बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतगणना कराने का निर्णय लिया गया, क्योंकि निर्वाचन नियमावली के अनुसार पुनः मतदान केवल बूथ कैप्चरिंग, तकनीकी खामी या मतपेटी को नुकसान की स्थिति में ही संभव है, और इस मामले में ऐसी कोई स्थिति सामने नहीं आयी।
जिलाधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों की निगरानी में हुई मतगणना की पूरी प्रक्रिया का वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड रखा गया और परिणाम को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रख लिया गया है और इसे 18 अगस्त को उच्च न्यायालय में पेश किया जाएगा। अंतिम परिणाम न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा।
भाजपा समर्थित सदस्यों के पूरे मत भी अपने प्रत्याशी को नहीं पड़े
इधर, सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत के लिये 27 में से 22 सदस्यों द्वारा हुए मतदान में अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्म्वाल को कांग्रेस प्रत्याशी पर मात्र एक मत की बढ़त मिली, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी बहादुर नगदली और कांग्रेस प्रत्याशी देवकी बिष्ट को समान मत मिले। बराबरी की स्थिति में लॉटरी की गयी, जिसका परिणाम देवकी बिष्ट के पक्ष में आया। जानकारी के अनुसार भाजपा समर्थित 12 और कांग्रेस समर्थित 10 सदस्य मतदान में शामिल हुए, लेकिन एक भाजपा समर्थित सदस्य का मत अवैध हो गया और एक अन्य ने अध्यक्ष पद पर मतदान नहीं किया, जबकि उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी को मत दे दिया। कांग्रेस समर्थित सभी 10 सदस्यों ने अपने प्रत्याशियों को ही मत दिया। इस स्थिति से भाजपा समर्थित सदस्यों की निष्ठा पर भी सवाल उठने लगे हैं।