शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर 2 बटुकों के यौन शोषण का केस दर्ज करवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी लगातार सुर्खियों में हैं। अब मथुरा के एक प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ सामने आए हैं। मनीष चतुर्वेदी का कहना है- आशुतोष ब्रह्मचारी जिस स्कॉर्पियो से चलते हैं, वह मुझसे 2023 में खरीदी थी, सौदा तो 18 लाख रुपए में हुआ था, लेकिन मुझे सिर्फ 2.5 लाख रुपए दिए थे। फिर उन्होंने मेरे खिलाफ FIR भी करवा दी। इसके बाद मैंने भी आशुतोष महाराज के खिलाफ FIR करवा दी। पुलिस 6 बार आशुतोष महाराज के घर पहुंची, लेकिन स्कॉर्पियो को बरामद नहीं करवा सकी। ट्रस्ट का खुद को अध्यक्ष बताते हैं, फर्जी तरीके से राजुल शर्मा नाम के शख्स के घर को ऑफिस बना रखा है। इस पूरे मामले में आशुतोष महाराज का कहना है- ये सही है मनीष से हमारा स्कॉर्पियो का सौदा 13.50 लाख रुपए में हुआ था। 13 लाख मैं दे चुका है, 50 हजार देने थे। मगर वो 5 लाख रुपए और मांगने लगे। उन्होंने जो FIR कराई है, हाईकोर्ट ने मुझे स्टे दिया है। इस पूरे मामले को करीब से समझने के लिए दैनिक भास्कर ने मथुरा के मनीष चतुर्वेदी और आशुतोष महाराज से बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले विवाद समझते हैं… जनवरी, 2023 में प्रॉपर्टी डीलर ने स्कार्पियो खरीदी
आशुतोष महाराज के पास महिंद्रा की स्कॉर्पियो क्लासिक (S11) है, वो इसी गाड़ी से चलते हैं। जो नया विवाद सामने आया है, वो इसी गाड़ी को लेकर है। इसमें एक पार्टी आशुतोष महाराज हैं, जिन्होंने ये स्कॉर्पियो खरीदी है। दूसरी पार्टी मथुरा के प्रॉपर्टी डीलर मनीष चतुर्वेदी हैं। जिन्होंने 2023 में ये गाड़ी बेची थी। मनीष के बिजनेस में धनंजय भारद्वाज पार्टनर हैं। 17 जनवरी, 2023 में मनीष ने इस गाड़ी को करीब 19 लाख रुपए में खरीदा था। इससे धनंजय और मनीष चलते थे। आशुतोष महाराज से 18 लाख में सौदा तय हुआ
मनीष कहते हैं- मैं आशुतोष महाराज को जानता नहीं था। हमारे साथी धनंजय भगवा दल जैसे संगठनों से जुड़े थे, तो उनकी आशुतोष से जान-पहचान थी। धनंजय ने ही मुझसे कहा कि ये स्कॉर्पियो हम आशुतोष को बिकवा देते हैं, आशुतोष अच्छे आदमी हैं। हमने धनंजय की बात मान ली। मेरी गाड़ी 11 महीने में करीब 20 हजार Km चली थी। 23 दिसंबर, 2023 को हमारे बीच 18 लाख रुपए में सौदा तय हो गया, इसका एग्रीमेंट भी लिखा गया। मनीष बोले- 2.25 लाख दिए, फिर FIR करा दी
मनीष ने बताया- स्कॉर्पियो हमने आशुतोष महाराज को दे दी। इसके बाद 7 दिन में अलग-अलग तारीखों में उन्होंने 2.25 लाख रुपए दिए। ये ऑनलाइन ट्रॉजेक्शन हुए। इसके बाद कोई पेमेंट नहीं हुआ। मैंने कई बार बकाया रुपया मांगा, लेकिन आशुतोष महाराज ने दिए नहीं। 2 मई, 2025 को हमने मथुरा के गोविंदनगर थाने में FIR लिखवा दी। गाड़ी से जुड़े सारे कागज भी दिए। पुलिस से गुजारिश की, मेरी गाड़ी वापस दिलवा दीजिए, जो रुपए मुझे मिले हैं, वो मैं वापस कर देता हूं।
