हरियाणा के करनाल जिले में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर कानून के जानकर भी हैरान हैं। एक महिला पर आरोप है कि उसने साल 2019 में एक नाबालिग लड़के को बहला-फुसलाकर अगवा किया, फिर दस्तावेजों में जालसाजी कर उसे अपना पति और खुद के बच्चों का पिता घोषित कर दिया। 6 साल तक इंसाफ के लिए भटकने के बाद, अब कोर्ट के आदेश पर आरोपी महिला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। खेड़ी मारकंडा निवासी राजबीर सिंह का आरोप है कि उनका 17 वर्षीय बेटा जून 2019 में लापता हो गया था। बाद में पता चला कि सोनीपत की रहने वाली मीनाक्षी देवी ने उसे अपने पास रखा हुआ है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए महिला ने एक फर्जी हलफनामा तैयार करवाया, जिसमें दावा किया गया कि युवक अपनी मर्जी से उसके साथ लिव-इन में रह रहा है। फर्जीवाड़े की हद: 12 साल की उम्र में बना दिया पिता! पिता राजबीर ने जब खुद सबूत जुटाए, तो होश उड़ाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपी महिला ने ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) में भारी धांधली की। बेटे की असली जन्मतिथि 2001 है, जिसे बदलकर 1991 कर दिया गया ताकि उसे बालिग दिखाया जा सके। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बेटे को महिला के उन बच्चों (चांदनी और अभिषेक) का पिता दिखाया गया जिनका जन्म 2007 और 2014 में हुआ था। पिता राजबीर का कहना है कि 2007 में उनका बेटा महज 5 साल का था, ऐसे में उसका पिता बनना जैविक रूप से असंभव है। थाने से SP दफ्तर तक काटे चक्कर
राजबीर ने बताया कि बेटे के लापता होने के बाद राजबीर सिंह ने थाना घरौंडा में शिकायत दी। कई दिनों तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर उसने 21 जून 2019 को पुलिस अधीक्षक करनाल को भी लिखित शिकायत दी। आरोप है कि इन दोनों आवेदनों के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच कोविड महामारी फैल गई, जिससे मामला आगे नहीं बढ़ सका और परिवार मानसिक रूप से टूटता चला गया। खुद ही जुटाई जानकारी
कुछ समय बाद जब राजबीर सिंह ने खुद जानकारी जुटानी शुरू की, तो उसे पता चला कि सोनीपत जिला के गांव बाई की रहने वाली मीनाक्षी देवी ने उसके नाबालिग बेटे को बहला-फुसलाकर अपने साथ रखा। आरोप है कि तभी से बेटा उसी के साथ रह रहा था। यह जानकारी सामने आने के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। महिला ने आजमाया कानूनी पेंच
राजबीर सिंह का आरोप है कि अपने खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए मीनाक्षी देवी ने 6 जुलाई 2019 को एक हलफनामा तैयार कराया। इस हलफनामे में यह दर्शाया गया कि उसके पति धन सिंह सागर का निधन हो चुका है। बाद में जांच करने पर पता चला कि धन सिंह सागर जीवित है और आरोपी के व्यवहार से परेशान होकर उसे छोड़कर अलग रह रहा है। यह हलफनामा काफी समय तक परिवार के सामने नहीं आया और हाल ही में तब सामने आया, जब बेटा कुछ समय के लिए घर लौटा और उसने इस बारे में बताया। लिव-इन रिलेशनशिप का जिक्र, नाबालिग होने का दावा
हलफनामे में यह भी लिखा गया है कि मेरे बेटे के नाम का युवक 5 जून 2019 से मीनाक्षी देवी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है। पिता का कहना है कि उस समय बेटा नाबालिग था और उसे माता-पिता की लीगल कस्टडी से बाहर ले जाया गया। उनके अनुसार कानून में नाबालिग को बिना अनुमति ले जाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। फर्जी परिवार पहचान पत्र से बढ़ी मुश्किलें
मामले में एक और गंभीर आरोप परिवार पहचान पत्र को लेकर लगाया गया है। आरोप है कि मीनाक्षी देवी ने हरियाणा परिवार पहचान पत्र बनवाया, जिसमें बेटे की जन्मतिथि 09 सितंबर 1991 दर्शाई गई, जबकि बेटे की असली जन्मतिथि 9 सितंबर 2001 है और उसे अपना पति बताया गया। इसके साथ ही बेटे को अपने बच्चों चांदनी (जन्म 01 जनवरी 2007) और अभिषेक (जन्म 25 अगस्त 2014 ) का पिता भी दिखाया गया। राजबीर सिंह का कहना है कि वर्ष 2007 में मेरे बेटे की उम्र सिर्फ 5 वर्ष और 2014 में 12 वर्ष थी, ऐसे में जैविक रूप यानी बायोलोजिक तौर से पिता बनना असंभव है। इससे धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप और मजबूत होता है। झूठे मामलों में फंसाने की आशंका
पीड़ित पिता को आशंका है कि इसी फर्जी परिवार पहचान पत्र के आधार पर मीनाक्षी देवी भविष्य में मेरे बेटे को झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामलों में फंसा सकती है। इसी डर के चलते उसने दोबारा प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। एक और आवेदन, फिर भी पुलिस पर लापरवाही का आरोप
राजबीर सिंह ने 19 अगस्त 2025 को पुलिस अधीक्षक करनाल को एक और आवेदन दिया, जिसे 5472-सी मिसलेनियस नंबर देकर थाना घरौंडा भेजा गया। आरोप है कि इसके बावजूद न तो आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही जांच की स्थिति से उसे अवगत कराया गया। कई बार संपर्क करने पर भी पुलिस अधिकारियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पिता का आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की। मजबूरी में कोर्ट की ली शरण
सभी रास्ते बंद होने के बाद राजबीर सिंह ने कोर्ट का रुख किया। उसने अदालत को बताया कि इस पूरे मामले से उसका परिवार डर और तनाव में जी रहा है। अपराध केवल व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ होता है और इससे सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ता है। उसने कहा कि वह स्वयं जांच अधिकारी की भूमिका नहीं निभा सकता, इसलिए पुलिस को निर्देश दिए जाएं। एसडीजेएम कोर्ट का आदेश, घरौंडा थाने में एफआईआर
मामले की सुनवाई के बाद एसडीजेएम घरौंडा गौरांग शर्मा ने थाना प्रभारी घरौंडा को मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद 11 फरवरी की रात को घरौंडा थाना में मामला दर्ज हुआ है। घरौंडा थाना प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आरोपी महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अब मामले की जांच की जा रही है और हर एक पहलू की जांच की जाएगी और उसके आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
नाबालिग को दिखाया 6 साल के बच्चे का पिता:करनाल में भगा ले गई थी महिला; पुलिस ने नहीं सुनी, पिता ने खुद जुटाए सबूत,FIR
