शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जनसंख्या के मुद्दे पर चल रही बहस पर बयान दिया है। उन्होंने कहा- बच्चा पैदा करने से समाज न घटता है और न ही बढ़ता है। समाज अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म पर टिके रहने से लंबे समय तक कायम रहता है और आगे बढ़ता है। इस विषय में उनकी ओर से कोई उपदेश नहीं दिया जाता। ये बातें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चे पैदा करने वाले बयान पर कही हैं। उन्होंने कहा- संख्या बल से कोई नहीं जीतता। कुत्तों की संख्या अधिक होती है, लेकिन जब एक शेर दहाड़ता है तो सभी भाग जाते हैं। दरअसल, 17 फरवरी को लखनऊ में मोहन भागवत ने कहा था कि जो भी लोग अब शादी कर रहे हैं, उन्हें कम से कम तीन बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विवाह का उद्देश्य सृष्टि को आगे बढ़ाना होना चाहिए, न कि केवल वासना की पूर्ति। धर्मशास्त्रों की अवहेलना की जा रही
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- उनकी ओर से धर्मशास्त्रों की अवहेलना की जा रही है। कहीं ऐसा न हो कि हम ज्यादा बच्चे पैदा करें और एक दिन कोई प्रभावी व्यक्ति आकर हमारे बच्चों को समझाकर धर्म परिवर्तन करा दे। फसल हम उगाएं और काटे कोई दूसरा, इसलिए केवल संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलता। बच्चे को इतने संस्कार दीजिए। इतना दृढ़ बनाइए कि वह किसी भी परिस्थिति में धर्म की पताका लेकर आगे बढ़ता रहे। 100 तारे उतना प्रकाश नहीं देते, जितना एक चंद्रमा के उगते ही अंधेरा दूर हो जाता है। आप एक बच्चा करें या चार, यह आपकी अपनी पसंद है। इसमें कोई बंधन नहीं है। देवकी और वसुदेव ने 8 संतानें पैदा कीं, तभी भगवान का अवतार हुआ। ऐसी परिस्थिति में कोई कितना बच्चा पैदा करेगा, यह माता-पिता पर ही छोड़ देना चाहिए। सनातन धर्म का ज्ञान ना होने से संख्या बढ़ाने की बात करते
भगवान श्रीकृष्ण के वंशज यादवों को किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं मारा था, बल्कि वे आपसी संघर्ष में ही नष्ट हो गए थे। जब संख्या बहुत अधिक हो जाती है और अनुशासन व एकता नहीं रहती, तो समाज अंदर से कमजोर हो सकता है। संख्या बढ़ जाने पर कई बार लोग आपस में ही लड़कर मर जाते हैं। इसलिए संख्या की बात वही लोग करते हैं, जिन्हें अपने सनातन धर्म की गहराई का सही ज्ञान नहीं है। आपसी कलह से भी होता है विनाश
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी पर शंकराचार्य ने कहा- उनकी बातों पर हम लोग क्यों जाएं? हमें अपने घर की चिंता करनी है। संख्या बल से कोई नहीं जीत सकता है। कुत्तों की संख्या सबसे ज्यादा होती है, लेकिन जैसे ही एक शेर दहाड़ता है तो सभी भाग जाते हैं। चाहे हिंदू हों या मुस्लिम। यदि वे यह सोच रहे हैं कि केवल संख्या बढ़ाने से काम बन जाता है, तो यह सही नहीं है। कई बार संख्या बढ़ने पर लोग आपस में ही लड़कर मर जाते हैं। अब मोहन भागवत की कही बड़ी बातें पढ़िए… भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 17 और 18 फरवरी को लखनऊ प्रवास पर थे। इस दौरान मोहन भागवत ने सामाजिक सद्भाव से जुड़े विषयों पर बैठक की थी। इसमें उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के जवाब दिए थे। मोहन भागवत ने समाज को जातियों में बांटने और बंटने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा- हमें जाति के चक्कर में नहीं पड़ना है। ये जाति ऐसी चीज है, जिसे हम कई दशकों से समाप्त करने में लगे हैं। लेकिन ये जाति है कि जाती नहीं है। हिंदुओं की घटती जनसंख्या से भविष्य खतरे में भागवत ने कहा- अब जो भी बच्चे शादी कर रहे हैं। उन्हें बताइए कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करें। विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है। भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है। घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। अब पढ़िए शहाबुद्दीन ने भागवत को क्या जवाब दिया था? किस मुसलमान के 12 बच्चे और चार बीवियां हैं
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देश में बढ़ती जनसंख्या को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा- इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी समाजों को मिलकर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बढ़ती आबादी का दबाव संसाधनों पर साफ दिख रहा है। जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। रजवी ने पूछा कि किस मुसलमान के 12-12 बच्चे और 4 बीवियां हैं। हिंदू 3 क्या 6 या 12 बच्चे भी पैदा करें। हमें कोई ऐतराज नहीं है। आज महंगाई इतनी है कि मुसलमान भी दो से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करना चाहता। एक बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाना ही चुनौती है। ——– ये भी पढ़ें- अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य 25 वकीलों के साथ प्रयागराज कोर्ट पहुंचे: आशुतोष महाराज ने लगाया है कुकर्म करने का आरोप शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से 10 फरवरी को दाखिल वाद में शुक्रवार को प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आशुतोष महाराज पर झूठे मुकदमे में फंसाने और मीडिया के जरिए दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया गया था। इस वाद पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्यवादी और पक्षकार आशुतोष महाराज नोटिस का जवाब देने कोर्ट पहुंचे। वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील पीएन मिश्र करीब 25 वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे। इस दौरान शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद भी मौजूद रहे। पढ़िए पूरी खबर
शंकराचार्य बोले- बच्चे पैदा करने से समाज नहीं बढ़ता:शेर की दहाड़ सुनते ही कुत्ते भागते हैं; मोहन भागवत ने कहा था- हिंदू 3 बच्चे पैदा करें