अब पुलिस की जांच पढ़िए मथुरा पुलिस की जांच में सामने आया कि स्कॉर्पियो मनीष चतुर्वेदी के ही नाम पर रजिस्टर्ड है। मनीष ने आशुतोष से मिले पैसों का बैंक स्टेटमेंट दिखाया था। पुलिस ने आशुतोष महाराज को थाने बुलाया, लेकिन वह नहीं आए। मनीष कहते हैं- पुलिस के सामने सबसे बड़ा चैलेंज गाड़ी को बरामद करना था। इसके लिए पुलिस 6 बार आशुतोष के घर कांधला के रायजादगान पहुंची। हर बार पुलिस वहां से खाली हाथ वापस आई। आशुतोष गोविंदनगर थाने के एसएचओ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, लेकिन गाड़ी की बरामदगी पर रोक नहीं लगाई। पुलिस जब गाड़ी बरामद नहीं कर पाई, तो उन्होंने इस मामले में चार्जशीट लगा दी। मनीष इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने हमारे हक में फैसला सुनाया और फिर से जांच का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि गाड़ी बरामद की जाए। अलग-अलग समय पर इस केस को 3 इंस्पेक्टर ने लीड किया, लेकिन आज तक स्कॉर्पियो को बरामद नहीं कर पाए। आशुतोष महाराज ने प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ केस किया
इस बीच आशुतोष महाराज ने मनीष के खिलाफ कैराना कोर्ट में वाद दायर कर दिया। इसमें जो एग्रीमेंट दिखाया गया, वह 22 मार्च, 2024 का था। इस वाद में कहा गया कि गाड़ी का सौदा 13.50 लाख रुपए में तय हुआ और हमने सारा पैसा दे दिया है। मनीष ने कहा- कैराना कोर्ट में आशुतोष महाराज ने जो सबूत पेश किए हैं, वह नकली है। अजीब यह कि आशुतोष ने मेरे फर्जी सिग्नेचर करके सहमति दिखाई है। जबकि वह सिग्नेचर मेरा नहीं है। कोर्ट में जो याचिका दायर की है, वहां मैं कभी नहीं गया। वहां से कभी कोई नोटिस भी नहीं आया है, क्योंकि उन्हें भी पता है कि यह मामला फर्जी है। मनीष का दावा- पुलिस ने चोर की व्यवस्था की
मनीष ने दैनिक भास्कर को अपनी और एक पुलिस वाले से बातचीत का ऑडियो भेजा। इसमें पुलिस वाला कह रहा था- चोर मेरे बगल खड़ा है, कह रहा कि 10 दिन में काम हो जाएगा। बस आप इसका केस देख लेना। (असल में यह गाड़ी को चोरी करके लाने की बात हो रही थी।) हमने मनीष से पूछा- पुलिसवाले ऐसा क्यों कह रहे हैं, वो आखिर चोर का सहारा क्यों लेंगे? मनीष कहते हैं- आशुतोष बहुत बड़ा फ्रॉड है, उससे पुलिस के लोग भी डरते हैं, क्योंकि यह उनको भी फंसा देता है, इसलिए ऐसा सुझाव दिया गया। हालांकि हम सही हैं, इसलिए गलत तरीके का सपोट क्यों लेते, मना कर दिया था। मनीष स्कॉर्पियो के लिए लगातार शिकायत करते रहे। गोविंदनगर थाने के दरोगा नरेंद्र सिंह तोमर ने केस के करीब एक साल बाद 26 नवंबर, 2024 को जनसुनवाई पर जवाब देते हुए कहा- आशुतोष की गिरफ्तारी के लिए कई बार दबिश दी गई, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। न ही अपना बयान दर्ज करवा रहा है। कोर्ट से एनबीडब्ल्यू जारी करवा लिया है। आरोपी आशुतोष कांधला थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसका नंबर 76A है। (इसके बाद आशुतोष के मुकदमों का क्रम लिखा गया।) अब आशुतोष महाराज के ट्रस्ट पर लगे आरोप जानिए… मनीष बोले- जहां ट्र्स्ट वहां कभी रहा नहीं
