‘मेरे ससुर अचानक दर्द से चिल्लाने लगे, उनकी आंखों से खून निकलने लगा। मैं घबरा गई, पूरा परिवार परेशान हो गया। कर्ज लेकर दिल्ली गए। वहां उनकी एक आंख निकालनी पड़ गईं। तब उन्हें दर्द से मुक्ति मिली।’ ये कहना है गोरखपुर की महिमा का। उनके 80 साल के ससुर रामदरश ने न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। 24 घंटे के अंदर ही उन्हें बैक्टिरियल इंफेक्शन हो गया। महिमा कहती हैं- आंखों की रोशनी अच्छी कराने गए थे, लेकिन अब कर्जदार हो गए हैं। सिर्फ रामदरश ही नहीं, गोरखपुर के 19 लोगों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों में बैक्टिरियल इंफेक्शन फैल गया। 9 लोगों की आंखें निकालनी पड़ीं। बाकी 10 की आंखों की रोशनी चली गई। ये सभी मरीज 1 फरवरी को हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के तहत लगे फ्री कैंप में पहुंचे थे। कुल 30 ऑपरेशन हुए, 19 लोगों की आंखों में इंफेक्शन हो गया। लखनऊ तक मामला पहुंचने के बाद डीएम गोरखपुर दीपक मीणा ने ADM को जांच सौंपी है। 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है। हॉस्पिटल की OT को सील कर दिया गया है। हालांकि प्राथमिक जांच में चौंकाने वाले फैक्ट सामने आए। डीएम ने बताया- जिस OT में ऑपरेशन हुआ, वहां पर बैक्टिरियल इंफेक्शन मिला है। जिन उपकरणों का इस्तेमाल हुआ, उन पर भी इंफेक्शन मिला है। अब हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाएगा। इन परिवारों को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा? ये समझने के लिए दैनिक भास्कर ने मरीजों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट…
अब परिवारों का दर्द पढ़िए मरीज 1. देवराजी देवी
बहू बोलीं- हजारों खर्च, मगर सास कभी देख नहीं सकेंगी
बारीगांव की 60 साल की देवराजी देवी की बायीं आंख का ऑपरेशन सिकरीगंज के न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में हुआ। उनकी बहू संजीता ने बताया- ऑपरेशन के बाद हम सास को घर ले आए। दिन में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन रात में उन्हें उल्टी होने लगीं। शरीर में दर्द भी होने लगा। किसी तरह से रात कटी। फिर अगले दिन उन्हें लेकर हॉस्पिटल गए। वहां डॉक्टर ने कुछ देर उनका इलाज किया। हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने गोरखपुर के शंकर आई केयर रेफर कर दिया। उस हॉस्पिटल से भी राज आई केयर में भेजा गया। फिर वहां से दिल्ली एम्स रेफर किया गया। इधर, हमारी सास आंख में दर्द से बिलबिला रही थीं। उन्हें उल्टियां हो रही थीं। पूरा परिवार घबराया हुआ था। हम रात में ही दिल्ली एम्स लेकर पहुंचे। वहां इमरजेंसी में डॉक्टर ने देखा, फिर बताया कि बैक्टिरियल इंफेक्शन हो गया है। आंख को जल्द से जल्द निकालना पड़ेगा। नहीं तो दिक्कत और बढ़ सकती है। फिर 6 फरवरी को दोबारा ऑपरेशन करके उनकी आंख निकाल दी गई। संजीता आगे बताती हैं- ऑपरेशन के बाद भी दर्द बना हुआ है। 23 फरवरी को फिर से दिल्ली दिखाने जाना है। अभी तक इलाज में काफी पैसे लग चुके हैं। महंगी दवाइयों का खर्च भी उठाना पड़ रहा है। इन सबके बावजूद मेरी सास अब एक आंख से देख नहीं सकेंगी। मरीज 2. दीनानाथ रातभर दर्द से छटपटाते रहे, एम्स में आंख निकालनी पड़ी
बनकटा गांव के रहने वाले 75 साल के दीनानाथ भी गांव के अन्य लोगों के कहने पर सिकरीगंज हॉस्पिटल गए थे। उनकी बायीं आंख का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। शाम 7 बजे तक डिस्चार्ज होकर घर आ गए। उनके पोते सतीश विश्वकर्मा ने बताया- देर रात 1 बजे उन्हें आंख में तेज दर्द शुरू हो गया। रात भर हम लोग बहुत परेशान हुए। डॉक्टर ने दर्द की दवा दी थी, लेकिन उससे आराम नहीं हुआ। बाबा दर्द की वजह से छटपटा रहे थे। सुबह 4 बजे हम लोग उनको फिर से हॉस्पिटल लेकर गए। वहां कुछ देर इलाज के बावजूद दर्द ठीक नहीं हुआ। वहां से राज आई केयर रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने बताया इनको इंफेक्शन हो गया है, दिल्ली एम्स लेकर जाइए। हम लोग तुरंत दिल्ली के लिए निकल गए। 