कातिल सलीम वास्तिक मस्जिद में छिपता रहा:8 साल मोबाइल फोन नहीं चलाया, संदीप की मां बोलीं- हत्यारे को फांसी हो

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अपहरण-हत्या के मामले में गिरफ्तार सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान अब तिहाड़ जेल में बंद है। 26 साल तक दिल्ली पुलिस को चकमा देने वाले सलीम की हर दिन नई कहानी सामने आ रही है। वह इस कदर शातिर है कि पुलिस से बचने के लिए करीब 8 साल तक मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि साल 2000 में फरार होने के बाद सलीम मुजफ्फरनगर के खालापार स्थित एक मस्जिद में छिप गया। यहां कुछ दिन शरण लेने के बाद एक रिश्तेदार के जरिए मेरठ के लिसाड़ीगेट पहुंचा। फिर यूपी से भागकर हरियाणा चला गया। इसके बाद हरियाणा से गाजियाबाद आ गया और यहीं रहने लगा। वहीं, सलीम की गिरफ्तारी के बाद 26 अप्रैल, 2026 को उस मां का वीडियो सामने आया, जिसके 13 साल के बेटे संदीप का उसने कत्ल किया था। पढ़िए वीडियो में मां ने जो कुछ कहा मां बोली- हत्यारों को फांसी मिलनी चाहिए 20 जनवरी, 1995 को दिल्ली के सीमेंट कारोबारी सीताराम बंसल के 13 साल के बेटे संदीप की हत्या कर दी गई थी। वीडियो में संदीप की मां रेनू बंसल रोते हुए कहती हैं- मैं बता नहीं सकती कि ये 31 साल हमारे परिवार पर कैसे कटे हैं? ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब बेटे की याद न आती हो। 20 जनवरी, 1995 को बेटे संदीप को स्कूल भेजा था। मुझे नहीं पता था कि वह अब कभी आएगा ही नहीं। रात तक जब वह घर नहीं आया, तो हमारा पूरा परिवार बेचैन हो गया। मैंने संदीप के पापा को फोन किया कि वह नहीं आया है। इसके बाद मैंने और संदीप के पापा ने बेटे की काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। 21 जनवरी की दोपहर संदीप के पिता सीताराम के पास कॉल आई। कॉल करने वाले ने कहा कि तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में है। उसके बाद भी इन्होंने (संदीप के पिता) हम लोगों को कुछ नहीं बताया। उन्होंने सीधे पुलिस को सूचना दे दी। जब शाम हो गई तो मुझे बताया गया कि संदीप मिल गया है और वह आ रहा है। लेकिन, मेरा रो-रोकर बुरा हाल था। जब लाश आई, तब मुझे बेटे की हत्या का पता चला संदीप की मां रेनू कहती हैं- पति ने मुझे नहीं बताया था कि संदीप कहां है? उसके साथ क्या हुआ है? रात में अचानक लोगों का मेरे घर आना-जाना शुरू हो गया। रात में ही जब बेटे की लाश आई, तो मैं बेसुध हो गई। मैंने कहा, हे भगवान यह क्या कर दिया? मुझे मेरे बेटे की हत्या का बदला चाहिए। इस सलीम को फांसी ही होनी चाहिए, तभी मुझे शांति मिलेगी। अब पढ़िए सलीम वास्तिक कैसे बचता रहा पहले मुजफ्फरनगर, फिर मेरठ में छिपा संदीप बंसल हत्याकांड के करीब 2 साल बाद 1997 में दिल्ली कोर्ट से सलीम को उम्रकैद की सजा हुई। इसके 3 साल बाद साल- 2000 में सलीम अग्रिम जमानत पर आया और फिर फरार हो गया। सलीम से पूछताछ में दिल्ली पुलिस को पता चला कि भागने के बाद वह मुजफ्फरनगर के खालापार इलाके में एक मस्जिद में रहा, जिससे पुलिस उसे तलाश नहीं कर सके। इसके बाद अपनी रिश्तेदार के जरिए कुछ दिन मेरठ के लिसाड़ीगेट में रुका। 