मनीष चतुर्वेदी कहते हैं- जब आशुतोष ने मेरे साथ फ्रॉड किया तो हमने इसके बारे में पता किया। सामने आया कि यह जिस ट्रस्ट का खुद को अध्यक्ष बताते हैं, वह जिस जगह पर रजिस्टर्ड है, वहां ट्रस्ट से जुड़ा कुछ नहीं है। राजुल शर्मा के घर को इसने ऑफिस बना दिया है। भास्कर ने इसकी पुष्टि के लिए राजुल शर्मा से बात की। वह कहते हैं- 6 दिसंबर, 2024 को हमें पुलिस की नोटिस मिली। पता चला कि हमारे घर के पते पर एक ट्रस्ट बना है। जबकि ऐसा कुछ नहीं था। हम आशुतोष महाराज को जानते थे, एक बार मीटिंग में भी गए थे। कहा गया कि हमें मथुरा में अध्यक्ष बना देंगे, लेकिन हमें कोई मतलब नहीं था। फिर हम कभी नहीं गए, पता नहीं कैसे मेरे घर के नाम पर इन्होंने ट्रस्ट बना दिया। हमने एलआईयू को पत्र लिखकर मेरे पते पर दर्ज ट्रस्ट को हटाने की मांग की थी। अब आशुतोष महाराज क्या कहते हैं, ये पढ़िए बोले- हमने 13 लाख दिए हैं, ये ज्यादा मांग रहे
हमने आरोप पर आशुतोष महाराज से बात की। वह कहते हैं- यह सही है कि स्कॉर्पियो मनीष के नाम पर है। हमारा और उनका सौदा 13 लाख 50 हजार रुपए में तय हुआ था। 13 लाख हमने दे दिए थे। 50 हजार रुपए, तब देने थे जब गाड़ी वह हमारे नाम कर देते। लेकिन उन्होंने 5 लाख रुपए और मांगना शुरू दिए। हमारे खिलाफ केस कर दिया। यह भी सही है कि पुलिस 6 बार हमारे यहां बरामदगी के लिए गई, लेकिन जब कोई सूचना मिलेगी, तब तो हम मिलेंगे। इन्होंने जो मुकदमा किया है, उसके खिलाफ हम हाईकोर्ट गए। वहां से स्टे हो गया है। कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। हमने पूछा कि गाड़ी बरामदी की बात तो कोर्ट ने भी कही है, इस पर आशुतोष कहते हैं, फिर पुलिस आकर छीन ले। जिसमें दम हो वह आकर छीन ले। आशुतोष कहते हैं- 12 अप्रैल, 2025 को मनीष और इनके भाई वृंदावन में हमारी गाड़ी छीनने आए थे। आश्रम में घुसकर मेरे और भक्तों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। हमने इनके खिलाफ मुकदमा लिखवाया। दोनों भाई जेल भी गए थे। इस मामले में चार्जशीट भी लगी थी। ————————- ये पढ़ें. लखनऊ में शंकराचार्य बोले- भाजपा अब भागपा हो गई, गोरक्षा शंखनाद किया; यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पहुंचे, दंडवत प्रणाम किया शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद किया। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करना शुरू किया। कहा- भाजपा अब भागपा हो गई है। अगर आप लोग पक्के गो-भक्त नहीं होते, तो इतनी रुकावट के बावजूद यहां आकर बैठे न होते। आप जितने भी लोग आए हैं, कार्यक्रम खत्म होने के बाद नाम नोट करके जाइएगा। पढ़िए पूरी खबर…
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