पहले होली का त्यौहार मनाने का अलग ही मजा था. उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि होली से लगभग 10 दिन पहले पद्मवृक्ष की ध्वजा काटी जाती थी और होलिका दहन में इसका उपयोग होता था. आज भी पहाड़ों पर यह रिवाज है.इसे झंडी कहा जाता है. इस पद्मवृक्ष में फूल लगे होते हैं. वहीं दूसरी ओर बांस की पिटाई-कटाई करके इसकी ध्वजा वह बनाकर गांव – गांव टोली बनाकर हम जाते थे.
ढोलक-चिमटा लेकर गांव-गांव जाती थी बच्चों की टोली, बुजुर्ग ने बताया पहाड़ में कैसे मनाई जाती थी होली
