एमपी में सर्जनों ने बनाया 20 ऑपरेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड:मरीज और डॉक्टर के बीच दूरी 200km, मंत्रासन चेयर से OPD और ऑपरेशन थिएटर हुए एक

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मध्यप्रदेश ने चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने सर्जरी की पारंपरिक परिभाषा बदल दी है। 200 किलोमीटर दूर बैठे डॉक्टरों ने ‘मंत्रासन’ रोबोटिक चेयर की मदद से एक ही दिन में 20 जटिल ऑपरेशन कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। सर्जन एक शहर में और मरीज दूसरे शहर में फिर भी ऑपरेशन उतनी ही सटीकता से हुए। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी क्रांति है, बल्कि भविष्य की उस स्वास्थ्य व्यवस्था की झलक भी है, जहां दूरी अब इलाज में बाधा नहीं बनेगी। एक दिन में 20 रोबोटिक टेली-सर्जरी
इस ऐतिहासिक उपलब्धि में SAIMS इंदौर के बैरियाट्रिक, मेटाबोलिक, रोबोटिक और एंडोस्कोपिक सर्जन डॉ. मोहित भंडारी और HER अस्पताल की प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने अहम भूमिका निभाई। डॉ. प्रिया भावे इंदौर स्थित SAIMS में बैठीं और उन्होंने HER अस्पताल में मौजूद मरीजों की 6 रोबोटिक सर्जरी कीं। वहीं डॉ. मोहित भंडारी ने HER अस्पताल में बैठकर SAIMS इंदौर के मरीजों के 14 ऑपरेशन किए। इस तरह कुल 20 टेली-सर्जरी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। सुबह 5:30 बजे से शुरू हुआ ऑपरेशन मैराथन डॉ. प्रिया ने सुबह 5:30 बजे इंदौर से सर्जरी शुरू की और दोपहर 2 बजे तक लगातार 6 जटिल ऑपरेशन पूरे किए। वहीं, डॉ. मोहित भंडारी ने सुबह 7 बजे सर्जरी शुरू की और दोपहर 3 बजे तक 14 रोबोटिक गैस्ट्रिक बायपास ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए। सभी मरीजों का वजन 100 से 150 किलोग्राम के बीच था। उन्हें मोटापे से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। डॉ. प्रिया ने कीं ये 6 रोबोटिक सर्जरी डॉ. मोहित ने किए 14 गैस्ट्रिक बायपास डॉ. मोहित भंडारी ने 14 रोबोटिक गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी कीं। ये सभी ऑपरेशन मोटापे से ग्रसित मरीजों पर किए गए। बैरियाट्रिक सर्जरी आमतौर पर जटिल मानी जाती है, लेकिन टेली-सर्जरी तकनीक से इन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ‘मंत्रासन’ से बदलेगा भविष्य डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने कहा कि इस रिकॉर्ड के पीछे सबसे अहम भूमिका ‘मंत्रासन’ नामक नई रोबोटिक चेयर की रही। पारंपरिक रोबोटिक सर्जरी में भारी-भरकम कंसोल और बड़ी स्क्रीन की जरूरत होती है, लेकिन ‘मंत्रासन’ में इसकी आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक में स्क्रीन की जगह वीआर गॉगल्स का उपयोग किया जाता है। सर्जन कुर्सी पर बैठकर वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से मरीज के शरीर के अंदर का दृश्य देख सकता है और रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित कर सर्जरी कर सकता है। ओपीडी से भी हो सकेगी सर्जरी डॉक्टरों का कहना है कि यह तकनीक गेम चेंजर साबित हो सकती है। ‘मंत्रासन’ को ओपीडी में भी स्थापित किया जा सकता है। इसका मतलब है कि सर्जन अपने ओपीडी कक्ष में बैठकर दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद मरीज की सर्जरी कर सकता है। सामान्य सर्जरी में सर्जन का मरीज के पास मौजूद होना अनिवार्य होता है, लेकिन टेली-सर्जरी इस बाध्यता को खत्म करती है। डॉक्टर ने कहा- ऐसा लगता है जैसे मरीज के अंदर हैं डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी करने और नॉर्मल सर्जरी करने में एक बड़ा अंतर है। नॉर्मल रूप से सर्जरी करने में हमें बाहर से सब देख कर अंदाजा लगाना होता है कि कट कहां लगाना है और कितना लगाना है। जबकि, रोबोटिक सर्जरी के दौरान ऐसा लगता है कि जैसे मरीज के अंदर पहुंच गए हैं। अंदर की स्थिति स्पष्ट रूप से नजर आती है, जो सर्जरी को आसान और सफल दोनों बना देता है। डॉ. चित्तावर ने कहा, रोबोटिक सर्जरी स्त्रीरोग उपचार में केवल सटीकता ही नहीं, बल्कि भविष्य की प्रजनन संभावनाओं को भी सुरक्षित करती है। जैसे फाइब्रॉइड या ओवरी सिस्ट की सर्जरी में यह गर्भाशय और अंडाशय की संरचना को बचाए रखती है। इससे महिलाएं न केवल जल्दी स्वस्थ होती हैं, बल्कि मातृत्व का अवसर भी सुरक्षित रख पाती हैं। टेली-रोबोटिक सर्जरी का सफर – 23 दिसंबर 2025 को भोपाल का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। डॉ. प्रिया भावे चित्तावर छह माह में 10 सफल टेली-सर्जरी करने वाली दुनिया की पहली गायनेकोलॉजिस्ट बनीं। उन्होंने गुरुग्राम स्थित एसएसआई हेडक्वार्टर से रोबोटिक चेयर पर बैठकर भोपाल के हर अस्पताल में महिला की चॉकलेट सिस्ट सर्जरी की थी। – 22 अगस्त 2025 को भोपाल में इतिहास रचा गया। डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने बस में बैठे-बैठे कंट्रोल कंसोल से OT में मौजूद रोबोट के जरिए बच्चेदानी निकालने की सर्जरी (हिस्टेरेक्टॉमी) की। यह दुनिया की अपनी तरह की पहली सर्जरी थी। – अगस्त 2025 में दिल्ली की डॉ. लीना मेहरोत्रा ने दिल्ली से मुरादाबाद तक टेली-रोबोटिक सर्जरी की। इसके बाद दूसरी स्त्रीरोग सर्जरी दिल्ली से भोपाल की गई, जो अब तक की सबसे लंबी दूरी की टेली-रोबोटिक सर्जरी है। – दुनिया की पहली टेली-रोबोटिक सर्जरी प्रोफेसर मारेस्को ने 2001 में की थी। इसके 25 साल बाद, भारतीय डॉक्टरों ने इस तकनीक को आगे बढ़ाया। डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने फ्रांस से इंदौर में हार्ट सर्जरी की और डॉ. मोहित भंडारी ने फ्रांस से भोपाल में मोटापा सर्जरी की।