शादी हो या पूजा, पहाड़ों में ‘खेल’ के बिना अधूरी है हर खुशी, जानें पुरखों से चली आ रही इस परंपरा की खासियत

Spread the love

Uttarakhand Folk Dance Khel: पहाड़ों में शादी हो या पूजा-पाठ, जब तक आंगन में खेल न लगे, तब तक रौनक अधूरी मानी जाती है. छोलिया डांस की तरह ही ‘खेल’ उत्तराखंड की एक ऐसी अनमोल परंपरा है जो गांव के लोगों को एक-दूसरे का हाथ पकड़कर खुशियां मनाने का मौका देती है. दादी-नानी के जमाने से चली आ रही यह रीत आज भी डीजे के दौर में उतनी ही जिंदा है. जानिए क्यों पहाड़ों के हर शुभ काम में ‘खेल’ लगाना जरूरी माना जाता है और कैसे यह पारंपरिक नृत्य आज भी लोगों के दिलों को जोड़े हुए है.