यूपी में नकली नोटों के मास्टरमाइंड विवेक यादव पर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा नेता उसको सपाई बता रहे हैं तो सपा के नेता आरोपी को भाजपाई साबित कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने देवरिया के भाजपा विधायक शलभमणि पर निशाना साधा। पूछा- इनसे पूछताछ कब होगी? देवरिया से गोरखपुर की दूरी ही कितनी है? विवेक यादव की शलभमणि के साथ तस्वीरें भी पोस्ट की गईं। उधर, शलभमणि समेत भाजपा विवेक को सपा नेता साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं। नकली नोट केस में विवेक का नाम आने के बाद दोनों पार्टियों के नेता भी दूरी बना रहे हैं। सवाल उठता है कि देवरिया का विवेक यादव असल में किस पार्टी से जुड़ा हुआ है? ये संडे बिग स्टोरी में पढ़िए… विधायक के साथ फोटो, सपा बोली- भाजपा का है विवेक
इस मामले की शुरुआत 30 अप्रैल को देवरिया पुलिस के एक्शन के साथ हुई। भदोही और देवरिया के 2-2 लड़कों को 1.80 लाख रुपए के नकली नोटों के साथ पकड़ा गया। ये लड़के देवरिया के विवेक यादव के लिए काम करते थे। सामने आया कि 500, 200 और 100 रुपए के नकली नोट देवरिया में छापकर पूरे यूपी में फैलाए जा रहे थे। इस मामले में विवेक यादव का नाम आते ही देवरिया में भाजपा के लोकल नेता सोशल मीडिया पर एक्टिव हुए। विवेक की तस्वीरों को पोस्ट करके लिखा जाने लगा कि ये तो सपाई है… सपा का प्रचार करता है। फिल्म धुरंधर के अतीक की तरह ये यूपी में नकली नोट खपा रहा था। यहीं से पूरे मामले में सियासत शुरू हुई। 1 अप्रैल को सपा मीडिया सेल ने 4 तस्वीरें शेयर कीं। इनमें पकड़े गए लड़के विधायक शलभमणि के साथ दिख रहे थे। इस पोस्ट में पूछा गया कि विधायक शलभमणि के साथ इन लड़कों की तस्वीरें हैं। नकली नोट चलाने वाले इन लड़कों को लेकर भाजपा और सरकार का प्रशासन चीख पुकार मचा रहा है, क्या भाजपा नेता बताएंगे कि ये लड़के शलभमणि के साथ क्या कर रहे हैं? क्या शलभमणि से नकली नोट केस में पूछताछ होगी? अखिलेश ने पूछा- कार्रवाई में देरी क्यों
सपा के X हैंडल के बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर लिखा- नकली नोट चलाने वालों की तस्वीरें भाजपा विधायक के साथ सड़क से लेकर उनके कार्यालय तक सबूत के तौर पर मिल चुकी हैं। फिर उनके खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्यों? भास्कर ने देवरिया के BJP विधायक शलभमणि त्रिपाठी से बात की… सवाल. क्या आप विवेक यादव के कार्यक्रम में गए थे, आपकी फोटो उसके साथ आई है?
शलभमणि. मैं यहां का विधायक हूं, हर दिन सुबह-सुबह जनता हमारे यहां आती है, अपनी बात रखती है। एक दिन विवेक यादव अपने गांव में काली मां की मूर्ति की स्थापना से जुड़े कार्यक्रम का निमंत्रण देने आया था। उसने मेरे साथ फोटो भी खिंचवाई थी। हम उस कार्यक्रम में गए थे। इन कार्यक्रमों में हम यह नहीं देखते कि कौन सपा का है? कौन भाजपा का है? हम हमेशा ही लोगों तक पहुंचते हैं। सवाल. विवेक BJP का समर्थक है या सपा का?
