एमपी में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रहीं हैं। दो सीटों पर बीजेपी के डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। कांग्रेस की सीट से दिग्विजय सिंह सांसद हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह राज्यसभा जाने को लेकर इनकार कर चुके हैं। दिग्विजय ने भास्कर से कहा था कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। दिग्विजय के इनकार के बाद कांग्रेस के कब्जे वाली राज्यसभा सीट के लिए छोटे- बडे़ नेताओं को मिलाकर करीब दर्जन भर नेता दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन, पार्टी के भीतर इस सीट को जीतने के लिए टेंशन का माहौल है। सबसे पहले जानिए कि कांग्रेस को क्यों रिस्क है? कांग्रेस के एक सीनियर लीडर जो राज्यसभा की रेस में शामिल हैं वे कहते हैं- हमें तो इस बात का डर है कि कहीं हम ये सीट हार न जाएं। अगर 6 विधायक इधर से उधर हुए तो ये सीट हमारे हाथ से जा सकती है। क्योंकि, बीजेपी की ओर से विधायकों को अगले इलेक्शन की टिकट और अन्य कुछ ऑफर दिए जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष बोले: बीजेपी तोड़फोड का प्रयास करती है, लेकिन हम मजबूत हैं इस मामले पर हमने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से बात की तो उन्होंने कहा- भारतीय जनता पार्टी जब हर जगह तोड़फोड के प्रयास करती है। तो उन्हें वो प्रयास करने दीजिए। लेकिन, हम लोग सब मजबूत हैं। और राज्यसभा सीट कांग्रेस की रहेगी। बीजेपी ने कहा: हमारे पास पर्याप्त विधायक
जबलपुर से बीजेपी विधायक अभिलाष पांडे ने कहा- भाजपा अपने काम पर विश्वास रखती है। और हमारे पास इतने ज्यादा नंबर हैं। कांग्रेस अपनी चिंता करे और खुद का आत्ममंथन करे। अभी हाईकोर्ट का भी एक निर्णय आया है। भाजपा के पर्याप्त विधायक हैं। बीजेपी अपनी थीम और अपने विचार पर काम करने वाला संगठन है। इस बार राज्यसभा की एक सीट जीतने 58 विधायकों की जरूरत इस बार राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में 230 विधायकों के गणित पर चुनाव होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी। विधानसभा में आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस के 65 विधायक हैं। इनमें बीना विधायक निर्मला सप्रे अब बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास 64 विधायक बचते हैं। लेकिन, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शून्य कर दिया है। यदि मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है। तो एक और वोट कम हो जाएगा। इस स्थिति में कांग्रेस के पास 63 विधायक बचेंगे। 5 MLA इधर से उधर हुए तो जा सकती है कांग्रेस की सीट
कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर यह चर्चा चल रही है कि यदि पांच विधायकों को बीजेपी अपने पाले में करने में कामयाब हो गई तो कांग्रेस के कब्जे वाली राज्यसभा सीट हार सकती है। वहीं, विधानसभा में बीजेपी के आंकड़ों के हिसाब से 164 विधायक हैं। बीना विधायक के समर्थन से विधायकों की संख्या 165 हो सकती है। बीएपी के एक मात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार का मत भी महत्वपूर्ण होगा। कांग्रेस को आशंका है कि यदि उसके 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी तो सीट हाथ से जा सकती है। 2020 में 206 विधायकों पर हुआ था राज्यसभा का चुनाव 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में जब द्रोपदी मुर्मू एनडीए की उम्मीदवार थीं, तब मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉसवोटिंग देखने को मिली थी, जिसने कांग्रेस को चौंका दिया था। 2020 में जब एमपी की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था। उस वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में गए 22 विधायकों और दो विधायकों के निधन के कारण कुल 24 सीटें खाली थीं। 206 सीटों के गणित पर हुए राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत थी। दिग्विजय सिंह 57 वोट पाकर राज्यसभा सांसद चुने गए थे। राष्ट्रपति चुनाव में हो चुकी है क्रॉस वोटिंग उस समय मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायकों की स्थिति और मतदान का परिणाम कुछ इस तरह था : विपक्ष (कांग्रेस + अन्य) की अपेक्षित संख्या: कांग्रेस के पास 96 विधायक थे। इसके अलावा बसपा (2), सपा (1) और निर्दलीयों (4) के समर्थन के साथ विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को करीब 103 वोट मिलने की उम्मीद थी। यशवंत सिन्हा को केवल 79 वोट मिले। क्रॉसवोटिंग की संख्या: आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के लगभग 19 से 20 विधायकों ने अपनी पार्टी लाइन से हटकर द्रोपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया था। एक सीट के लिए जरूरी वोटों का फॉर्मुला दलित नेताओं में सज्जन और प्रदीप दावेदार कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति वर्ग के किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी उनकी बात का समर्थन किया था। सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार दोनों ही नेता राज्यसभा के लिए ताकत लगा रहे हैं। ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 है। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। ये खबर भी पढ़ें… रिटायरमेंट प्लान पर बोले दिग्विजय-मजाकिया लहजे में शेयर किया वीडियो अपने रिटायरमेंट को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय ने कहा कि मैंने एक कपल जो बैंक से रिटायर हुए थे वो एक कार से पूरा भारत घूमने निकले हैं तो मैंने उसका वीडियो मजाकिया लहजे में शेयर किया था। दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट को लेकर कहा ये हल्ला तो होता रहता है। पढ़ें पूरी खबर…
दिग्विजय वाली सीट पर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का रिस्क:पार्टी के अंदर टेंशन, 6 MLA टूटे तो हाथ से निकल सकती है राज्यसभा की सीट
