रेलूराम पूनिया हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट सख्त:सोनिया-संजीव को काउंटर एफिडेविट जमा कराने का 2 हफ्ते का समय; 7 अप्रैल को पेशी

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रेलूराम पूनिया परिवार हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। मामले में आरोपी संजीव और सोनिया पहले ही जमानत पर हैं। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सोनिया-संजीव को दो सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया है। सुनवाई के दौरान रेलूराम पूनिया के परिवार की ओर से अधिवक्ता आईना खोवाल कोर्ट में पेश हुई और पक्ष रखा। वहीं संजीव की पेशी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि 7 अप्रैल को संजीव की कोर्ट में तामील सुनिश्चित कराई जाए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी भी की। जस्टिस ने सोनिया के वकील से कहा कि वह आरोपी के पति-पत्नी होने के नाते उनकी ओर से पेश हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पक्ष की ओर से उचित पैरवी नहीं हुई, तो जमानत रद्द करने पर भी विचार किया जा सकता है। 2001 में की थी 8 लोगों की निर्मम हत्या लोहे की रॉड और डंडों से की गई थी हत्या रेलूराम पूनिया फैमिली हत्याकांड को हरियाणा के सबसे क्रूर मामलों में गिना जाता है। 23 अगस्त 2001 की रात हिसार जिले के लितानी गांव स्थित फॉर्म हाउस में यह खूनखराबा हुआ। सभी लोग गहरी नींद में थे, तभी उन पर हमला किया गया। लोहे की रॉड और डंडों से एक-एक कर सभी को बेरहमी से मार डाला गया। हमले में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया, उनकी पत्नी, बेटा, बहू, पोता, पोती और एक अन्य बच्चा मारा गया, पूरी फैमिली खत्म हो गई थी। 19वें जन्मदिन पर रची थी साजिश सोनिया वही बेटी है, जिसने अपने 19वें जन्मदिन पर अपने ही पिता रेलूराम पूनिया सहित पूरे परिवार को मौत के घाट उतरवाने की साजिश रची थी। संजीव ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने हत्याकांड के लिए सोनिया के जन्मदिन को चुना था। पहले सभी को एक साथ गोली मारने की योजना थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद लोहे की रॉड से हमला किया गया। जमीन-जायदाद बनी हत्या की वजह जांच में सामने आया कि इस नरसंहार के पीछे जमीन-जायदाद का विवाद था। सोनिया और उसके पति संजीव ने परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना बनाई और इसी लालच में इस हत्याकांड को अंजाम दिया। दोनों ने वारदात के बाद आत्महत्या की भी कोशिश की, लेकिन वे बच गए। अदालत ने इसे पूरी तरह से योजनाबद्ध और क्रूर हत्या माना था। सोनिया का कबूलनामा आया था सामने पुलिस पूछताछ में सोनिया ने कबूल किया था कि उसी ने अपने पति संजीव के साथ मिलकर आठों की हत्या की। उसने कहा था कि उसके पिता उसे और उसके पति को संपत्ति नहीं देना चाहते थे। इसी बात से नाराज होकर उसने यह कदम उठाया। सोनिया ने कहा था कि वह वारदात के बाद खुद को भी खत्म करना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उसने परिवार के अंदर चल रहे विवादों और आरोप-प्रत्यारोपों का भी जिक्र किया था। पहले फांसी, फिर उम्रकैद साल 2004 में कोर्ट ने सोनिया और संजीव को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने फिर से फांसी की सजा को बहाल कर दिया। इसके बाद दया याचिकाओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के चलते सजा का स्वरूप बदलता रहा। अंततः सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद दोनों की सजा उम्रकैद में बदल गई।