प्रयागराज, 19 जुलाई । “भारतीय शोध परंपरा प्रकृति के शोषण की नहीं, बल्कि उसके साथ सामंजस्य की है। यह बात शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ट्रिपल आईटी प्रयागराज में शोध फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘शोधशाला’के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री एस.बालकृष्ण ने कहा।
उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि भारत अपनी प्राचीन ज्ञान-परंपरा से प्रेरणा लेकर वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करे। अनुसंधान को भारतीय दृष्टिकोण से करना ही इसकी सार्थकता सिद्ध करेगा।” इस अवसर पर शोध फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. आलोक सिंह ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि, “यह कार्यशाला केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित न रहकर, प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शोध संस्कृति के विस्तार का माध्यम बनाना चाहिए।”
प्रथम सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रो. सुनीत ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शोध के अवसरों की जानकारी दी। द्वितीय सत्र में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि “शिक्षा को संकीर्ण दायरे में न बांधकर सर्वसमावेशी रूप देना चाहिए। अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य व्यक्ति के माध्यम से राष्ट्र का निर्माण होना चाहिए।” कार्यक्रम के समापन में शोध फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक अर्जुन आनंद ने संस्थान की आगामी शोध योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। वहीं, राष्ट्रीय सह-संयोजक ने मंच संचालन किया।
यह जानकारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केन्द्रीय मीडिया टोली के सदस्य एवं प्रदेश मीडिया संयोजक अभिनव मिश्र ने बताया कि शोध फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘शोधशाला’ का समापन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं में अनुसंधान एवं नवाचार की भारतीय परंपरा को सशक्त करना था। इस दो दिवसीय कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक शोध प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारतीय शोध परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने का प्रयास किया।
भारत ही वैश्विक समस्याओं का समाधान देने में सक्षम: एस.बालकृष्ण
