करनाल के घरौंडा क्षेत्र में इंडो-इजराइल सब्जी उत्कृष्टता केंद्र की तकनीक अब सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाई जा रही है। सरकार की योजना के तहत उत्कृष्टता केंद्र की तर्ज पर “विलेज ऑफ एक्सीलेंस” यानी उत्कृष्ट गांव का मॉडल शुरू किया गया है। इसके तहत घरौंडा के शाहजानपुर और फुरलक गांव को चुना गया है। दोनों गांवों में किसानों के खेतों पर सब्जियों की खेती नई तकनीक के साथ करवाई जा रही है और विशेषज्ञों की निगरानी में प्रयोग किए जा रहे हैं, ताकि आसपास के किसान भी आधुनिक खेती सीख सकें। दो गांवों में पांच-पांच किसानों के खेतों में लगाए गए डेमो
इंडो-इजराइल सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (सीईवी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घरौंडा के शाहजानपुर और फुरलक गांव को विलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चयनित किया गया। दोनों गांवों में पांच-पांच किसानों को चुना गया। इन किसानों के खेतों में जो भी सब्जियां लगाई गई हैं, उन्हें उत्कृष्टता केंद्र के विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार किया जा रहा है। खेतों में जब भी फ्रंट लाइन डेमोन्स्ट्रेशन (एफएलडी) किया जाता है, तब आसपास के लगभग 50 किसानों को भी मौके पर बुलाया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि दूसरे किसान भी नई तकनीक को समझें और अपने खेतों में उसे अपनाएं। जिन किसानों के खेतों में यह प्रदर्शन हो रहा है, वे खुद भी इन तकनीकों को सीखते हैं और आगे दूसरे किसानों को इसकी जानकारी देते हैं। पूरी फसल अवधि में एक्सपर्ट की रहती है निगरानी
सीईवी की प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. हर्षिता ने बताया कि दोनों गांवों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए चयनित किया गया है। इस दौरान किसान लगातार विशेषज्ञों के संपर्क में रहते हैं। यदि फसल में किसी प्रकार की समस्या आती है तो उसका समाधान विशेषज्ञों की तरफ से ही बताया जाता है। उन्होंने बताया कि फसल की शुरुआत से लेकर कटाई तक विशेषज्ञ लगातार खेतों पर नजर रखते हैं। जब फसल पूरी तरह से तैयार होकर कटाई हो जाती है, तब किसानों से इसका रिव्यू भी लिया जाता है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि नई तकनीक का किसानों की फसल पर कितना प्रभाव पड़ा। किसानों को मिल रहा मल्चिंग, ट्रैप और स्प्रे पंप का सहयोग
विलेज ऑफ एक्सीलेंस योजना के तहत चयनित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ कई जरूरी संसाधनों का सहयोग भी दिया जा रहा है। इसमें मल्चिंग शीट, कीट पकड़ने वाले ट्रैप, स्प्रे पंप और लो टनल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इंसेक्ट ट्रैप में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट चिपक जाते हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है। वहीं ज्यादा ठंड होने पर लो टनल फसल को ठंड से बचाने में मदद करती है। मल्चिंग शीट का इस्तेमाल फसल को जमीन के सीधे संपर्क से बचाने के लिए किया जाता है और इससे खेत में खरपतवार भी कम उगते हैं। विशेषज्ञ किसानों को इन सभी तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाते हैं ताकि फसल की गुणवत्ता बेहतर हो और किसानों की आय बढ़ सके। नई तकनीक से परंपरागत खेती को मिल रही मजबूती
डॉ. हर्षिता ने बताया कि जिन गांवों और किसानों को चुना गया है, वे पहले से ही सब्जियों की खेती कर रहे हैं और नई तकनीक अपनाने में रुचि रखते हैं। किसानों को किसी विशेष फसल लगाने के लिए नहीं कहा गया था। उन्होंने वही फसलें लगाई हैं जो वे पहले से उगाते आ रहे हैं। इनमें शिमला मिर्च जैसी सब्जियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती में जब नई तकनीक का इनपुट मिलता है तो खेती ज्यादा बेहतर और लाभकारी बन जाती है। सेंटर के सभी एक्सपर्ट मिलकर कर रहे किसानों की मदद
घरौंडा सीईवी के हेड डीडीएच डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि विलेज ऑफ एक्सीलेंस एक बहुत ही अच्छा कंसेप्ट है। इसमें केवल एक विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि सेंटर के सभी एक्सपर्ट मिलकर किसानों के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी किसान को फसल से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या आती है तो विशेषज्ञ उन्हें मार्गदर्शन देते हैं। इसके अलावा समय-समय पर खेतों का दौरा भी किया जाता है। उनका कहना है कि इस पहल से किसानों को नई तकनीकों से जुड़ने का मौका मिलेगा और वे अपने उत्पादन को बढ़ाकर बेहतर आय हासिल कर सकेंगे। वहीं जब दूसरे गांवों के किसान इन खेतों में हुए बदलाव को देखेंगे तो वे भी आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीक सीधे खेतों तक:करनाल के दो गांव बने विलेज ऑफ एक्सीलेंस,पांच-पांच किसानों के खेतों में एक्सपर्ट की देखरेख में सब्जियों की खेती
