभी गाइडलाइन का पालन करेंगे यहां हमने नाविक प्रेम से बात की। उन्होंने बताया कि अब प्रशासन ने नाव चलाने की अनुमति दे दी है। हमने जब 10 अप्रैल के हादसे में सुरक्षा मानकों की चूक का जिक्र किया तो प्रेम झट से बोल पड़े ‘हम सभी पूरी सुविधा, व्यवस्था से नाव चलाएंगे। लाइफ जैकेट पहनाकर 15 सवारियां लेकर ही चलेंगे। नाव चलाते समय दो ड्राइवर (नाविक) रखेंगे। ड्राइवर को भी लाइफ जैकेट पहनाया जाएगा। जो मानक हैं, उनका पूरा पालन करेंगे।’ प्रेम का कहना है कि 10 अप्रैल के हादसे से हम सभी ने सबक सीखा है। ईश्वर करे अब ऐसी कोई अनहोनी दोबारा न हो। नाविक बनवारी का कहना है कि हमारी बोट फिर से चल रही है। नगर निगम की ओर से 15 लोगों को बैठाने की अनुमति मिली है और लाइफ जैकेट रखना अनिवार्य किया गया है। बनवारी ने बताया कि हम लोग प्रशासन की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। न तो क्षमता से अधिक सवारियां बैठाएंगे और न ही बिना लाइफ जैकेट के किसी को बैठने देंगे। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि प्रशासन की इस पहल में सहयोग करें। नगर निगम की टीम बना रही अनुमति पत्र प्रशासन ने नाव संचालन के लिए रजिस्ट्रेशन कराकर अनुमति पत्र लेना अनिवार्य किया है। नगर निगम की टीम केशीघाट पर ही कैंप लगाकर नाविकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क ले रही है और अनुमति पत्र तैयार कर रही है। मोटरबोट के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क 1,500 रुपए और साधारण नावों के लिए 500 रुपए है। नाविक यहां अपना आधार कार्ड और फोटो लेकर आ रहे हैं। शुल्क जमा कर अनुमति पत्र बनवा रहे हैं। हमने इस प्रक्रिया के लिए आए कुछ नाविकों से बात की। नाविकों का कहना है कि वे रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इस प्रक्रिया में नगर निगम की टीम पूरी मदद कर रही है। यमुना किनारे नहीं दिखे सुरक्षा के इंतजाम घाट से भास्कर टीम जब यमुना किनारे पहुंची तो वहां सुरक्षा के इंतजाम नजर नहीं आए। नाविक भले ही सुरक्षा मानकों का पालन करते दिखे, लेकिन स्नान कर रहे लोग अभी भी लापरवाह दिखे। यहां हमें कुछ श्रद्धालु अपने बच्चों के साथ यमुना में स्नान करते मिले। नाविक उन्हें लगातार टोक रहे थे, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। मौके पर नगर निगम की ओर से कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया था और न ही यमुना में बैरीकेडिंग की गई थी। नाविक बोले- श्रद्धालु टोकने पर नहीं मानते हमने घाट किनारे मौजूद कुछ नाविकों से बात की। करीब 40 साल से नाव चला रहे पूरन का कहना है कि 15 सवारियों को लाइफ जैकेट के साथ चलाने की अनुमति है। हम गाइडलाइन का पूरा पालन कर रहे हैं। हालांकि यमुना में नहाने वालों को लेकर पूरन ने बताया कि लोग मना करने पर भी नहीं मानते। घाट पर पहले बैरीकेडिंग थी, जो अब नहीं है। चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगे हैं। यमुना में नहाने वालों को रोकने के लिए जल पुलिस की भी तैनाती नहीं है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। हमने एक और नाविक चंद्रपाल निषाद से बात की। उन्होंने कहा कि अभी पहले की तरह रोजगार नहीं रहा। श्रद्धालुओं की संख्या भी पहले जैसी नहीं है। यमुना में नहाने वालों को लेकर उन्होंने बताया कि हम लोग चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकते हैं। बच्चे और युवा सभी यमुना में उतर जाते हैं। टोकने पर भी नहीं मानते। यहां नगर निगम या पुलिस कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए, जो ऐसे लोगों को सख्ती से गहरे पानी में जाने से रोकें। कई अन्य नाविकों ने बताया कि यमुना का जलस्तर स्थिर नहीं है। कहीं पानी गहरा है तो कहीं बहुत कम, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। यहां हमने आगरा से आए श्रद्धालु भाग्य से भी बात की। उनका कहना है कि नगर निगम की ओर से कोई चेतावनी बोर्ड या बैरीकेडिंग नजर नहीं आई। जल्द होगी जल पुलिस की तैनाती मथुरा के एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि यमुना में लापरवाही करने वालों पर नजर रखी जाएगी। गाइडलाइन का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके लिए जल्द जल पुलिस तैनात की जाएगी। व्यवस्था मानकों के अनुसार ही संचालित होगी। इसके साथ ही नियमित पेट्रोलिंग भी कराई जाएगी। घाटों पर मोबाइल पार्टियां मौजूद रहेंगी। ये टीमें लोगों की मदद और सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगी। आखिर में ग्राफिक्स से समझिए कैसे हुआ था नाव हादसा… 10 अप्रैल को पंजाब से आए पर्यटकों को लेकर जा रही नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच थी। उस समय करीब 30 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल रही थी। हवा के झोंकों से नाव अचानक डगमगाने लगी और नाविक कंट्रोल खो बैठा। पर्यटकों ने नाविक से कहा कि आगे पुल है, नाव रोक लें, लेकिन उसने नहीं रोका। दो बार नाव टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर हो गई और नाव डूब गई। इस हादसे में 16 पर्यटकों की मौत हुई थी। ———————- ये खबर भी पढ़ें… स्मार्ट मीटर का बिल अब पोस्टपेड की तरह आएगा:योगी सरकार ने प्रीपेड सिस्टम खत्म किया, पुराने मीटरों को प्रीपेड करने पर भी रोक यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बढ़ते आक्रोश और विवाद के बीच योगी सरकार ने 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में प्रीपेड सिस्टम खत्म कर दिया गया है। अब सभी स्मार्ट मीटर पोस्टपेड मीटर की तरह काम करेंगे। यानी प्रीपेड सिस्टम (पहले रिचार्ज) की व्यवस्था खत्म की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर
वृंदावन में जहां नाव पलटी थी, वहां क्या बदला:23 दिन बाद बोटें चलीं, लाइफ जैकेट दे रहे; मगर…अभी कई खामियां
