होटकेस नहीं, आज भी रोटियों को नरम रखता है निगालु से बना छापर, पहाड़ों की संस्कृति का जीवंत प्रतीक

Spread the love

पहाड़ों में आज भी रोटियों को गर्म और नरम रखने के लिए पारंपरिक ‘छापर’ का इस्तेमाल किया जाता है, जो निगालु बांस से हाथों से बनाया जाता है. इसमें हवा का संतुलित प्रवाह बना रहता है, जिससे रोटियां लंबे समय तक ताजा रहती हैं. यह सिर्फ एक उपयोगी वस्तु नहीं, बल्कि पहाड़ों की संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है, जिसे लोग आज भी सहेज कर रखे हुए हैं.