रेवाड़ी नगर परिषद के ईओ सुशील कुमार भुक्कल का सोमवार को सरकार ने रेवाड़ी से पंचकूला मुख्यालय ट्रांसफर कर दिया। झज्जर के ईओ देवेंद्र कुमार को रेवाड़ी का एडिशन कार्यभार सौंपा गया हैं। सुशील कुमार ने जेई और अकाउंटेंट के निबंलन के बाद शुरू हुए विवाद में शाम करीब साढ़े चार बजे पत्रकार वार्ता की थी। जिसके बाद सरकार ने देर शाम 7 बजे के बाद उनके ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए। ईओ ने डीमएसी ब्रह्मप्रकाश पर जातीय आधार पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा जिस प्रकार से आईपीएस वाई पूरन कुमार को प्रताड़ित किया गया था, मुझे भी वैसे ही प्रताड़ित किया जा रहा है। एससी होने के कारण डीएमसी मुझे सस्पेंड-टर्मिनेट करवाना चाहते है। उन्होंने कहा था कि एससी समाज में पैदा होना गुनाह नहीं है। एससी समाज में पैदा होने के कारण मुझे बार-बार निशाना बनाया जाता है। दुर्व्यवहार करने से परेशान होकर जब मैने रिजाइन करने की सोची तो डीएमसी ने पहले डीसी ऑफिस और फिर नगर परिषद में आकर उनसे माफी मांगी थी। जेई को वेतन जारी करने को टेक्नीकल गलती मानते हुए कहा कि इंसान ठोकर खाकर ही समझता है। परेशान ने करें, काम करवाएं एससी होने के कारण डीएमसी मेरे कर्मचारी के साथ मारपीट कर चुके है। मैं डीएमसी को यही कहूंगा कि कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रताड़ित करना छोड़े। परिवार के मुखिया होने के नाते उनसे काम करवाएं। एससी समाज में पैदा होना मेरा गुनाह नहीं। उन्होने सोमवार शाम अपने कार्यालय में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। 14 नवंबर को रिजाइन की सोची नगर परिषद के ईओ सुशील कुमार ने कहा कि डीएमसी की हरकतों से परेशान होकर उसने 14 नवंबर 2025 को रिजाइन करने की सोची थी। जिसके बाद डीसी ने मुझे और डीएमसी को अपने दफ्तर में बुलाया। जहां डीएमसी ने डीसी के सामने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी और मुझे गले लगाया था। मानहानि का करूंगा केस नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार भुक्कल ने कहा कि जो लोग मेरे खिलाफ मनगढंत खबरें छाप रहे हैं। मुझे बिना कारण बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके खिलाफ जल्द ही मानहानि का केस करूंगा। बिना कारण किसी को बदनाम करना मानवाधिकार के खिलाफ है और संविधान भी इसकी अनुमति नहीं देता। किसलिए बनाए गए हैं आयोग ईओ ने कहा कि डीएमसी एससी होने के कारण उसे बार-बार परेशान कर रहे हैं। अब तक मैने उनके खिलाफ कहीं पर भी एससी/एसटी की शिकायत नहीं की है। यदि उनका रवैया नहीं बदला तो मैं इस पर विचार कर सकता हूं। आखिरकार सरकार ने एससी/एसटी और महिला आयोग जैसी संस्थाएं बनाई किसलिए हैं। प्रशासन और सरकार से अपील ईओ ने कहा कि डीएमसी मेरे अधिकारी हैं, मैंने आज तक उनकी कोई शिकायत नहीं की। डीएमसी मेरे एक कर्मचारी लवकुश के साथ मारपीट कर चुके हैं। बाकी कर्मचारियों के साथ मेरा भी लगातार उत्पीड़न कर रहे हैं। मेरा सरकार और प्रशासन से अनुरोध है कि मेरा उत्पीड़न रोका जाए। भ्रष्टाचारी काली भेड़ें मुझसे परेशान ईओ ने कहा कि जब मैने यहां नौकरी ज्वाइन की तो पता चला कि नगर परिषद के कई कर्मचारी दलालों से मिलकर लोगों से पैसे वसूलते थे। मैने सभी को बदलकर उनकी नए आदमी लगा दिए। जिससे वो परेशान हैं और बार बार मेरे खिलाफ झुठ फैलाकर बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। शहर का कोई भी व्यक्ति नगर परिषद में आकर सीधे बिना पैसे अपने काम करवा सकता है। यदि किसी का जायज काम न हो तो सीधे मुझसे मिल सकता है। चार बार रिजेक्ट हो चुकी आईडी डीएमसी ने कहा कि अब जिस अस्पताल की आईडी को लेकर मुझे बदनाम किया जा रहा है, वह 4 बार रिजेक्ट हो चुकी है। अभी भी वह आईडी रिजेक्ट ही है। स्कूल के मामले की बात हो रही है, वह सर्वें में बनाई गइ्र थी। सुशीला का लड़का मुझसे मिला भी था। सर्वें में यह अकेली नहीं कई आईडी गलत बनी थी। क्लर्क हरीश डेथ बर्थ ब्रॉच में कार्यरत था। पारिवारिक परेशानी का हवाला देकर मुझसे मौखिक छुट्टी मांगी थी। उस समय दो महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव पर थी। जिस कारण मैने छुट्टी देने से मना कर दिया। जब वह तीन दिन ड्यूटी नहीं आया तो नोटिस जारी किया। जिसके बाद उसने नियमित रूप से काम किया। जेई और अकाउंटेंट से शुरू हुआ विवाद नगर परिषद ने 4 माह के अवैतनिक अवकाश पर गए जेई हैप्पी को दो माह का वेतन जारी किया था। डीएमसी की शिकायत पर 10 फरवरी को जेई हैप्पी सैनी और अकाउंटेंट जितेंद्र यादव को सस्पेंड कर दिया था। शिकायत में ईओ सुशील कुमार पर भी आरोप लगे थे। जिसके बाद वह 15 फरवरी तक अवकाश पर चले गए थे। इसके बाद सोमवार को पहली बार दफ्तर पहुंचे ईओ सुशील कुमार ने इस पूरे प्रकरण के लिए डीएमसी को जिम्मेदार ठहरा दिया। जेई ने 18 अगस्त से 18 दिसंबर तक छुट्टी ली थी। 10 अक्टूबर को वापस ड्यूटी ज्वाइन की और फिर छुट्टी पर चला गया। जिसके लिए उसे दो माह का वेतन जारी कर दिया। पहले निलंबित, फिर बहाल ईओ ने बताया कि डीएमसी ब्रह्म प्रकाश ने पहले कौशल के तहत लगे डेटा एंट्री ऑपरेटर को पहले तो निलंबित कर दिया और एक सप्ताह बाद स्वयं ही बहाल कर दिया। जबकि नियमानुसार कौशल के कर्मचारी को निलंबित नहीं किया जा सकता। उसे हटाने से पहले तीन नोटिस देने होते हैं। मैंने केवल अपनी ड्यूटी की डीएमसी ब्रह्मप्रकाश ने कहा कि उसे शिकायत मिली थी। जब संबंधित अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो मैने अपनी रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी। ईओ या किसी अन्य से मेरा कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, बस मेरा प्रयास केवल यह है कि आमजन के काम बिना परेशानी के हों। कार्य में पारदर्शिता बनी रही।
PC के 3 घंटे बाद ही रेवाड़ी नप EO ट्रांसफर:मीडिया के सामने कहा था-SC होने के कारण निशाने पर; कांग्रेस विधायक भुक्कल के भतीजे
