‘हे भगवान, बेटे को अब अधिक दिनों तक दर्द मत देना। इतना मत तड़पाना कि हम उसे देख भी न पाएं। 13 साल तक हम हाथ जोड़कर प्रार्थना करते रहे। मन्नतें मांगीं, लेकिन हरीश बोल नहीं सका। उसका शरीर भले ही हमसे दूर जा रहा हो, लेकिन वह हमारे अंदर ही बसा रहेगा। पूरा परिवार इस दर्द को जीवन भर नहीं भूल पाएगा।’ ये शब्द हैं सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा की मां निर्मला देवी के। अस्पताल में उनसे मिलकर आई पड़ोसी महिला ने नाम न छापने की शर्त पर ये बातें दैनिक भास्कर रिपोर्टर को बताईं। उन्होंने बताया कि हरीश की मां पति अशोक राणा के साथ बेटे के लिए प्रार्थना कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली एम्स ने जिस पेलिएटिव केयर वार्ड में हरीश को रखा है, उसके पास वाले कमरे में मां-बाप को रहने की इजाजत दी है। हरीश का ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया गया है। मंगलवार को उन्हें पाइप से पानी देना भी बंद कर दिया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, खाना-पानी बंद होने के बाद इंसान एक से दो हफ्ते जीवित रह सकता है। दरअसल, 31 साल के हरीश राणा 13 साल से कोमा (ब्रेन डेड) में हैं। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने मां-बाप की याचिका पर हरीश को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद के राजनगर स्थित राज एंपायर सोसायटी स्थित घर से दिल्ली एम्स शिफ्ट किया जा चुका है। अंगदान के लिए हरीश की किडनी, लीवर की हो रही जांच
मंगलवार को मां-बाप ने हरीश के अंगदान की इच्छा जताई थी। इसके बाद एम्स की मेडिकल टीम हरीश के अंगों की जांच कर रही है। टीम यह देख रही है कि हरीश के शरीर के कौन-कौन से अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त हैं। अगर हरीश राणा के लीवर, फेफड़े, किडनी, हृदय, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग कार्यशील मिले, तो इन्हें दान किया जा सकता है। कॉर्निया और हृदय के वाल्व की भी जांच हो रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, एक-दो दिन में इसकी जांच रिपोर्ट पूरी हो जाएगी। घर से AIIMS ले जाने से पहले का वीडियो सामने आया था
जब 14 मार्च को हरीश को घर से AIIMS ले जाया जा रहा था, उस दिन उसके घर ब्रह्मकुमारी आश्रम की दीदी लवली पहुंची थीं। उन्होंने हरीश के माथे पर चंदन का टीका लगाया था। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था- ‘सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ…ठीक है…।’ इस दौरान हरीश के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गई थीं। पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी थी। कहा था कि न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा। हरीश का परिवार करीब 18 साल से ब्रह्मकुमारी से जुड़ा है। करीब 6 साल पहले पूरा परिवार गाजियाबाद शिफ्ट हुआ था। इससे पहले 13 साल तक हरीश राणा के पिता अशोक राणा दिल्ली रहे। ब्रह्मकुमारी लवली ने बताया था कि 2-3 साल पहले हरीश की पीड़ा के बारे में परिवार ने बताया था। हरीश के भाई, बहन और मां और पिता हर वक्त रोते रहते थे। जब उनसे हरीश का दर्द नहीं देखा गया तो ब्रह्मकुमारी केंद्र में आकर इच्छामृत्यु का विचार रखा। कहा कि बस बहुत हो चुका। अब बेटे को इतने दुख में नहीं देखा जा रहा। बस उसे मुक्ति दिला दीजिए। ‘सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया’ राणा परिवार ने कहा था कि हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया। हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जा रही थी। बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है? हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे हैं। जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत सम्मान से घर लाएंगे और उसे अंतिम विदाई देंगे। परिवार और सोसाइटी में खामोशी छाई
हरीश के दिल्ली AIIMS में शिफ्ट होने के बाद से परिवार में खामोशी है। पिता भी किसी से मिल नहीं रह रहे। सोसाइटी के लोग बताते हैं कि वह भावुक हैं। बहन और मां दिल्ली AIIMS से लौटने के बाद भी रोए। मां निर्मला ने कहा था कि जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल की। दुख तो बस इस बात का रहा कि उसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती, तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती थी कि आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपक जाए। जिससे मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसके जिंदा होने का सुकून होता था। हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए…
दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और कोमा में चले गए थे। तब से न वह बोल पा रहे और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडशोल (गहरे घाव) भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी, 13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। देश में इस तरह का यह पहला मामला है। पूरी खबर पढ़ें
इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश की मां का दर्द:भगवान बेटे को इतना मत तड़पाना कि देख न पाऊं, अस्पताल में कर रहीं प्रार्थना
