यूपी के 18 चर्चित चेहरों में कौन पसंद-कौन नापसंद:मंत्री को घेरने वाले, बाहुबली और सपा के बागियों की सीटों पर कौनसी पार्टी नंबर-1

Spread the love

योगी सरकार के 4 साल पूरे होने पर दैनिक भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे आए हैं। यूपी की सियासत में 4 साल से सुर्खियों में रहे 18 चर्चित विधायकों की सीटों पर लोगों की क्या राय है? इनमें सपा के 4 बागी विधायकों की सीटें भी शामिल हैं। 4 बाहुबलियों की सीटों पर जनता ने किसे कैंडिडेट के रूप में पहली पसंद बताया? मौका-बेमौका अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़े करने वाले विधायकों की सीटों के भी नतीजे सिलसिलेवार देखिए… सबसे पहले विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष विधायक के तौर पर दोनों नापसंद सतीश महाना कानपुर की महाराजपुर सीट से 8वीं बार विधायक बने हैं। बजट सत्र के दौरान हंगामा करने वाली भाजपा विधायक केतकी सिंह की बात पर सतीश महाना ने गुस्से में हेडफोन फेंक दिया था। भास्कर सर्वे में लोगों ने विधायक के रूप में दोबारा टिकट देने पर इन्हें ‘ना’ बोला है। हालांकि लोगों ने यहां पार्टी के रूप में भाजपा को पहली पसंद बताया। माता प्रसाद सिद्धार्थनगर जिले की इटवा सीट से 7वीं बार विधायक बने हैं। अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद नेता प्रतिपक्ष बने। कानपुर में सीसामऊ सीट के लिए हुए उपचुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रशासन मतदाताओं को रोकने के लिए सड़कों पर गड्ढे खुदवा रहा। भास्कर सर्वे में जनता ने उन्हें बतौर उम्मीदवार ‘ना’ कहा। हालांकि, उनकी सीट पर सपा पहली पसंद है। जिन्होंने अपनी ही सरकार को घेरा था नंद किशोर गुर्जर ने विधानसभा सत्र के दौरान बात रखने का मौका नहीं मिलने पर सदन के फर्श पर बैठकर धरना दिया था। इसके अलावा नंद किशोर ने अपनी ही सरकार को भ्रष्टतम बोला था। कहा था कि मुख्य सचिव ने तंत्र-मंत्र कर महाराजजी का दिमाग बांध दिया है। सर्वे में लोनी सीट पर लोगों ने नंद किशोर गुर्जर को नापसंद किया है। यहां से भाजपा के जिला मंत्री राहुल बैसला पहली पसंद बने हैं। इन्होंने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक लिया था। नाराजगी थी कि नल-जल योजना में खोदी गई सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई। सर्वे में बृजभूषण को जनता ने अगले चुनाव के लिए बतौर उम्मीदवार नकार दिया। यहां सपा को पहली पसंद बताया है। विवादित बयान से सुर्खियों में रहने वाले पल्लवी पटेल 2022 में कौशांबी की सिराथू सीट से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराकर सुर्खियों में आई थीं। पल्लवी सपा के समर्थन से चुनाव लड़ी थीं। 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था- PDA का मतलब ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ नहीं, ‘पल्लवी, डिंपल और जया’ है। सर्वे में सामने आया कि लोग पल्लवी को दोबारा कैंडिडेट के रूप में नहीं देखना चाहते। पल्लवी की सीट पर जनता ने भाजपा को पहली पसंद बताया। दिनेश खटिक योगी सरकार में मंत्री हैं। इनका एक बयान ‘हस्तिनापुर सीट श्रापित है’ काफी वायरल हुआ था। उनकी सीट पर पश्चिमी यूपी के युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री अमल खटिक जनता की पहली पसंद बने। यहां दिनेश खटिक दूसरी पसंद हैं। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 2025 में कांवड़ यात्रा के दौरान कहा था- भारतीय जनता पार्टी और आतंकवादियों में कोई अंतर नहीं। सर्वे में जनता ने इनकी सीट पर नवीन धवन उर्फ बंटी को पहली पसंद बताया है। धवन 2025 में कुर्ता जलाकर सुर्खियों में आए थे। यहां मेहरोत्रा दूसरी पसंद हैं। पार्टी के तौर पर लोगों ने सपा को नंबर-1 बताया है। अब बाहुबलियों की सीटों का हाल यूपी के सबसे बड़े बाहुबली नेताओं में राजा भैया की गिनती होती है। कभी मायावती की नाराजगी के शिकार बने राजा भैया ने 2018 में खुद की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) पार्टी बनाई। 