2001 में सलीम यूपी से भागकर हरियाणा पहुंचा। वहां उसने अंबाला और करनाल में कारपेंटर का काम किया। 2010 में वह गाजियाबाद के लोनी में बस गया। इस बीच साल- 2015 तक सलीम ने मोबाइल फोन तक नहीं चलाया। पहले सिर्फ अपनी पत्नी और साले के फोन से ही वह रिश्तेदारों को कॉल करता था। उसके बाद उसने यू-ट्यूब चैनल चलाया। दिल्ली पुलिस ने एक महीने तक रेकी कर पकड़ा 27 फरवरी, 2026 को सलीम पर 2 सगे भाइयों ने जानलेवा हमला किया था। सलीम दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती हुआ, उसके बाद उसे मैक्स भेज दिया गया। यहां से उसके फिंगर प्रिंट लिए गए। इसी दौरान दिल्ली पुलिस को पता चला कि सलीम खान हमारे यहां से 26 साल पहले फरार हुआ मुजरिम है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गोपनीय ढंग से जांच शुरू की। लोनी स्थित जिस घर में बने ऑफिस में सलीम पर हमला हुआ था, वहां भी पुलिस जांच करती रही। इसी बीच दिल्ली पुलिस को पता चला कि पहले हुई में पिटाई में सलीम का एक पैर टूट गया था। सलीम कभी-कभी खुद भी यह कहता था कि मैंने बहुत बदमाश देखे हैं। इससे सलीम पर पुलिस का शक और भी बढ़ने लगा। सलीम ठीक हुआ, तो पुलिस ने पूरी तरह से निगरानी शुरू कर दी। पत्नी अफसाना को सामने नहीं आने दिया सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान जब दिल्ली के अस्पताल में भर्ती था, तब भी उसकी पत्नी अफसाना सामने नहीं आई। बेटा भी नहीं आता था। पुलिस ने सलीम से उसकी पत्नी के बारे में कई बार पूछा। हर बार वह यही बताता था कि वह लोनी में है और उसकी तबीयत खराब है। वहां भी पुलिस ने जांच की तो पता चला कि पत्नी और बेटा नहीं रहते, सलीम अकेला ही रहता है। आखिरकार 25 अप्रैल, 2026 को दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके से सलीम को पकड़ लिया। जानिए कब से आया सुर्खियों में फरवरी में सलीम वास्तिक को 14 चाकू मारे गए थे इस पूरे घटनाक्रम के बाद सलीम वास्तिक अचानक सुर्खियों में आ गया था। दरअसल, सलीम वास्तिक का मूल घर शामली जिले में है। फिलहाल वह गाजियाबाद के लोनी इलाके की अशोक विहार कॉलोनी में बस गया था। वह वहां एक्स-मुस्लिम की हैसियत से डिबेट करता था और इस्लाम से जुड़ी बातें रखता था। बाद में उसने अपना यूट्यूब चैनल ‘सलीम वास्तिक 0007’ नाम से बनाया और इस्लाम व मदरसों की शिक्षा पर सवाल उठाने लगा था। हलाला, हदीस और तीन तलाक पर वह अक्सर बात करता था। इन विषयों पर चर्चा करते हुए वह कुरान की आयतों को कोट करता था। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हत्यारे सलीम की कहानी- ‘खान’ हटाकर नाम में ‘वास्तिक’ जोड़ा, कारपेंटर बना, महिलाओं के कपड़े बेचे; 26 साल बाद गाजियाबाद से अरेस्ट यूपी के गाजियाबाद में रहने वाला सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान न सिर्फ हत्यारा है, बल्कि उसकी हकीकत भी बेहद डरावनी है। फरवरी में 2 कट्‌टरपंथी भाइयों ने जब का गला रेता तो उसने काफी सुर्खियां और सहानुभूति बटोरी। सीएम योगी ने एक्शन लिया, एनकाउंटर में दोनों हमलावर मार गिराए गए। पुलिस ने सुरक्षा दी। लेकिन शनिवार को जब दिल्ली पुलिस ने सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया तो उसका वास्तविक चेहरा सामने आ गया। पढ़ें पूरी खबर