शलभमणि. विवेक की पूरी प्रोफाइल देखिए, आपको साफ लगेगा कि वह सपा से ही जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद अखिलेश यादव उसे भाजपा से जोड़ रहे हैं, जबकि उन्हें ऐसे वक्त में अपने कार्यकर्ताओं को समझाना चाहिए था कि इस तरह के काम से दूर रहो। पार्टी के लिए काम करो। लेकिन वह अपने ही कार्यकर्ता को दूसरी पार्टी का बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। देवरिया सपा जिलाध्यक्ष बोले- पार्टी में विवेक का कोई पद नहीं
विवेक यादव के राजनीतिक जुड़ाव को और करीब से समझने के लिए भास्कर ने देवरिया के सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव से भी बात की। हमने पूछा- क्या विवेक के पास सपा में कोई पद है? वह कहते हैं- यह व्यक्ति न तो सपा का कोई पदाधिकारी है और न ही सामान्य कार्यकर्ता। उसका पार्टी से किसी भी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं है। ये सब सपा की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश नजर आती है। आरोपी का संबंध अन्य राजनीतिक दलों के कुछ प्रभावशाली नेताओं से है, लेकिन वह लोग राजनीतिक द्वेष में आरोपी को सपा से जोड़ रहे हैं। जोकि बिल्कुल गलत है। अब नकली नोट को यूपी में खपाने की मोडस ऑपरेंडी भी जान लेते हैं… देवरिया के साइबर कैफे में छाप रहे थे नोट, फिर यूपी में फैला देते
30 अप्रैल को पुलिस ने भदोही से 4 लड़कों को पकड़ा। उनसे 1.80 लाख रुपए के नकली नोट मिले। इसमें 1 लाख रुपए के 500-500 रुपए के नोट थे, बाकी 100 और 200 के नोट थे। कार के अंदर कागज भी रखा था, जिससे वो लोग नकली नोट तैयार करते थे। पूछताछ में पता चला कि भदोही के राहुल से उन्हें ये नकली नोट मिले थे। इन्हें प्रयागराज और वाराणसी के मार्केट में चलाना था। यहां पहली बार एक नाम सामने आया विवेक यादव का। बताया गया कि वो पूरे मामले का मास्टर माइंड है। पुलिस के पहुंचने से पहले अंडरग्राउंड हुआ विवेक
विवेक का घर देवरिया के गौरी खुर्द गांव में है। पुलिस विवेक के घर तक पहुंची, लेकिन वो पहले ही अंडरग्राउंड हो चुका था। उसे पहले ही पुलिस छापेमारी की जानकारी मिल चुकी थी। इसके बाद विवेक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसमें वो एक कार में बैठा दिख रहा था। वीडियो में विवेक कहता है- मुझे देवरिया प्रशासन गलत मुकदमे में फंसा रहा है, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं समाजवादी का कार्यकर्ता हूं और जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहा हूं। मैं घर की पूजा पाठ में व्यस्त था, मुझे तो पता भी नहीं था कि ये क्या हो रहा है? 31 अप्रैल को अचानक देखता हूं कि नकली नोट केस में मुझे मुख्य आरोपी बना दिया है। 10 मिनट बाद विवेक ने एक और वीडियो अपलोड किया, उसमें भी खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बता रहा था और साजिश की तरफ इशारा कर रहा था। कभी ड्राइवर थे पिता, अब 14 टैक्सी और स्टैंड चला रहा
