सोनीपत मंडी का प्रधान सचिव ने किया निरीक्षण:सड़क देखकर भड़के पंकज अग्रवाल, बोले-ये तो जूते से ही उखड़ रही

Spread the love

रबी खरीद सीजन की शुरुआत के साथ ही व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने सोनीपत और गोहाना की अनाज मंडियों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान जहां एक ओर अधिकारियों ने गेहूं खरीद को लेकर तैयारियों, हेल्प डेस्क, बायोमैट्रिक हाजिरी और किसानों की सुविधाओं का जायजा लिया। वहीं दूसरी ओर मंडियों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। सोनीपत अनाज मंडी में सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता को लेकर प्रधान सचिव खासे नाराज नजर आए और मौके पर ही सख्त टिप्पणी करते हुए सैंपल लेने और जांच के आदेश दिए। इस दौरान विधायक निखिल मदान ने भी सड़क की गुणवता पर सैंपल लेकर रिपोर्ट मांगी है। गेहूं खरीद के लिए पोर्टल खुलने के पहले दिन मंडियों में किसानों की आमद नहीं होने से खरीद प्रक्रिया धीमी नजर आई। सड़क की गुणवत्ता पर भड़के प्रधान सचिव
सोनीपत अनाज मंडी में निरीक्षण के दौरान प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल सड़क की खराब गुणवत्ता को देखकर नाराज हो गए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि “अरे ये कैसी सड़क बना दी, जूते से ही उखड़ रही है।” इसके बाद उन्होंने मौके से सैंपल लेने और गुणवत्ता खराब पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। गेहूं खरीद पोर्टल खुला, पहले दिन नहीं पहुंचे किसान
बुधवार से रबी खरीद सीजन के तहत गेहूं खरीद के लिए पोर्टल ओपन कर दिया गया है। हालांकि पहले दिन किसी भी मंडी में किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवक बढ़ने की संभावना है और सभी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी गई हैं। डिवाइडर और अधूरे कार्यों पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान मंडी में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी की गई। सड़क के अलावा डिवाइडरों का अधूरा काम देखकर अधिकारियों ने असंतोष जताया और जल्द से जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। आढ़तियों ने भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई। अटल कैंटीन की व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखे अधिकारी
मंडी परिसर में संचालित अटल कैंटीन का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। यहां किसानों और मजदूरों को मात्र 10 रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे सराहनीय पहल बताया गया। निरीक्षण के दौरान शौचालयों की सफाई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, जिस पर अधिकारियों ने खुशी जाहिर की और इसे लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए।
बारदाने की कमी पर सख्त निर्देश
आढ़तियों ने मंडी में बारदाना न पहुंचने की समस्या उठाई, जिस पर प्रधान सचिव ने हैफेड अधिकारियों को तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विधायक निखिल मदान ने बताया कि बड़ी मात्रा में पीपी और जूट बैग तैयार कराए गए हैं और जल्द ही मंडियों में पहुंचाए जाएंगे। बायोमैट्रिक और हेल्प डेस्क का किया निरीक्षण
प्रधान सचिव ने गेट पास केंद्र, हेल्प डेस्क और बायोमैट्रिक हाजिरी केंद्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। मंडी में बायोमैट्रिक के लिए 4 केंद्र बनाए गए हैं। अधिकारियों के बयान
प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि मंडियों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए निरीक्षण किया गया है। सड़क की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। विधायक निखिल मदान ने लगाई क्लास