3 फरवरी को इमरजेंसी में एडमिट किया गया। वहां भी डॉक्टरों ने कहा कि आंख निकालनी पड़ेगी। 11 फरवरी को उनका ऑपरेशन करके आंख निकाल दी गई। अभी भी हल्का दर्द बना हुआ है। 21 फरवरी को फिर से दिल्ली जाना है। देखते हैं डॉक्टर क्या कहते हैं। कुछ समय पहले गांव के एक-दो लोग भी वहीं ऑपरेशन करवाएं, वे लोग ठीक हैं। उन्हीं के कहने पर हम हॉस्पिटल लेकर गए। क्या पता था कि ये दिन भी देखना पड़ेगा।
मरीज 3. मीरा देवी
एम्स में आंख निकाली, फिर भी तबीयत में सुधार नहीं
रामपुर की रहने वाली 55 साल की मीरा देवी के बेटे भीमनाथ कहते हैं- ऑपरेशन के दूसरे दिन सुबह 5:30 बजे के आसपास मां को उल्टी और शरीर में तेज दर्द शुरू हुआ। हम लोग उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए। वहां से राज आई केयर रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कहा कि इनकी दोनों आंख में इंफेक्शन हो गया है, दिल्ली एम्स लेकर जाइए। एम्स में मां को एडमिट करवाया गया। वहां के डॉक्टर ने बताया- आंख नहीं निकालने से हालत और ज्यादा बिगड़ सकती है। लगभग एक हफ्ते के बाद जब दर्द कुछ कंट्रोल हुआ तो उनका ऑपरेशन करके आंख निकाल दी गई। हम लोग अभी भी डरे हुए हैं, क्योंकि मां को अभी भी उल्टियां हो रही हैं। 23 फरवरी को फिर दिल्ली दिखाने जाना है। भीमनाथ का कहना है कि एम्स के डॉक्टर हमारे लिए भगवान साबित हुए। मेरी मां को बचा लिया। डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हमें इतना नुकसान हुआ। अब तक 40 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। मरीज 4. राजेंद्र कुमार उम्मीद है शायद रोशनी वापस आ जाए
इन्नाडीह के रहने वाले 71 साल के राजेंद्र की आंखों की रोशनी चली गई है। उनके बेटे ने बताया- पापा को लेकर हम लोग सीधे लखनऊ SGPGI पहुंचे। डॉक्टर ने बता दिया कि आपके पापा की आंखों की रोशनी जा चुकी है। इंफेक्शन बढ़ चुका है। अब आंख बचाने का कोई तरीका नहीं है। हालांकि, हम लोग अभी भी उनका इलाज इस उम्मीद से करा रहे हैं कि शायद रोशनी वापस आ जाए। नहीं तो आंख निकालनी ही पड़ेगी। मरीज 5. रंजीत
आंख से खून निकल रहा था
भारसी के रहने वाले 71 साल के रंजीत कहते हैं- ऑपरेशन के बाद मैं घर आ गया। रात में मेरी आंख से खून निकलने लगा। अगले दिन डॉक्टरों ने मुझे लखनऊ के SGPGI रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि आंख में इंफेक्शन फैल जाने से रोशनी चली गई है। आंख निकालनी पड़ेगी। यह सुनकर मैं घबरा गया और सोचा यहां देखभाल करने के लिए कोई नहीं है। गोरखपुर में ही इलाज करा लूंगा। फिर मैंने वापस गोरखपुर आकर संगम हॉस्पिटल में दिखाया। वहां से मुझे गोरखपुर एम्स भेज दिया गया। एम्स में एक हफ्ते तक एडमिट रहा। उसके बाद ऑपरेशन करके आंख निकाल दी गई। रंजीत ने बताया- इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। शुरू में इधर उधर से 4-5 हजार लगाना पड़ा। बाद में सिकरीगंज राजेश न्यू हॉस्पिटल से 15000 रुपए की मदद मिली। अब मैं पहले से ठीक हूं। एक आंख भले ही चली गई लेकिन जान तो बची। मरीज 6. बहिदुंन निशा
आंख की रोशनी चली गई
गोरयाघाट की रहने वाली 60 साल की बहिदुंन निशा को आंखों से कम दिखता था, वो सिर्फ चेकअप लिए गईं थीं। लेकिन डॉक्टरों ने मोतियाबिंद बताकर 2 फरवरी को उनका ऑपरेशन कर दिया। 2 दिन बाद उन्हें दर्द होने लगा। हॉस्पिटल जाने पर दिल्ली एम्स रेफर कर दिया। उनकी बेटी ने बताया- बहिदुंन की दोनों आंखों में इंफेक्शन हो गया था। इलाज करके डॉक्टरों ने बायीं आंख की रोशनी बचा ली। लेकिन दाहिनी आंख की रोशनी चली गई। उनका दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा है।
मरीज 7. रामदरश
