करनाल जिला की कुंजपुरा मंडी एक बार फिर गड़बड़ियों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला गेहूं के बैग में ईंटें भरकर वजन बढ़ाने का सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मंडी प्रशासन हरकत में आया और एक आढ़ती का लाइसेंस सस्पेंड करते हुए उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। हालांकि पूरे मामले में अधिकारी बयान देने से बचते नजर आए। वीडियो में खुली पोल, मजदूरों को लगी चोट
वायरल वीडियो दो दिन पुराना है और इसकी लोकेशन काछवा में हैफेड और वेयरहाउस के गोदाम के पास की बताई जा रही है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक लोडिंग गाड़ी में रखी गेहूं की बोरियों से ईंटें निकल रही हैं। जानकारी के अनुसार, जब मजदूर इन बोरियों को गाड़ी में लोड कर रहे थे, तब उनके सिर में ईंटें चुभीं। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को इसकी शिकायत दी। जांच में सामने आया कि कई बैगों में ईंटें भरी गई थीं, जिसके बाद इस पूरे मामले की वीडियो बनाई गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। खरीद एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, इस बार कुंजपुरा मंडी में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग खरीद नहीं कर रहा है। केवल हैफेड और वेयरहाउस की ओर से ही खरीद की जा रही है। दोनों एजेंसियों की ओर से इंस्पेक्टर भी नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि निरीक्षण के बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी
मामले में मंडी सचिव बलवान सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनके नंबर पर व्हाट्सएप संदेश भी भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले भी हो चुके हैं बड़े घोटाले
कुंजपुरा गेहूं गोदाम पहले भी गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में रह चुका है। गांव खराजपुर निवासी विकास शर्मा ने गोदाम में स्टॉक में गड़बड़ी की शिकायत दी थी। जांच के दौरान गोदाम में बाहर रखे चट्टों में करीब 68 लाख रुपए मूल्य का गेहूं कम पाया गया था। इस मामले में कुंजपुरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी और शुरुआती जांच के बाद इंस्पेक्टर अशोक शर्मा और सब इंस्पेक्टर संदीप को सस्पेंड कर दिया गया था। कमेटी गठन और पुनर्गठन की कहानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए 08 जुलाई 2025 को एक जांच कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी को पूरे स्टॉक की जांच के निर्देश दिए गए थे और शिकायतकर्ता को भी मौके पर शामिल किया गया था। बाद में कुछ सदस्यों के ट्रांसफर और कुछ के निलंबन के चलते कमेटी का पुनर्गठन जरूरी हो गया। इसके बाद पत्र क्रमांक 254 के तहत 12 जनवरी 2026 को नई जांच कमेटी बनाई गई थी। नई जांच कमेटी में ये सदस्य शामिल
जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक, करनाल की ओर से बनाई गई नई चार सदस्यीय कमेटी में एएफएसओ मुकेश गुप्ता, इंस्पेक्टर नवीन (असंध), इंस्पेक्टर रणधीर (इंद्री) और सब इंस्पेक्टर अमजद को शामिल किया गया था। कमेटी को कुंजपुरा केंद्र पर भंडारित गेहूं (2025-26) के प्रबंधन, अलगाव और फ्यूमिगेशन कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही खराब गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर भारतीय खाद्य निगम तक भेजने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। जांच कमेटी पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता विकास शर्मा ने आरोप लगाया था कि नई कमेटी में शामिल एएफएसओ मुकेश गुप्ता पहले से ही संदेह के घेरे में रहे हैं। उनका कहना है कि जब स्टॉक में गड़बड़ी हुई थी, तब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा, सब इंस्पेक्टर संदीप और मुकेश गुप्ता की ड्यूटी लगी हुई थी। अशोक शर्मा और संदीप को सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन मुकेश गुप्ता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता की एंट्री ही कर दी बैन
विकास शर्मा ने डीएफएससी को पत्र लिखकर मांग की थी कि मुकेश गुप्ता को जांच कमेटी से हटाया जाए और उन्हें जांच में शामिल किया जाए।
लेकिन विभाग ने उल्टा शिकायतकर्ता की ही एफसीआई गोदाम में एंट्री बैन कर दी। इसके बाद विकास शर्मा ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी थी। लगातार सामने आ रहे मंडी के मामले
इससे पहले असंध मंडी में भी दो आढ़तियों के लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं। एक पर गेहूं साफ न होने और दूसरे पर अतिरिक्त बैग रखने के आरोप लगे थे। वहीं करनाल अनाज मंडी में उत्तर प्रदेश के गेहूं की खरीद-फरोख्त कराने के मामले में भी एक आढ़ती का लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है। अब फिर बढ़े सवाल
ताजा मामले में गेहूं के बैग में ईंटें मिलने से एक बार फिर मंडी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण प्रणाली, खरीद एजेंसियों की भूमिका और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर अब गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। देखना होगा कि इस बार जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।