वहीं सोनीपत विधायक निखिल मदान ने सड़क के साथ लगाए गए डिवाइडर के काम पर मंडी के अधिकारी पर भड़कते हुए कहा कि एक काम पूरा करते नहीं हो, दूसरे काम पर चले जाते हो। विधायक ने कहा कि काम को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस आधे अधूरे काम पर कौन जिम्मेदारी लेगा। विधायक ने ये भी कहा कि 10 दिन से क्या कर रहे थे। मौके पर अधिकारी से शाम तक रिपोर्ट भी मांगी है। विधायक निखिल मदान ने कहा कि मंडी के विकास कार्यों के लिए करोड़ों का बजट जारी किया गया है और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मंडी में इनेलो का किसान कष्ट निवारण केंद्र इंडियन नेशनल लोकदल ने सोनीपत की अनाज मंडी में कष्ट निवारण केंद्र मुख्य गेट पर स्थापित कर दिया है। जिसमें उन्होंने दीवार पर बैनर चिपकाए हुआ है और वही 10 से 15 कुर्सी डालकर इनेलो के कार्यकर्ता बैठे हुए नजर आए। वहीं इनेलो के जिला अध्यक्ष से कुनाल गहलावत ने प्रदेश सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताया और कहा कि किसानों को नई नई नीतियों के बहाने तंग किया जा रहा है। गोहाना में बिना नंबर ट्रैक्टर पर रोकी एंट्री
गोहाना अनाज मंडी में पहले दिन एक किसान गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचा, लेकिन ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण उसे गेट से ही वापस लौटा दिया गया। बाद में किसान ने ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट लगवाई, जिसके बाद उसे मंडी में प्रवेश मिला। किसान बोले-नए ट्रैक्टर पर नंबर न होने से परेशानी
वार्ड नंबर 10 निवासी किसान रामनिवास ने बताया कि वह नया ट्रैक्टर खरीदकर सीधे मंडी में फसल लेकर पहुंचे थे, लेकिन नंबर प्लेट न होने के कारण उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि अब फसल का रजिस्ट्रेशन और वाहन का नंबर होना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे किसानों को अतिरिक्त औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ रही हैं। बायोमेट्रिक और ओटीपी से होगा सत्यापन
गोहाना मंडी अधिकारियों के अनुसार, इस बार खरीद प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसान को आढ़ती के पास निर्धारित स्थान पर अंगूठे या आंखों के माध्यम से पहचान सत्यापित करनी होगी। इसके अलावा आधार कार्ड आधारित ओटीपी का विकल्प भी रखा गया है। नॉमिनी व्यवस्था भी लागू, 3 लोगों को दी छूट
अधिकारियों ने बताया कि यदि फसल का पंजीकरण जिस व्यक्ति के नाम है, वह खुद मंडी में नहीं आ सकता तो वह अधिकतम 3 लोगों को नॉमिनेट कर सकता है। ऐसे में जो व्यक्ति फसल लेकर आएगा, उसकी जानकारी पहले से दर्ज करानी होगी। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। गोहाना में प्रशासन का कहना है कि मंडियों में सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। किसानों और मजदूरों के लिए कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जहां ₹10 में भरपेट भोजन दिया जा रहा है। 6 परचेज सेंटर शुरू, दो नए सेंटर प्रस्तावित
गोहाना में इस बार हैफेड, एफसीआई और वेयरहाउस के माध्यम से सरकारी खरीद की जा रही है। फिलहाल 6 परचेज सेंटर बनाए गए हैं, जबकि रूखी और कथुरा में नए सेंटर खोलने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। व्यापारियों ने जताई आपत्ति, पुराने सिस्टम की मांग
व्यापार मंडल गोहाना के प्रधान विनोद ने नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे मंडी में लंबा जाम लग सकता है। उनका कहना है कि मंडी का क्षेत्र छोटा है और यहां हर साल करीब 30 लाख बैग अनाज पहुंचता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार दो सेंटर कम कर दिए गए हैं, जिससे अतिरिक्त दबाव मंडी पर पड़ेगा। बारदाने और उठान को लेकर भी उठी मांग
प्रधान विनोद ने मांग की है कि 50 प्रतिशत बारदाना पहले से उपलब्ध कराया जाए, ताकि समय पर अनाज की भराई हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि फसल का उठान 12 घंटे के भीतर होना चाहिए, क्योंकि नमी के कारण देरी होने पर अनाज का वजन कम हो जाता है, जिससे आढ़तियों को नुकसान उठाना पड़ता है।