पूर्वांचल की सियासत जाति और दबाव की पॉलिटिक्स के बिना अधूरी कही जाती है। इस बार इसी सियासी चक्रव्यूह में भाजपा फंसी हुई दिख रही है। पूर्वांचल में 5 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को उसके दिग्गजों ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। चंदौली में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडे के बीच खुली रस्साकशी चल रही। देवरिया में 2 पूर्व प्रदेश अध्यक्षों (सूर्य प्रताप शाही और रमापति राम त्रिपाठी) का अहम टकरा रहा। जबकि गोरखपुर-वाराणसी में सीएम योगी और पीएम मोदी की पसंद-नापसंद ने मामला पूरी तरह अटका रखा है। इसका असर पार्टी के काम-काज पर भी पड़ रहा है। आखिर इस खींचतान की वजह क्या है? विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम का वक्त है, ऐसे में 5 जिलाध्यक्षों की घोषणा कब तक होगी? पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट में… पहला जिला- चंदौली ब्राह्मण v/s ठाकुर में फंसी जिलाध्यक्ष की नियुक्ति
चंदौली पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का गृह जनपद है। पार्टी सूत्र बताते हैं, पांडेय वर्तमान जिलाध्यक्ष काशी सिंह को हटाना चाहते हैं। उनकी इच्छा किसी ब्राह्मण चेहरे को अध्यक्ष बनाने की है। उनके खेमे का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में काशी सिंह ने सही ढंग से काम नहीं किया। क्षत्रिय जिलाध्यक्ष होने के बाद भी ठाकुरों ने सपा को वोट दिया। इससे दो बार के सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय चुनाव हार गए। काशी सिंह रक्षामंत्री के खेमे के हैं। अब राजनाथ सिंह और डॉ. महेंद्रनाथ खेमे की खींचतान में जिलाध्यक्ष की घोषणा अटक गई है। खास बात यह है कि पार्टी ने पांडेय को प्रदेश संगठन चुनाव का प्रभारी बनाया था। उनकी देख-रेख में हुए संगठनात्मक चुनाव में 93 जिलाध्यक्ष घोषित हो चुके हैं। लेकिन, उनके गृह जनपद में ही जिलाध्यक्ष की नियुक्ति अटकी है।
दूसरा जिला- देवरिया रमापति बोले- जिसकी पैरवी करूंगा, वो अध्यक्ष होगा
देवरिया में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के करीबी और सदर ब्लॉक प्रमुख पिंटू जायसवाल का जिलाध्यक्ष बनना लगभग तय था। त्रिपाठी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी जायसवाल के नाम पर जारी कर लिया था। लेकिन, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद शशांकमणि त्रिपाठी और 2 स्थानीय विधायकों ने पिंटू इसका विरोध किया। हालांकि, मामले में रमापति राम त्रिपाठी का कहना है- मैंने पिंटू जायसवाल को जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए किसी से नहीं कहा। जो ऐसा कह रहा, उससे पूछिए कि वो ऐसा क्यों कह रहा है? जहां तक पैरवी की बात है, तो अगर मैंने किसी की पैरवी की, तो वो अध्यक्ष बन ही जाएगा। पिंटू के विरोध में तर्क ये दिया गया कि वे 2021 में पंचायत चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें ब्लॉक प्रमुख बना दिया था। अब अगर जिलाध्यक्ष बनाया, तो कार्यकर्ताओं में गलत मैसेज जाएगा। यही बात लखनऊ से लेकर दिल्ली तक गई और पिंटू जिलाध्यक्ष बनते-बनते रह गए। अब पार्टी ऐसा नाम खोज रही है, जिस पर सभी रजामंद हों। तीसरा जिला- अंबेडकरनगर प्रदेश अध्यक्ष को कुर्मी-ब्राह्मण चेहरे की तलाश
भाजपा यहां जिला उपाध्यक्ष राणा रणधीर सिंह को प्रमोशन देकर अध्यक्ष बनना चाहती थी। लेकिन, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का तर्क था कि फैजाबाद मंडल कुर्मी और ब्राह्मण बहुल इलाका है। यहां सपा के पास कुर्मी और ब्राह्मण नेता हैं। पार्टी ने सिर्फ फैजाबाद मंडल के बाराबंकी में कुर्मी जिलाध्यक्ष बनाया है। एक भी ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष नहीं बनाया। ऐसे में चौधरी ने राणा की जगह किसी कुर्मी या ब्राह्मण चेहरे को जिलाध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया, जिससे वोटबैंक साधने में मदद मिले। यही वजह है कि अभी तक अंबेडकरनगर में भी जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। चौथा जिला- वाराणसी PM की पसंद से ही बनेगा जिलाध्यक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हंसराज विश्वकर्मा जिलाध्यक्ष हैं। पार्टी ने उन्हें विधान परिषद सदस्य (MLC) भी बनाया है। 34 साल से राजनीति में सक्रिय हंसराज इलाके में पिछड़ों का अहम चेहरा हैं। ऐसे में उनकी जगह किसी मजबूत विकल्प की तलाश है। सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी में जिलाध्यक्ष का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरी झंडी के बाद ही होगा। प्रधानमंत्री की मर्जी से ही हंसराज तीन बार से जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बने हुए हैं। पांचवां जिला- गोरखपुर पिछले साल जून में हुआ जिलाध्यक्ष का निधन
मार्च, 2025 में गोरखपुर में देवेश श्रीवास्तव को जिलाध्यक्ष घोषित किया था। लेकिन उनका जून, 2025 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। अब यहां जिलाध्यक्ष का पद खाली है। यहां सियासी उठापटक जैसा कुछ नहीं है। सीएम योगी की पसंद से ही गोरखपुर जिलाध्यक्ष बनेगा। इसलिए उनके इशारे का इंतजार किया जा रहा है। अब-तक 93 नामों पर लगी मुहर
भाजपा ने यूपी को 98 संगठनात्मक जिलों में बांट रखा है। पार्टी ने 16 मार्च, 2025 को 70 जिलाध्यक्षों की पहली सूची जारी की थी। इसमें शामिल गोरखपुर के जिलाध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव का जून, 2025 में निधन हो गया था। वहीं, गोंडा जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप को पार्टी कार्यालय में एक महिला कार्यकर्ता के साथ वीडियो वायरल होने पर हटा दिया गया था। इस तरह 68 जिलाध्यक्ष रह गए। इसके बाद 26 नवंबर को 14 और इस साल 26 फरवरी को 11 जिलाध्यक्षों के नाम सामने आए। इसमें गोंडा में इकबाल बहादुर तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन चंदौली, देवरिया, वाराणसी, अंबेडकरनगर और गोरखपुर में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति अब-तक नहीं हो पाई है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सपा का नारा PDA, 70% मुस्लिम-यादव जिलाध्यक्ष, अखिलेश को संगठन में क्यों किसी और पर भरोसा नहीं सपा 2022 में यूपी की सत्ता की दौड़ में पिछड़ने के बाद से PDA (पिछड़ा-दलित-मुस्लिम) का नारा दे रही है। 2024 में उसे इस नारे के बलबूते यूपी की 80 लोकसभा सीटों में 37 पर सफलता मिली। उसके साथ गठबंधन में लड़ी कांग्रेस के भी 6 सदस्य जीतने में सफल रहे थे। पूरी खबर पढ़ें…
चंदौली में BJP जिलाध्यक्ष पर राजनाथ-महेंद्रनाथ आमने-सामने:गोरखपुर में योगी की पसंद का इंतजार; यूपी में 5 जिलाध्यक्षों पर फंसा पेंच
