बदलते दौर में जहां परंपरागत खेती बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के कारण किसानों के लिए चुनौती बनती जा रही है, वहीं भिंड जिले के एक प्रगतिशील किसान ने मल्टीलेयर फार्मिंग कर अपनी किस्मत बदल दी है। भिंड शहर से सटे ग्राम दबोहा निवासी किसान और सेवानिवृत्त प्राचार्य रामसनेही शर्मा ने परंपरागत खेती को छोड़कर मल्टीलेयर फार्मिंग (बहुस्तरीय खेती) अपनाकर सालाना करीब 6 लाख रुपए की आमदनी हासिल कर ली है। उनकी सफलता न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। किसान रामसनेही बताते हैं कि वे भी पहले पूर्ण रूप से गेहूं, चना और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। मौसम की मार, कीट प्रकोप और बाजार में सही दाम न मिलने के कारण लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार घाटा उठाना पड़ता था। प्रशिक्षण लेकर की मल्टीलेयर फार्मिंग की शुरुआत किसान रामसनेही ने कहा कि मैं वर्ष 1980 में जब नौकरी के दौरान खरगोन जिले के मंडलेश्वर में अपनी सेवाएं दे रहा था। उस दौरान एक पाटीदार परिवार को मल्टीलेयर फार्मिंग करते हुए देखा था। नवंबर 2017 सेवानिवृत्त हुआ तो मैंने अपनी खेती पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया, लेकिन परंपरागत खेती में अधिक मुनाफा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में मल्टीलेयर फार्मिंग करने का विचार किया। मैंने उद्यानिकी विभाग और आत्मा विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। मुझे वर्ष 2019 में विभाग तरफ से प्रशिक्षण के लिए मथुरा, हरिद्वार, शिवपुरी, गुना, मुरैना सहित अन्य जगह भेजा गया। प्रशिक्षण के बाद मैंने मल्टीलेयर फार्मिंग शुरू की। दो एकड़ में बन रहे हैं फार्मिंग किसान रामसनेही अपने बेटे धर्मेंद्र शर्मा के साथ मिलकर अपनी दो एकड़ (4 बीघा) जमीन पर मल्टीलेयर फार्मिंग बीते पांच-छह साल से करते आ रहे हैं। वे दो एकड़ जमीन पर केला, कच्ची हल्दी, आम, सफेद चंदन, सेव, सीताफल, चीकू, अमरूद, एप्पल बेर, जामुन, बांस, कटहल सहित अन्य फसलों उगा रहे हैं। रामसनेही शर्मा बताते हैं कि सबसे पहले उन्होंने मल्टीलेयर फार्मिंग की शुरूआत कच्ची हल्दी के साथ की। उसके बाद हल्दी की फसल के बीच-बीच में केले के पौधे लगाना शुरू कर दिए। वर्तमान में चार एकड़ जमीन पर 755 केले के पौधे लगे हुए हैं। इन पर एक साल में दो बार केले के फल निकलते हैं। केले सहित अन्य फसल भिंड सहित प्रदेश के अन्य बाजार में बेचने के लिए सप्लाई करते हैं। फसल के इस नवाचार से उन्हें सालाना 6 लाख रुपए के करीब की आमदनी हो रही है। समझिए, क्या है मल्टीलेयर फार्मिंग एक ही खेत में एक ही समय पर कई प्रकार की फसलें उगाने की तकनीक को मल्टीलेयर फार्मिंग कहते हैं। इसमें जमीन के अंदर उगने वाली फसलें (जैसे कच्ची हल्दी) जमीन की सतह पर उगने वाली सब्जियां और मचान पर चढ़ने वाली बेलदार फसलें एक साथ ली जाती हैं। इससे भूमि, पानी और धूप का अधिकतम उपयोग होता है और कम क्षेत्रफल में ज्यादा मुनाफा संभव होता है। टिकाऊ कृषि तकनीक है मल्टीलेयर फार्मिंग भिंड उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक गंभीर सिंह तोमर ने बताया कि मल्टीलेयर फार्मिंग एक वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि तकनीक है। इसमें एक ही समय और स्थान पर विभिन्न तरफ की फसलों उगाई जा सकती हैं। रामसनेही शर्मा द्वारा खेती के क्षेत्र में भिंड जिले में बड़े स्तर पर इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विभाग द्वारा कई किसानों को उनके पास प्रशिक्षण के लिए समय-समय पर भेजा जाता है।
भिंड के किसान ने की मल्टीलेयर फार्मिंग…सालाना इनकम 6 लाख:एक साथ उगा रहे जमीन के अंदर, जमीन पर और ऊपर लगने वाली फसलें
