‘रातों-रात बने कई वॉट्सऐप ग्रुप, हिंसा फैलाने के लिए उकसाया’:नोएडा की पुलिस कमिश्नर बोलीं- गांवों से आई भीड़ ने बवाल किया

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यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) में सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के पीछे गहरी साजिश है। नोएडा पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने आगजनी और तोड़फोड़ की, वह फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे। बल्कि कर्मचारियों की आड़ में शामिल उपद्रवी थे। गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए कहा, इस पूरे मामले में किसी बड़ी और गहरी साजिश की बू आ रही है। क्योंकि मामला शांत हो चुका था और फिर अचानक कुछ लोग निकलते हैं जो श्रमिक नहीं होते हैं, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर देते हैं। ये भीड़ अचानक आसपास के गांवों से निकल कर आई। बातचीत के बाद श्रमिक साइलेंट हो गऐ थे और आसपास के गांवों से निकली टोलियों ने बवाल शुरू कर दिया। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रदर्शन अचानक हिंसक कैसे हो गया? इसके पीछे कौन हैं? क्या इंटेलिजेंस को ऐसा कोई इनपुट था? यह प्रदर्शन किसके खिलाफ है- कंपनी प्रबंधन, ठेकेदार, प्रशासन या सरकार? पढ़िए रिपोर्ट…. रातों-रात बने हजारों वॉट्सऐप ग्रुप कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया, इस आंदोलन को हिंसक बनाने के लिए रातों-रात कई वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए और क्यूआर कोड के माध्यम से कर्मचारियों को ऐसे ग्रुप से जोड़ा गया। कर्मचारियों को प्रदर्शन को हिंसक और उग्र बनाने के लिए उकसाया गया। लक्ष्मी सिंह बताती हैं कि हरियाणा में हुए प्रदर्शन के बाद से ही हम लोग सजग थे और इसे देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर फोर्स तैनात भी कर दी गई थी। लेकिन बाहरी तत्वों के शामिल होने का अंदेशा नहीं था, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति बिगड़ गई, लेकिन जल्द ही उसे काबू में कर लिया गया। हिरासत में 150 से ज्यादा लोग
पुलिस कमिश्नर ने बताया, इस हिंसा में शामिल 150 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। ये भी चेक किया जा रहा है कि जो लोग पकड़े गए हैं, उसमें कर्मचारी कितने हैं और बाहरी लोग कितने हैं? जो बाहरी लोग इस हिंसा में शामिल हुए, उनका मकसद क्या था? इसके पीछे कौन से संगठन थे, जो पूरी तरह से संगठित होकर और पूरी प्लानिंग के साथ माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे थे? प्रदर्शन का कोई लीडर नहीं
सूत्रों का कहना है कि चार दिन से चल रहे प्रदर्शन का कोई लीडर नहीं था। अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी एक जगह इकट्‌ठा होते थे। फिर भीड़ बढ़ने लगती थी। बीते 9 अप्रैल से यही हो रहा था। पहले दिन जब प्रदर्शनकारी बैठे थे तो उनसे बात करने पुलिस और प्रशासन के लोग पहुंचे थे। प्रदर्शन में आगे आगे रहने वाले कई कर्मचारियों ने खुद को बातचीत में शामिल होने से ये कहते हुए मना कर दिया था कि वे नेता नहीं हैं। सरकार का दावा- पहले बन गई थी सहमति
योगी सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस मामले में कर्मचारियों से बातचीत हो गई थी। जिन मुद्दों पर वे आंदोलन कर रहे थे, उसे लेकर कई सहमति भी बन गई थीं। लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस सहमति में केवल कर्मचारियों की राय ली गई थी, इंडस्ट्री मालिकों की सहमति नहीं थी। जब तक इंडस्ट्री के मालिक न्यूनतम मजदूरी देने, आठ घंटे तक काम कराने, आठ घंटे से अधिक समय तक काम कराने के बदले ओवरटाइम देने, नाइट ड्यूटी अलाउंस नियमानुसार देने जैसी मांगों पर सहमत नहीं होंगे, तब तक प्रशासन, श्रम और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट से समझौते का कोई औचित्य नहीं हैं। कर्मचारियों ने करीब तीन चार महीने पहले स्थानीय श्रम उपायुक्त से भी इस मुद्दे पर बात की थी। श्रम उपायुक्त ने भी मांगों को पूरी कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन बात नहीं बनी। श्रम उपायुक्त की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया था। न बड़ा संगठन न राजनैतिक कनेक्शन के सुबूत
प्रदर्शन में अभी तक कोई बड़ा संगठन सामने नहीं आया है, लेकिन शासन स्तर पर इस बात के इनपुट मिले हैं कि सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस के कुछ पदाधिकारी इस आंदोलन को पर्दे के पीछे से समर्थन कर रहे थे। जिसके बाद प्रदर्शन इंडस्ट्री मालिकों, मजूदरी ठेकेदारों और प्रशासन के खिलाफ हो गया। इतना ही नहीं प्रदर्शन ने बढ़कर ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद तक को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि आंदोलन का अभी तक कोई राजनीतिक कनेक्शन सामने नहीं आया है। फैक्ट्री कर्मचारियों की क्या है नाराजगी?
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें न्यूनतम वेतन पर काम करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में पालन पोषण मुश्किल हो रहा है। हर महीने 10 से 12 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। 12 घंटे काम कराया जा रहा है। ओवर टाइम दिया ही नहीं जाता और शोषण जो होता है वह अलग। रविवार के समझौते के बावजूद कुछ श्रमिक संतुष्ट नहीं हुए या योजनाबद्ध तरीके से सड़क पर उतर आए। सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
इस बवाल की जांच नोएडा पुलिस कर रही है। वहीं श्रमिकों की मांगों को लेकर एक हाईलेवल कमेटी का गठन किया गया है। ये कमेटी नोएडा पहुंच भी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन दिया जाए। उनकी सुरक्षा पुख्ता की जाए। 24 घंटे संवाद हो सके, माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त एक्शन लिए जाए। औद्योगिक इलाकों में सतर्कता बरती जाए। इस उपद्रव की साजिश में जो भी शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील प्रशासन कर्मचारियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। कर्मचारियों को समझाने की कोशिशें की जा रही हैं। नोएडा डीएम मेधा रुपम ने कहा- ‘अफवाहों पर ध्यान न दें। कंपनियों के साथ बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं। वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्ष महिला ही होगी। शिकायत पेटियां रखी जाएंगी। कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा। हर महीने की 10 तारीख तक वेतन का एकमुश्त भुगतान कर दिया जाएगा। वेतन पर्ची अनिवार्य रूप से दी जाएगी।’ ———————– यह खबर भी पढ़िए… नोएडा में फैक्ट्री कर्मचारियों ने क्यों बवाल मचाया?:4 दिन पहले हरियाणा में 35% सैलरी बढ़ी, UP के कर्मचारियों की डिमांड क्या है? यूपी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इंडस्ट्रियल इलाका सोमवार को अचानक उबल उठा। 9 अप्रैल से जारी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी की। बवाल की वजह से नेशनल हाईवे-9 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। सीएम योगी तक को शांति की अपील करनी पड़ी। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर हिंसा क्यों भड़की, हरियाणा कनेक्शन क्या है और कहां चूक हुई? पढ़िए रिपोर्ट…