पहाड़ों में मिलने वाले इन दो पत्तों में बसती है श्रद्धा और परम्परा! जानें क्यों इनमें रखी चीजें हो जाती हैं चमत्कारी

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Uttarakhand Traditions: पहाड़ों की देव संस्कृति में पूजा-पाठ केवल मंत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्रकृति का हर अंश श्रद्धा से जुड़ा है. पंडित बलदेव दत्त भट्ट के अनुसार, पहाड़ों में आज भी हवन और कथा के लिए च्यूरा के पत्तों से बने ‘पूड़े’ और श्राद्ध कर्म के लिए ‘तिमल’ के पत्तों का ही उपयोग किया जाता है. प्लास्टिक के दौर में भी जीवंत यह परंपरा न केवल शुद्धता का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश भी देती है. पूर्वजों की आत्मा की शांति से लेकर देवताओं को प्रसाद अर्पण करने तक, इन पत्तों का क्या है विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व.