सिरसा रोडवेज DI ने CM से की शिकायत:GM-TM पर लगाए आरोप, बोले- भ्रष्ट अधिकारियों का साथ नहीं दे सकता

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सिरसा में रोडवेज विभाग में कार्यरत ड्यूटी इंचार्ज (DI) अचानक सीएम नायब सिंह सैनी से जाकर मिले और शिकायत सौंपी है। रोडवेज डीआई ने एक वीडियो जारी भी किया है। जिसमें रोडवेज कर्मचारी और अफसरों को कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सीएम सैनी को दी शिकायत में सिरसा जीएम और टीएम का भी जिक्र है। आरोप लगाए कि इन भ्रष्ट अधिकारियों का मैं साथ नहीं दे सकता। रोडवेज कर्मचारियों और अफसरों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से सिरसा रोडवेज विभाग में भ्रष्टाचार का मुद्दा गर्माया हुआ है। कई दिन से आरोप लग रहे हैं। इससे पहले एचकेआरएन कर्मचारी कंडक्टर चांडीवाल भी बस स्टैंड परिसर में धरने पर बैठे थे और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसे बाद पुलिस ने डिटेन कर लिया था। अब डीआई ने भी आरोप लगाए हैं। जारी वीडियो में सुधीर माचारा बोले-साथियों, आज उम्मीद जगी है। इन शोषण करने वाले अधिकारियों का कुछ होगा। आज हमारे सीएम नायब सिंह सैनी से मिलकर अंदर की आत्मा ने मेरा साथ दिया है। तेरे साथ शोषण हुआ है और काम करने वाले कर्मचारियों का शाेषण हुआ है। उनका भला होगा। भगवान ने शायद सही रास्ते पर भेजा है। मैंने सिरसा रोडवेज जीएम और टीएम सिरसा के बारे में एप्लीकेशन सीएम को दी है। देखते हैं अब हमारी सरकार क्या करती है। अगर सरकार का फैसला सही आता है तो इस सरकार के साथ हमेश-हमेशा के लिए रहना चाहिए। अच्छी सरकार का साथ देना चाहिए। इन भ्रष्ट अधिकारियों का किसी तरह भी साथ देकर मेरे जमीर को मारना मेरे बश की बात नहीं है। धन्यवाद। सिलसिलेवार ढंग से जानिएं पूरा मामला मेरी ड्यूटी समुचित व्यवस्था करनी रोडवेज अधिकारी सुधीर माचरा ने दूसरी वीडियो जारी कहा- मैं सिरसा डिपो में डीआई के पद पर कार्यरत हूं। सरकार की ओर से मेरी ड्यूटी लगी है कि ड्राइवर-कंडक्टरों की सही से ड्यूटी लगाकर लोकल व लॉन्ग रूटों पर बसों की समुचित व्यवस्था करनी है। एक माह से मैंने ड्यूटी जिम्मेदारी से निभाई है। मैं आप करना चाहता हूं, हमारे कर्मचारी भी काम करना चाहते हैं। फिर भी तालमेल नहीं बैठ रहा। सरकार आमजन को परिवहन सुविधा मुहैया करवाने को ड्राइवर-कंडक्टर के पद भरती है और बसों के रखरखाव की पूरी व्यवस्था है। वर्कशाप में रेगुलर स्टाफ नहीं वर्कशाप में रेगूलर स्टाफ नहीं है। बसों की देखभाल के लिए। वहां पर आईटीआई के छात्रों की झुंड है, लेकिन वे अनट्रेंड है। उनके ट्रेनिंग देने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उनसे काम लेने की कोशिश की जा रही है, पर वो सही नहीं है। सरकार को उनकी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि से सही से ट्रेंड हो। ड्राइवरों के पद भरे हुए हैं, फिर भी कमी है। कुछ ड्राइवरों को दूसरी जगह ड्यूटी दी जाती है और कुछ शारीरिक कमजोर है। उनकी गिनती रूटों पर नहीं होती। पहले उनको टेंपररी रखा जाता है, पर वो उसमें ढ़ल जाते हैं। उनका काम करने से मन चुराने लगता है और मना कर देते हैं। इसका दबाव अधिकारियों पर आता है। बिना ओवरटाइम के ड्यूटी करने पर ड्राइवर पीछे हटते हैं, क्योंकि वे रूट पर नहीं जाते और तय समय में काम करते हैं। उनके परिवार में दिक्कत हो जाती है। अगर ओवरटाइम मिले तो हर कोई अच्छे से करते हैं, क्योंकि उनको एक्सट्रा पैसे मिलते हैं। मंत्री का फोन आने पर आता है दबाव
सुधीर माचरा ने वीडियो में आगे कहा- किसी ड्राइवर को रूटों पर भेज दिया जाता है तो किसी मंत्री का फोन आ जाता है और अधिकारियों पर दबाव आ जाता है। उनको ऑफिस में बैठने पर मजबूर किया जाता है। ड्राइवर-कंडक्टर लिए गए हैं, वो अपने मूल कार्यों पर लौटे। अधिकारियों से विनती है कि उन कर्मचारियों को मूल कार्यों पर लाए जाए। अब लॉन्ग रूटेशन पर ओवरटाइम शुरू हो गया है। लोकल रूटेशन पर ओवरटाइम नहीं है तो दिक्कत आती है। यूनियन के नाम तरीके निकाल रहे
यूनियन भी ज्यादा आ गई है। यूनियन के नाम पर भी कामचोरी के तरीके निकाल रहे हैं। देश को चोरों से नहीं, कामचोरों से खतरा है। ड्राइवर-कंडक्टरों की भर्ती जनता के लिए की गई है, उनको रूटों पर लगाया जाए। जितने ड्राइवर है, उनको डीआई सेक्शन में लाया जाए। उनकी सैलरी आने से पहले डीआई के हस्ताक्षर अवश्य करवाए जाए, ताकि पता चले कि कौन सा कर्मचारी कहां पर बैठा है। किसी की रिपोर्ट करने पर कर्मचारी व अधिकारी नाराज हो जाते हैं।