हमारी टीम ने देवरिया में विवेक के बारे में जानकारी जुटाई। लोगों ने बताया- विवेक के पिता अवध बिहारी यादव पहले टैक्सी चलाते थे। फिर धीरे-धीरे उनके पास 14 टैक्सी हो गईं। अब वो ट्रैक्सी दूसरे ड्राइवरों से चलवाते हैं। गौरी बाजार में जो टैक्सी स्टैंड है, उसे चलाने का काम भी अवध बिहारी करते हैं। विवेक का बड़ा भाई मनोहर यादव भी पिता के साथ टैक्सी चलवाता है। विवेक का एक और भाई जनोहर यादव है, ये पिछले करीब 5 साल से विदेश में रहता है। विवेक तीन भाइयों में सबसे छोटा है। 2021 में चुनाव लड़ा, जमानत जब्त हो गई
देवरिया के लोगों के मुताबिक, विवेक पिछले कुछ महीनों से छोटे-बड़े इवेंट में सपा नेता की तरह पहुंच रहा था। 2021 में उसने वार्ड-18 गौरी बाजार उत्तरी मध्य से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। इसमें विवेक को सिर्फ 892 वोट मिले थे। जीतने वाले सुभाष यादव को 5610 वोट मिले थे। विवेक उस चुनाव में 9वें स्थान पर रहा था। अपनी जमानत नहीं बचा पाया था। इसके बाद उसने इस क्षेत्र में जाना बंद कर दिया। इसके बाद वो वार्ड-17 दक्षिणी मध्य गौरी बाजार में एक्टिव हो गया, माना जाने लगा कि वो इस इलाके से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। विवेक को चुनाव हराने वाले सुभाष यादव कहते हैं- 2021 में यह नया लड़का था। साधारण तरीके से चुनाव लड़ा था। कोई बहुत खर्च या फिर कोई बड़ी रैली नहीं की थी। इलाके के बहुत सारे लोग उसको जानते भी नहीं थे। जो नए-नए लड़के थे, वही इसके साथ थे। चुनाव के बाद इसकी सक्रियता कम हो गई। हम भी बसपा में हैं, तो पार्टी का काम रहता है, इतना उसे लेकर ध्यान नहीं दिया। अभी नोट छापने का मामला आया है, तब इसकी चर्चा हो रही है। अचानक से गाड़ियां बदलने लगीं, पार्टियां शुरू हुईं
लोगों से बात करने के बाद हमें पता चला कि 2021 के चुनाव के बाद से विवेक की लाइफस्टाइल बदलने लगी थी। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता था, इसलिए इस बदलाव को इसके सोशल मीडिया अकाउंट को देखकर समझा जा सकता है। शुरुआत में विवेक ने स्कार्पियो खरीदी, फिर हंटर जीप भी खरीद ली। क्षेत्र में वह बुलेट से घूमता था। किसी इवेंट में जाता तो पूरे काफिले के साथ चलता था, इसमें स्कार्पियों और हंटर जीप के अलावा 3-4 और गाड़ियां दिखती थीं। विवेक जिस गांव में रहता है, उसकी आबादी सिर्फ 2 हजार है। यादव, दलित, वैश्य और निषाद बिरादरी के लोग रहते हैं। वह लोग भी विवेक की बदली हुई लाइफ स्टाइल को देख चकित थे। गांव के ही एक व्यक्ति कहते हैं- विवेक के घर पर सुबह से लड़कों का जमावड़ा लगता था। आसपास के मैदानों में यह लोग बर्थडे सेलिब्रेशन करते थे, एक साथ 10-10 केक मंगवाए जाते थे। पार्टी का सारा खर्च विवेक ही उठाता था। उसने अपना एक कार्यालय भी बनाया हुआ था। गोरखपुर में भी प्लॉट खरीदा था। इसके लिए पैसा कहां से आ रहा था? ये गांव के लोग समझ नहीं पा रहे थे। शुरुआत से ही सपा का समर्थक रहा है विवेक
