धीमी आंच, ऊपर अंगारे, नीचे चूल्हा, बेहद खास है ये पहाड़ी कुकर, जिसमें बिना सिटी के पकता था दाल-चावल

Spread the love

पहाड़ों की रसोई से अब वो ‘तौली’ और पीतल की चमक धीरे-धीरे गायब होती जा रही है, जिसकी जगह आज स्टील के बर्तनों और प्रेशर कुकर ने ले ली है. कभी चूल्हे की धीमी आंच और ऊपर से अंगारों की गर्मी में पकने वाला खाना न केवल स्वाद में लाजवाब होता था, बल्कि सेहत का असली राज भी वही था. 81 साल के भुवन चंद्र जोशी बताते हैं कि कैसे तांबे और पीतल के बर्तनों ने उन्हें आज भी तंदुरुस्त रखा है.