यूपी के 25 जिलों में होंगी महिला DM-SSP:2027 चुनाव से पहले 33% पोस्टिंग का प्लान; इन जिलों में भी अफसर बदलेंगे

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संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। इसका असर यूपी के 75 जिलों की ब्यूरोक्रेसी पर पहले दिखेगा। पहले से ज्यादा महिला IAS-IPS अफसरों को कमिश्नर और डीएम-SSP की कमान सौंपने की तैयारी है। मौजूदा वक्त में महिला DM 16% और SSP करीब 12% हैं। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू होने से पहले यूपी सरकार ब्यूरोक्रेसी में भी 33% महिला अफसरों को कमान सौंपकर सियासी मैसेज देना चाहती है। जिससे महिला वोटरों के बीच भरोसा मजबूत हो सके। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लोकसभा में कुल 74 महिला सांसद हैं। इनमें यूपी की 7 सांसद हैं। अधिनयम लागू होने के बाद महिला सांसदों की संख्या कुल सीटों का 33% तक पहुंच सकती है। ये सांसद अपने-अपने क्षेत्रों का संसद में प्रतिनिधित्व कर सकेंगी। यह प्रावधान फिलहाल राज्यसभा और विधान परिषद पर लागू नहीं होगा। BJP सरकार और संगठन के पदाधिकारियों का विचार है कि इस अधिनियम का असर संसद से पहले ब्यूरोक्रेसी और पुलिस पर दिखना चाहिए। ऐसे में सरकार फैसला ले रही है कि महिला अधिकारियों को जिलों की कमान सौंपी जाएगी। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्या मैसेज देना चाहती है सरकार ‘नारी शक्ति’ का मैसेज- अधिनियम के जरिए केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया है। अब यूपी सरकार उसको प्रशासकीय अमले पर लागू करके मैसेज देना चाहती है कि सिर्फ संसद-विधानसभा ही नहीं, DM-SSP जैसे फैसले लेने वाले पदों पर भी महिलाएं होंगी। महिला वोटर्स को साध रही- यूपी में करीब 13.39 करोड़ वोटर हैं। इनमें 6.5 करोड़ महिलाएं हैं। इस फैसले को महिला वोटबैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। लाभार्थी नहीं, निर्णय लेने लायक बना रहे- मुफ्त राशन, उज्ज्वला, मिशन शक्ति जैसी योजनाओं के बाद अब सरकार ब्यूरोक्रेसी में प्रतिनिधित्व का कार्ड खेल रही है। इस तरह से सरकार बताना चाहती है कि महिलाओं को लाभार्थी ही नहीं, निर्णय लेने लायक भी बना रहे हैं। गुड गवर्नेंस और सेंसिटिव प्रशासन की छवि- महिला अफसरों को लेकर आम धारणा होती है कि वे कानून-व्यवस्था में सख्ती और सामाजिक मामलों (महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य) में संवेदनशीलता लाती हैं। सरकार इसे बेहतर प्रशासन की ब्रांडिंग में बदलना चाहती है। विपक्ष के नरेटिव को काउंटर करना- विपक्ष अक्सर बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और सामाजिक असंतुलन के मुद्दे उठाता है। महिला अफसरों की बढ़ती तैनाती से सरकार यह दिखाना चाहती है कि हम अवसर भी दे रहे और सिस्टम भी बदल रहे हैं। यूपी के 75 में से 12 (16%) जिलों में महिला जिलाधिकारी तैनात हैं, इनकी संख्या 20 से 25% तक बढ़ाई जा सकती है। अधिकारी बोले- ये CM का विशेषाधिकार, कौन DM-SSP होगा
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं- यूपी के जिलों में जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान तैनात करते समय अधिकारी की कार्यशैली और पहले के अनुभव को खासतौर पर देखा जाता है। नए अफसरों को भी जिलों में काम करने का मौका मिले, इसका भी ध्यान रखते हैं। जहां तक अधिनियम लागू होने के बाद की व्यवस्था पर सवाल है, तो यह सीएम योगी का विशेषाधिकार है। वह किस जिले में किसे डीएम या एसपी तैनात करते हैं। महिला अफसरों को पहले भी मौके दिए जाते थे। अब उनकी संख्या में थोड़ा इजाफा हो सकता है। SIR के दौरान तबादलों पर रोक थी
यूपी में SIR के दौरान 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल, 2026 तक जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और SDM के तबादलों पर रोक चल रही थी। इस दौरान यूपी सरकार ने चुनाव आयोग की विशेष अनुमति लेने के बाद ही तबादले किए। अब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कमिश्नर, DM और पुलिस कप्तान बदले जाने हैं। यूपी के 75 जिलों में से 8 जिलों में ही महिला IPS अधिकारियों को तैनात किया है। इन्हें बनाया जा सकता है डीएम 2016 बैच की IAS और नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग की विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष कविता मीणा, महिला एवं बाल कल्याण विभाग की निदेशक सरनजीत कौर ब्रोका और पर्यटन विभाग की विशेष सचिव ईशा प्रिया को जिले की कमान सौंपी जा सकती है। आचार संहिता की वजह से भी बदले जाएंगे डीएम-एसपी
विधानसभा चुनाव 2027 फरवरी या मार्च में हो सकते हैं। आयोग चुनाव तारीखों की घोषणा करते ही आचार संहिता लागू कर देता है। इसलिए अनुमान है कि जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत के बीच आचार संहिता लागू हो सकती है। आचार संहिता लगने से पहले भी जिलों के डीएम और पुलिस कप्तान बदले जा सकते हैं। आयोग का नियम है- विधानसभा चुनाव से पहले 3 साल तक एक ही जिले में तैनात पुलिस कप्तान और एसपी हटाए जाएंगे। आयोग के नियमों के दायरे में ये अफसर आ सकते हैं। प्रशासनिक कारणों से भी बदले जाएंगे डीएम
शासन के सूत्रों के मुताबिक, अंबेडकरनगर, चंदौली, हापुड़, चित्रकूट, श्रावस्ती, भदोही, महोबा, सुलतानपुर, हाथरस, बाराबंकी और ललितपुर के डीएम भी बदले जा सकते हैं। इन जिलों के डीएम को दूसरे जिलों में तैनात किया जा सकता है। या फिर शासन में किसी विभाग में निदेशक या विशेष सचिव के पद पर पोस्टिंग दी जा सकती है। —————————– ये एक्सक्लूसिव खबर भी पढ़िए- यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी, NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) यूपी में हुई आगजनी की करीब 26 घटनाओं की आतंकी एंगल से जांच करेगी। ऐसा पिछले दिनों लखनऊ में पकड़े गए 4 आतंकियों के इनपुट के आधार पर किया जा रहा है। यूपी के अलग-अलग जिलों में गाड़ियों में आग लगने की इन घटनाओं को हादसा बताकर केस बंद कर दिया गया था। अब इनकी गहराई से तफ्तीश की जाएगी। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी मामले में तफ्तीश करेगी। पढ़िए पूरी खबर…