फिल्म 12वीं फेल तो आपने देखी ही होगी। करीब 25 साल पहले मुरैना के बीहड़ इलाके में 17 साल का छात्र मनोज कुमार शर्मा 12वीं क्लास की परीक्षा दे रहा था। उसके पास नकल के लिए तैयार किए गए पर्चे थे। पास होना तय था। तभी परीक्षा केंद्र पर एक ईमानदार पुलिस अधिकारी पहुंचे। उन्होंने उसे नकल करने से रोक दिया। नतीजतन वह 12वीं में हिंदी सब्जेक्ट में फेल हो गया। लेकिन, उसी दिन उसके भीतर ईमानदारी और मेहनत का बीज पड़ गया। बाद में उसी मनोज कुमार शर्मा ने कड़ी मेहनत कर 12वीं कक्षा पास की। पढ़ाई जारी रखी और यूपीएससी परीक्षा क्लियर कर 2005 बैच का आईपीएस अधिकारी बना। इस मोटिवेट करने वाली कहानी से शायद उस इलाके के कुछ स्टूडेंट्स अब भी अनजान हैं। यही वजह है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में मुरैना में सबसे ज्यादा 41 नकल के प्रकरण आए हैं। दूसरे नंबर पर राजधानी भोपाल है। यहां 20 नकलची पकड़े गए। इस बार संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई थी। फ्लाइंग स्क्वॉड और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद नकल के मामले सामने आते रहे। बता दें कि माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा 10 फरवरी से शुरू हुई थी। 7 मार्च को खत्म हुई। 10वीं की परीक्षा 13 फरवरी से शुरू हुई और 6 मार्च को खत्म हुई थी। इन परीक्षाओं में पूरे प्रदेश से करीब 16 लाख छात्र बैठे। मुरैना बना नकल प्रकरणों का हॉटस्पॉट बोर्ड परीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों में मुरैना जिला सबसे अधिक नकल प्रकरणों के साथ टॉप पर रहा। अलग-अलग परीक्षा तिथियों को जोड़कर देखें तो यहां 41 मामले दर्ज हुए। 10 फरवरी को 12वीं की परीक्षा में मुरैना से नकल के 6 मामले सामने आए। इसके बाद 13 फरवरी को भी यहां 6 प्रकरण दर्ज किए गए। 19 फरवरी को 10वीं की परीक्षा में सबसे ज्यादा 9 मामले इसी जिले से सामने आए। 23 फरवरी, 24 फरवरी, 27 फरवरी, 2 मार्च, 5 मार्च, 6 मार्च और 7 मार्च को भी यहां लगातार नकल के मामले सामने आते रहे। यह सिलसिला दिखाता है कि परीक्षा के दौरान प्रशासन के लिए मुरैना सबसे चुनौतीपूर्ण जिला बना रहा। भोपाल में 20, सागर में 5 मामले दर्ज राजधानी भोपाल भी नकल के मामलों में पीछे नहीं रहा। 10 फरवरी को 12वीं की परीक्षा के दौरान भोपाल में 7 मामले दर्ज किए गए। खास बात यह रही कि इनमें से 6 प्रकरण कैमरों से मॉनिटरिंग के दौरान पकड़े गए। इसके बाद 17 फरवरी, 18 फरवरी, 19 फरवरी, 23 फरवरी, 24 फरवरी, 2 मार्च और 7 मार्च को भी भोपाल में नकल के मामले सामने आए। कुल मिलाकर राजधानी में 20 प्रकरण दर्ज किए गए। बोर्ड परीक्षाओं में नकल प्रकरण केवल दो-तीन जिलों तक सीमित नहीं रहे। सागर में कुल 5 मामले दर्ज हुए। भिंड में भी 4 केस सामने आए। सीसीटीवी कैमरे से निगरानी इस बार बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के जरिये प्रदेशभर के परीक्षा केंद्रों पर भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधे निगरानी रखी जा रही थी। इसके अलावा प्रश्नपत्रों को थानों से परीक्षा केंद्र तक ले जाने और वहां खोलने की प्रक्रिया की भी वीडियोग्राफी की गई थी। केंद्रों पर सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके। 16 लाख छात्रों ने दी परीक्षा इस साल मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी कक्षा 10वीं के थे जबकि करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए। पूरे प्रदेश में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। भोपाल में 10वीं के 30 हजार 746 और 12वीं के 26 हजार 627 छात्र परीक्षा में बैठे। इन छात्रों के लिए शहर में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। हर जिले में फ्लाइंग स्क्वॉड नकल रोकने के लिए प्रशासन ने हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड भी बनाए थे। इनमें दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर और दो जिला स्तर पर काम कर रहे थे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य शामिल थे, जिनमें पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी रहते थे। इनका काम परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करना और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई करना था। यह खबर भी पढ़ें… MP बोर्ड 10वीं इंग्लिश का पेपर शुरू होते ही लीक मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में 10वीं बोर्ड परीक्षा का अंग्रेजी पेपर लीक हो गया। महिला टीचर ने एग्जाम शुरू होते ही क्वेश्चन पेपर की फोटो खींचकर वॉट्सएप स्टेटस पर लगा दी। मामला तुकईथड उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र का है। पढ़ें पूरी खबर…
इस साल मुरैना में सबसे ज्यादा नकलची पकड़ाए:भोपाल दूसरे नंबर पर; MP बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षाओं में कैमरे-फ्लाइंग स्क्वॉड से भी नहीं डरे
