पानीपत पालिका बाजार के दुकानदारों की बड़ी राहत:नगर निगम के ‘बेदखली नोटिस’ पर कोर्ट की रोक; आजीविका के अधिकार को बताया सर्वोपरि

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हरियाणा के पानीपत शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र ‘पालिका बाजार’ में अपनी दुकानों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे व्यापारियों के लिए न्यायपालिका से एक राहत भरी खबर आई है। नगर निगम पानीपत द्वारा दुकानों को खाली करने के लिए जारी किए गए कड़े नोटिसों पर कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सिविल जज (जूनियर डिविजन) हिमानी गिल की कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना या वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानदारों को जबरन उनके कार्यस्थल से बेदखल नहीं किया जा सकता। विवाद की पृष्ठभूमि: जर्जर बिल्डिंग का हवाला और निगम के नोटिस यह पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब नगर निगम पानीपत ने नवंबर 2025 और जनवरी 2026 में पालिका बाजार की कई दुकानों (दुकान नंबर 6, 9, 13, 14, 21 और 22) के आवंटियों को बेदखली के नोटिस थमा दिए। नगर निगम का तर्क था कि GT रोड स्थित यह पूरी मार्केट ‘असुरक्षित और जर्जर’ हो चुकी है, जो किसी भी समय गिर सकती है। निगम के अनुसार, सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बिल्डिंग की तुरंत मरम्मत की जानी है, जिसके लिए दुकानों का खाली होना अनिवार्य है। अदालत में दुकानदारों का पक्ष और तीखी दलीलें नगर निगम के इस कदम के खिलाफ विनोद कुमार, दिनेश कुमार, सुरेंद्र कुमार और नरेश कुमार मित्तल जैसे कई दुकानदारों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील रमेश गुप्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि… पंजीकृत लीज डीड: दुकानदार साल 2011 से ‘रजिस्टर्ड लीज डीड’ के तहत कानूनी रूप से यहां व्यापार कर रहे हैं। लीज की शर्तों के अनुसार, उन्हें केवल किराया न चुकाने की स्थिति में ही हटाया जा सकता है, मरम्मत के बहाने नहीं। संदेहास्पद रिपोर्ट: जिस रिपोर्ट के आधार पर बिल्डिंग को जर्जर बताया गया है, वह दुकानदारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई थी। दुकानदारों का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर की दुकानें पूरी तरह सुरक्षित हैं; यदि जर्जर कुछ है, तो वह निगम के कब्जे वाली ऊपरी मंजिलें हैं। पुनर्वास का अभाव: निगम ने दुकानदारों को बाहर निकालने का फरमान तो सुना दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि मरम्मत के बाद उन्हें वही दुकानें वापस मिलेंगी या नहीं, अथवा मरम्मत के दौरान वे अपना व्यापार कहां करेंगे। नोटिस पर रोक और भविष्य की कार्रवाई न्यायालय ने अपने फैसले में नगर निगम द्वारा 7 नवंबर 2025 और 29 जनवरी 2026 को जारी किए गए सभी बेदखली नोटिसों पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि आगामी आदेशों तक किसी भी दुकानदार को जबरन बाहर नहीं निकाला जाएगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख तय की गई है। इस दिन नगर निगम को अपना लिखित जवाब और वकालतनामा कोर्ट में पेश करना होगा। तब तक पालिका बाजार के दुकानदारों के पास अदालत का सुरक्षा कवच बना रहेगा।