विवेक यादव जिला पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहा था। उसने जो पोस्टर-बैनर छपवाए हैं, उसमें भी अखिलेश यादव की तस्वीर लगवाई है। जिस स्कार्पियो से चलता है, उसके आगे-पीछे भी सपा का ही झंडा और बैनर लगा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विवेक ने गांव-गांव जाकर सपा के लिए लोगों से वोट मांगे थे। इससे जुड़े पोस्ट उसके फेसबुक अकाउंट पर नजर आते हैं। त्योहारों पर बधाई देने वाले जो पोस्टर बनवाकर पोस्ट करता था, उसमें भी अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव होते थे। 1 साल के पोस्ट डिलीट किए, लोग बोले- तब FIR हुई थी
विवेक यादव फेसबुक-इंस्टाग्राम पर लगातार सक्रिय रहा। लेकिन 1 जनवरी, 2021 से लेकर 4 जून, 2022 के बीच उसकी प्रोफाइल पर कोई पोस्ट नजर नहीं आती। इसे लेकर लोग कहते हैं- उस दौरान विवेक पर एक मुकदमा हुआ था, इसलिए एक्टिव नहीं रहा। बाद में सपा से जुड़े ही पोस्ट विवेक के अकाउंट पर दिखते हैं। अब नकली नोट रैकेट में अरेस्ट बदमाशों को जानिए विवेक की अरेस्टिंग के बाद पूरा नेटवर्क खुल सकेगा
नकली नोट केस में IPS कुलदीप सिंह गुनावत ने 30 अप्रैल को गिरफ्तारी की। वह बताते हैं- भदोही के जो दो लड़के पकड़े गए हैं, वह प्रयागराज-वाराणसी के जिलों में नकली नोट चलाने का काम करते थे। देवरिया का नरेंद्र उर्फ विराट यादव इन दोनों तक नोट पहुंचाने का काम करता था। धर्मेंद्र यादव नोट छापने का काम करता था। उसने एक तरह से साइबर कैफे खोल रखा है, लोकल बैंक की फ्रेंचाइजी भी ले रखी है, इसी की आड़ में वह नकली नोटों को छापने का काम करता था। कुलदीप बताते हैं- अभी तक इन लोगों से पूछताछ में जो निकला, उसमें विवेक यादव मुख्य आरोपी है। उसके गिरफ्तार होने के बाद इस पूरे मामले में और चीजें पता चलेंगी। इन सवालों के जवाब अभी अधूरे? IPS कुलदीप कहते हैं- हमारी टीमें लगी हैं, जल्द ही हम विवेक को गिरफ्तार करेंगे और इस मामले को खोलेंगे। फिलहाल, विवेक पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है। गिरफ्तारी के लिए टीम बना दी है। विवेक हर दिन गाड़ी में बैठे हुए एक वीडियो बना रहा और उसे फेसबुक पर पोस्ट कर रहा है। उसमें वह कहता है- आज मेरे नाम पर दोनों पक्ष के नेता राजनीति कर रहे हैं। आप लोग ऐसा मत करिए। ………… आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ………… ये खबर भी पढ़ें – धुरंधर में अतीक ISI एजेंट…सच्चाई क्या?: उमेश पाल हत्याकांड की चार्जशीट में पाकिस्तान कनेक्शन; नकली नोटों में कभी अरेस्टिंग नहीं ‘धुरंधरः द रिवेंज’ फिल्म में 7-8 मिनट अतीफ अहमद नाम का कैरेक्टर दिखता है। रील का अतीफ अहमद, रियल लाइफ में यूपी के प्रयागराज का माफिया अतीक अहमद से मिलता है। फिल्म में अतीफ अहमद का मर्डर ठीक वैसे ही दिखाया है, जैसे प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशरफ का हुआ था। फिल्म में ऐसा दिखाया कि ये सब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजय सान्याल की प्लानिंग से हुआ। जबकि, यूपी में माना जाता है कि सीएम योगी के सख्त रवैए की वजह से माफिया का आतंक खत्म होता चला गया। पढ़िए पूरी खबर…
यूपी में नकली नोट का मास्टरमाइंड भाजपाई या सपाई?:BJP विधायक उसके पूजा आयोजन में पहुंचे; आरोपी के घर-गाड़ी पर सपा के झंडे
