होली पर सीएम ने ‘शोले’ का गाना गाकर दिया मैसेज:विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में नहीं गए, भगोरिया में झूमे; सिंघार ने याद दिलाया ‘औकात’ कांड

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‘बात खरी है’ में आपका स्वागत है। आप सभी को रंगों के पर्व होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। आज के ‘होली स्पेशल’ एपिसोड में आप देखेंगे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और छिंटाकशी के रंग। खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक, हर सुबह 6 बजे, दैनिक भास्कर ऐप पर उपलब्ध रहेगा। मोहन सरकार पर चढ़ा ‘आदिवासी रंग’
होली के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार पर आदिवासी रंग चढ़ा नजर आया। इसी क्रम में आदिवासी अंचल निमाड़ के बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कृषि कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी मंत्री आदिवासी वेशभूषा में दिखाई दिए। मुख्यमंत्री ने ढोल पर थाप दी, थाली बजाई और आदिवासी कलाकारों के साथ जमकर थिरके। उन्होंने फिल्म शोले का गाना गाकर प्रेम से मिल-जुलकर रहने का संदेश भी दिया। सीएम ने ये गाना गाया- होली के दिन दिल खिल जाते हैं..
रंगों में रंग मिल जाते हैं..
अरे गिल्ले शिकवे भूल के दोस्तों..
दुश्मन भी गले मिल जाते हैं..
होली के दिन दिल खिल जाते हैं..
रंगों में रंग मिल जाते हैं.. हालांकि कैबिनेट बैठक में दो सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल नजर नहीं आए। वैसे कैलाश विजयवर्गीय अलीराजपुर में भगोरिया पर्व में शामिल हुए। तीन दिन पहले सीएम डॉ. मोहन यादव भी अलीराजपुर जिले में आयोजित भगोरिया पर्व में भी शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में आनंद और उत्साह का माहौल है। इसके लिए जोरदार ताली बजाओ, अभिनंदन करो। सीएम के इस अंदाज को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का श्योपुर की एक सभा में दिया गया पुराना बयान भी याद किया जा रहा है, जिसमें वे अपने कार्यकर्ताओं से बार-बार जोरदार ताली बजाने की अपील करते नजर आए थे। उन्होंने सीएम को कहा था कि मेरे कहने पर भी ताली बजती है। दरअसल, जीतू पटवारी लगातार सीएम के ‘अभिनंदन करो’ कहने पर निशाना साध रहे थे। जिसे लेकर एक कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव ने कहा था कि मैं ताली बजवाता हूं तो उनके पेट में दर्द होता है। उनके कहने पर तो कोई ताली नहीं बजाता।
‘औकात’ भुलाकर प्रेम के रंग लगाओ
हाल ही में विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने आ गए थे। इस दौरान विजयवर्गीय ने यहां तक कह दिया कि अध्यक्ष जी, नेता प्रतिपक्ष से कह दो कि अपनी औकात में रहें। इसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने भी पलटवार करते हुए कहा था कि औकात दिखा दूंगा। दरअसल, उन्होंने सरकार पर अडाणी समूह को लेकर मेहरबानी करने के आरोप लगाए थे। इसी मुद्दे पर सदन का माहौल खासा गरमा गया। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए माफी मांगी, जिसके बाद मामला शांत हो सका। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माफी तो नहीं मांगी, लेकिन अपने शब्दों और व्यवहार पर खेद जरूर जताया। राजनीति अपनी जगह और विचारों की लड़ाई अपनी जगह, लेकिन होना यह चाहिए कि मतभेद भले बने रहें, मनभेद भुलाकर एक-दूसरे को प्रेम के रंग लगाए जाएं। हालांकि जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अलीराजपुर में भगोरिया पर्व में शामिल हुए तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उन पर तंज कर दिया। उन्होंने कहा कि जो मंत्री आदिवासियों को औकात बता रहे थे, वे अब क्या आदिवासियों का अपमान करने आए हैं या फिर माफी मांगने आए है। सादगी के रंग में सीनियर नेता
मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया भले ही मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हों, लेकिन इन दिनों उनके अंदाज कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान की बात करें तो उन्होंने फूल-मालाओं और गुलदस्तों से होने वाले स्वागत से तौबा कर ली है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वे किसी से भेंट के रूप में न तो स्मृति-चिह्न लेंगे और न ही फूल-मालाओं से स्वागत स्वीकार करेंगे। इसकी जगह उन्होंने लोगों से पेड़ लगाने और उसकी तस्वीर उन्हें भेंट करने की अपील की। वहीं दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कहा था कि दिग्विजय सिंह कुछ भी नहीं है और लोगों से उन्हें राजा-वाजा न कहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये सब आजादी के बाद समाप्त हो चुका है। बता दें कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस समेत अन्य कार्यक्रमों में मंच पर न बैठने की कसम भी ली थी, हालांकि राहुल गांधी के भोपाल दौरे के दौरान उनकी यह कसम टूट गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भले ही इन दिनों दिल्ली की राजनीति में अधिक व्यस्त रहते हों, लेकिन जब भी वे मध्य प्रदेश आते हैं, ग्वालियर-चंबल अंचल, खासतौर पर गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र पर उनका खास फोकस रहता है। मंच से वे अकसर रोचक अंदाज में बातें रखते हैं। हाल ही में अपने एक विभाग के बारे में बात करते हुए उन्होंने खुद को डिब्बा मंत्री कह दिया था।
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