2022 में उनकी पार्टी दो सीटों पर जीती थी। पारिवारिक विवाद को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। सर्वे में कुंडा में वे और उनकी पार्टी जनता की पहली पसंद बनी। 2002 में रारी विधानसभा से निर्दलीय विधायक बने थे। लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। कई मुकदमे दर्ज हैं। पत्नी जौनपुर से जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। मल्हनी सीट धनंजय के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। यहां से लकी यादव सपा से विधायक हैं। भास्कर सर्वे में लकी को अगले कैंडिडेट के तौर पर लोगों ने पसंद नहीं किया। हालांकि इस सीट पर बतौर पार्टी सपा पहली पसंद है। भाजपा से चौंकाते हुए धनंजय सिंह का नाम बतौर कैंडिडेट सामने आया है। अमनमणि पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे हैं। नौतनवा अमरमणि की पारंपरिक सीट रही है। अभी इस सीट पर निषाद पार्टी के ऋषि त्रिपाठी विधायक हैं। सर्वे में इस सीट पर रोचक रिजल्ट आया है। भाजपा या सपा पार्टी कोई भी हो, बतौर प्रत्याशी अमनमणि त्रिपाठी को जनता ने पसंद किया है। विनय शंकर तिवारी पूर्वांचल के बाहुबली एवं कद्दावर ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। उनके प्रभाव वाली चिल्लूपार सीट पर भाजपा के राजेश त्रिपाठी विधायक हैं। सर्वे में बतौर विधायक राजेश त्रिपाठी को लोगों ने नापसंद किया है। हालांकि, पार्टी के रूप में भाजपा पहली पसंद है। सपा उम्मीदवारों में विनय शंकर तिवारी पहली पसंद के रूप में सामने आए। सपा से बगावत करने वाले राकेश प्रताप सिंह इस सीट से तीसरी बार के विधायक हैं। सपा ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब भाजपा के साथ हैं, लेकिन अभी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं। भास्कर सर्वे में राकेश का नाम सपा विधायक के तौर पर था। जनता ने इन्हें अगले कैंडिडेट के तौर पर ‘ना’ बोला है। हालांकि, इस सीट से सपा ही पहली पसंद बनी। पूजा पाल पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी हैं। कौशांबी की चायल सीट से 2022 में विधायक चुनी गई थीं। उन्होंने विकसित यूपी-2047 को लेकर विधानसभा में पति के हत्यारे अतीक अहमद के सफाए का क्रेडिट सीएम योगी को दिया था। इसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। तब से वो भाजपा के साथ हैं। सर्वे में लोगों ने चायल सीट पर भाजपा को पहली पसंद बताया। हालांकि, पूजा को बतौर विधायक नकार दिया है। लोगों ने सपा से अनवर अहमद खान को बतौर कैंडिडेट पसंद किया है। मनोज पांडेय ऊंचाहार सीट पर 3 बार विधायक बने। 2022 में सपा से विधायक थे। राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर भाजपा समर्थित प्रत्याशी को वोट किया। सपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। भास्कर सर्वे में ऊंचाहार सीट पर लोगों ने उन्हें बतौर प्रत्याशी पसंद किया। हालांकि, यहां लोगों ने सपा को पार्टी के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है। गोसाईंगंज सीट से अभय सिंह दूसरी बार विधायक बने हैं। यूपी के बाहुबली विधायकों में इनकी गिनती होती है। 