घर में शादी है, कर्ज लेकर इलाज करा रहे
बेलापार के रहने वाले 80 साल के रामदरश की बहू महिमा कहती हैं- पहले डॉक्टर ठीक करने की गांरटी ले रहे थे। मगर दोपहर तक ससुर बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें गोरखपुर रेफर किया गया। दिल्ली एम्स में आंख निकाल दी गई। वो सदमे में हैं, ठीक से कुछ भी खा-पी नहीं रहे। हम लोग कर्ज लेकर इलाज करवा रहे हैं। उधर 11 मार्च को घर में ननद की शादी भी है। सबको यही चिंता हो रही है कि कैसे सब कुछ होगा। मरीज 8. मोहम्मद अली
न्यूज देखकर डरे, अब तक आंख ठीक लग रही
बसंतपुर के रहने वाले 69 साल के मोहम्मद अली का ऑपरेशन 2 फरवरी को हुआ था। उनके बेटे मोहम्मद अंसार का कहना है- न्यूज देखकर हम लोग भी डर गए थे कि कहीं पापा को भी दिक्कत न हो जाए। हालांकि वो नार्मल हैं। फिर हम लोगों ने 18 फरवरी को सदर में चेकअप करवाया। वहां के डॉक्टर ने बताया सब कुछ ठीक है। किसी भी तरह का इंफेक्शन नहीं है। अब जाकर हम लोगों को राहत मिली है। दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- अब पढ़िए अखिलेश यादव की पोस्ट अब CMO की बात रिपोर्ट में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई
CMO डॉ. राजेश झा ने बताया- ये बड़ी लापरवाही है। इसकी ADM स्तर पर जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद की आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट जल्द मिलने की उम्मीद है। ऑपरेशन थियेटर में और जिन उपकरणों से ऑपरेशन हुआ, वहां बैक्टिरियल इंफेक्शन मिल गया है। इसकी वजह से मरीजों की हालत बिगड़ गई। जानें मोतियाबिंद क्या है?
मोतियाबिंद होने पर आंखों के लेंस पर क्लाउड जैसा बनने लगता है। इसके कारण धुंधला नजर आने लगता है। व्यक्ति को रोज के नॉर्मल काम करने जैसे गाड़ी चलाने, अखबार पढ़ने में दिक्कत होने लगती है। अंधेपन से बचने के लिए मोतियाबिंद की सर्जरी करनी पड़ती है। सर्जरी के बाद क्यों होता है बैक्टिरियल इंफेक्शन?
मोतियाबिंद सर्जरी के बाद कुछ लोगों को बैक्टिरियल इंफेक्शन हो जाता है। सही समय पर इसका इलाज न कराने पर आंखों में अंधापन भी छा सकता है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद इंफेक्शन की दो वजहें हो सकती हैं। पहली- सर्जरी के दौरान आई सर्जन द्वारा गंदे उपकरणों का इस्तेमाल करना और हाइजीन का ध्यान न रखना। दूसरी- सर्जरी के बाद आंखों की सही देखभाल न करना, सफाई का ध्यान न रखना, समय पर आंखों पर दवाई न डालना। इन सबसे बचने के लिए मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान और उसके बाद कुछ समय तक आंखों की सही विशेष देखभाल करें। सर्जरी के बाद आंखों में दर्द हो या धुंधला दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराएं। डायबिटीज और कैंसर रोगी को मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। …………… भास्कर इन्वेस्टिगेशन पढ़िए अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर का दिव्यांगता सर्टिफिकेट फर्जी:खुफिया कैमरे पर CMO बोले- फर्जी है, बचेगा नहीं यह सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी है… क्योंकि इस उम्र (31 साल) में यह बीमारी (मैक्युलर डिजनरेशन) हो ही नहीं सकती…। – डॉ. वकील अली, इंचार्ज CMO, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, मऊ (प्रशांत सिंह के दिव्यांगता सर्टिफिकेट के बारे में) मऊ के जिला अस्पताल में मैक्युलर डिजनरेशन बीमारी की जांच के लिए न तब कोई मशीन थी, न अब है…। – डॉ. एलएस चौबे, आई सर्जन, जिला अस्पताल, मऊ (यहीं से प्रशांत सिंह का दिव्यांगता सर्टिफिकेट बना, जिसमें आंखों की जांच के लिए OCT मशीन जरूरी है) पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
19 लोगों की रोशनी गई, परिवार बोले- कर्जदार हुए:गोरखपुर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया, 9 की आंखें निकालनी पड़ीं
