हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में चैत्र मास में लगने वाला चैत्र चौदस मेला श्रद्धा, भक्ति, परंपरा और कारोबार का अनूठा संगम है। इस ऐतिहासिक मेला छोटी इकोनॉमी को भी बूस्ट करता है। इस मेले से जुड़ा कारोबार कईं करोड़ रुपए का है। आज मंगलवार को चैत्र चौदस मेले का मुख्य स्नान होगा। इस मेले में सबसे बड़ी कड़ी तीर्थ पुरोहित और उनके यजमान हैं। पुरोहित और यजमान का संबंध पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल रहा है। पुरोहित अपने यजमानों की वंशावली संभाले हुए हैं। पुरोहितों के मुताबिक, उनके पास 300 साल का रिकॉर्ड बही-पौथी में सुरक्षित दर्ज है। इसके पहले का रिकॉर्ड मुगल आक्रांताओं ने नष्ट कर दिया था। पूजा के बाद दिखाते वंशावली सरस्वती तीर्थ पर देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, तर्पण और पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं। पूजा-अर्चना के बाद पुरोहित अपने यजमान को उसके पूर्वजों की जानकारी देते हैं। इस सेवा के बदले में यजमान दान-दक्षिणा अर्पित करते हैं। यह दक्षिणा 1 रुपए से लेकर लाखों रुपए तक हो सकती है। हालांकि पुरोहित अपने यजमान से कोई मांग नहीं करते। अलग-अलग नाम से गद्दी इस तीर्थ पर पुरोहितों को गद्दी के नाम से जाना जाता है। यजमान इन गद्दी का नाम लेकर अपने पुरोहित तक पहुंचते हैं। यहां बड़ वाले, डफां वाले, फुलकारी वाले, सालिग्राम, बंसरी वाले, छतरी वाले, घड़ियां वाले, मोरथली वाले और राजपुरोहित (धौली हवेली) प्रमुख गद्दियां है। पुरोहितों को हरी पगड़ी वाले, नंबरदार जी, पचौली और अन्य नाम से भी पुकारा जाता है। डिजिटल युग में बही-पौथी पर विश्वास खास बात यह है कि इस डिजिटल युग में पुरोहित कंप्यूटर पर विश्वास नहीं करते, इसलिए परंपरा के मुताबिक बही-पौथी में यजमानों का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। तीर्थ पुरोहित विनोद शास्त्री ने बताया कि कंप्यूटर में वायरस आने से डेटा खराब हो सकता है। इसके अलावा डेटा चोरी होने का डर भी है।
वॉट्सऐप से हो रहा मेल हालांकि पुरोहित अपने काम में मोबाइल का खूब इस्तेमाल करते हैं। यहां पुरोहितों के राम-राम पर्ची ग्रुप, तीर्थ पुरोहित ग्रुप और अन्य कई वॉट्सऐप ग्रुप बने हुए हैं। जैसे ही यजमान तीर्थ पर पहुंचे उनके नाम, गौत्र, पैतृक गांव और दादा-परदादा की जानकारी इन ग्रुप में भेजी जाती है। पुरोहित अपने इंडैक्स में जानकारी का मिलान कर यजमान तक पहुंच जाते हैं। बॉलीवुड की हस्तियां भी यजमान यहां पुरोहितों के पास कई बड़े कारोबारी, राजपरिवार, राजनैतिक और बॉलीवुड हस्तियों की वंशावली भी दर्ज है। तीर्थ पुरोहित विनोद बताते हैं कि पुरोहित का मतलब ही अपने यजमान का हित करना है। यह कमाई का साधन नहीं है, बल्कि सेवा का काम है। कईं पीढ़ियों से उनका यजमनों के साथ धार्मिक और भावनात्मक रिश्ता है। परंपरा और कारोबार का अनूठा संगम
मेले में होने वाला आर्थिक लेनदेन करोड़ों में रुपए में पहुंच जाता है। यजमान के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने वाले ब्राह्मण को जहां दक्षिणा मिलती है, वहीं धार्मिक कर्म में लगने वाली सामग्री से कइयों की आजीविका चलती है। पूजा के बाद बीज वाला फल ले जाने की परंपरा है ताकि धन-धान्य व परिवार में वृद्धि हो। इसलिए तीर्थ पर फल बेचने वाले बैठे रहते हैं। इसके अलावा मेले में बर्तन, कपड़े, चारपाई, आटा, सूत, तेल, तिल, प्रसाद, दूध सहित अन्य सामग्री के लिए स्टॉल भी लगते हैं।
डिजिटल युग में भी कंप्यूटर नहीं, बही-पौथी पर भरोसा:बॉलीवुड-राजघराने भी यजमान, परंपरा और कारोबार का संगम चैत्र चौदस मेला, इकोनॉमी होगी बूस्ट