2022 में सपा से चुनाव जीते थे। इन्होंने भी राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर वोट किया था। सपा से निकाल दिए गए। भास्कर सर्वे में लोगों ने उन्हें बतौर कैंडिडेट नापसंद किया। लेकिन, यहां से सपा पहली पसंद बनी। भाजपा से पूर्व विधायक इंद्रप्रताप तिवारी ‘खब्बू’ को लोगों ने पहली पसंद बताया। दलबदलू नेता अदिति सिंह ने 2017 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था। विधायक बनने के बाद वह पार्टी के खिलाफ बयान देने लगीं। नवंबर 2021 में भाजपा जॉइन की। फिर 2022 का चुनाव भाजपा के टिकट पर जीता। उनके पिता कद्दावर नेता अखिलेश सिंह हैं। पिता के निधन के बाद उन्होंने राजनीतिक विरासत संभाली। उनकी गिनती तेज-तर्रार महिला नेत्री में होती है। हालांकि, सर्वे रिजल्ट में ये भी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। लोगों ने इनकी सीट पर सपा को पहली पसंद बताया। रामअचल राजभर को सपा में सुभासपा के ओपी राजभर की काट के रूप में देखा जाता है। वह 38 साल तक बसपा के साथ राजनीति करते रहे। पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से मायावती ने उन्हें निष्कासित किया था। सपा जॉइन करके उन्होंने चुनाव लड़ा और अकबरपुर सीट से विधायक बने। भास्कर सर्वे में रामअचल राजभर को लोगोें दोबारा कैंडिडेट के तौर पर नकार दिया। यहां से ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को अगली बार के लिए बेहतर उम्मीदवार बताया। विवाद से चर्चा तक सोमेंद्र यूपी सरकार में मंत्री हैं। वो शांति निकेतन ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। इस ट्रस्ट पर दलित परिवारों की जमीन फर्जी मेडिकल रिपोर्ट लगाकर खरीदने के आरोप लगे। इसमें मंत्री भी घिरे हैं। इसके अलावा अक्टूबर, 2025 में उनके करीबी विकुल चपराना का छात्रों के साथ मारपीट और नाक रगड़वाने का वीडियो वायरल हुआ था। उनकी सीट पर मंडल प्रभारी प्रवीण भड़ाना को जनता ने पहली पसंद बताया। सोमेंद्र यहां दूसरी पसंद हैं। —————————- यह खबर भी पढ़ें – 13 मंत्रियों की सीटों पर नए चेहरे बने पहली पसंद: डिप्टी सीएम की सीट पर सपा नंबर वन; यूपी के मंत्रियों की सीटों का हाल दैनिक भास्कर के सबसे बड़े सर्वे के नतीजों में सामने आया है कि यूपी के 40 में से 33 मंत्रियों को जनता दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाना चाहती। सिर्फ 3 मंत्रियों को दोबारा टिकट देने के लिए ‘हां’ बोला है, जबकि 3 मंत्रियों पर लोग स्पष्ट राय नहीं बना सके। 4 मंत्रियों को जनता ने उनके खराब व्यवहार के कारण पसंद नहीं किया। सर्वे में विधायकों को पसंद करने या नापसंद करने की वजह भी पूछी गई थी। पढ़िए पूरी खबर… यूपी-403 में से 256 सीटों पर भाजपा पहली पसंद, सपा को 135 सीटें; NDA के सहयोगी दलों को सबसे ज्यादा नुकसान
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर एप के सबसे बड़े सर्वे में फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। यूपी की 403 सीटों में 256 पर भाजपा पहली पसंद बनी। 135 सीटों पर सपा मजबूत दिख रही है। सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा की सहयोगी पार्टियों को होता दिख रहा है। ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अपनी सभी 6 सीटों पर पिछड़ती दिख रही है। पढ़िए पूरी खबर… भास्कर सर्वे यूपी-403 में से 256 सीटों पर भाजपा पहली पसंद: सपा को 135 सीटें; NDA के सहयोगी दलों को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर एप के सबसे बड़े सर्वे में फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। यूपी की 403 सीटों में 256 पर भाजपा पहली पसंद बनी। 135 सीटों पर सपा मजबूत दिख रही है। सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा की सहयोगी पार्टियों को होता दिख रहा है। ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अपनी सभी 6 सीटों पर पिछड़ती दिख रही है। पढ़िए पूरी खबर…