अभी फरवरी का आधा महीना भी नहीं हुआ और यूपी में गर्मी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। सुबह-शाम हल्की ठंड जरूर है, लेकिन दोपहर की धूप चुभने लगी है। बीते ठंड के मौसम में यूपी समेत पूरे उत्तर भारत में सर्दी ने लोगों को खूब परेशान किया। अब संकेत मिल रहे हैं कि जिस तरह ठंड तेज रही, उसी तरह इस साल गर्मी भी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। इसका असर भी दिखने लगा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 2025 देश का 8वां सबसे गर्म साल रहा। इससे पहले 2024 अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया। ऐसे में 2026 को लेकर जो भविष्यवाणियां सामने आ रहीं, वे चिंता बढ़ाने वाली हैं। सवाल उठता है कि इस बार गर्मी कितनी पड़ेगी? क्या 2026, 2024 का भी रिकॉर्ड तोड़ देगा? इस बार कितनी ठंड पड़ी? इन सवालों के जवाब के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट… अभी तक कैसा रहा मौसम
नोएडा स्थित स्काईमेट वेदर के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत बताते हैं- यूपी में पिछले 2 साल के मुकाबले इस बार कम ठंड रही। दिसंबर और जनवरी में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहे। सर्दियों के लिए उत्तर भारत के लिए अधिकतम औसत तापमान 20 से 22 डिग्री और न्यूनतम 10 से 15 डिग्री सेल्सियस निर्धारित है। महेश पलावत कहते हैं- अब तक प्रदेश में यह दोनों तापमान औसत रूप से ज्यादा रहे हैं। इस बार एक्सट्रीम ठंड देखने को नहीं मिली। इस बार ला-नीना एक्टिव न होने की वजह से ठंड ज्यादा नहीं पड़ सकी। वहीं, लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश भी यही बताते हैं कि इस बार पिछले साल की तुलना में कम ठंड पड़ी। क्या है ला-नीना?
ला-नीना ऐसा जलवायु पैटर्न है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इसमें समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा ठंडा हो जाता है। जब यह पानी भाप बनकर ऊपर उठता है, तो बादल बनते हैं। कई जगहों पर बारिश होती है। भारत में बारिश कम होगी या ज्यादा, ठंड पड़ेगी या गर्मी बढ़ेगी, यह काफी हद तक ला-नीना पर ही निर्भर करता है। साल- 2025 में ठंड शुरू होने से पहले मौसम विभाग ने अंदाजा लगाया था कि ला-नीना एक्टिव हो सकता है। इससे उत्तर भारत में ठंड ज्यादा पड़ने की उम्मीद थी। लेकिन, प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति बनी ही नहीं। इसलिए ठंड में खास बढ़ोतरी नहीं हुई। ठंड के मौसम की शुरुआत में अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA ने भी कहा था कि सर्दियों में करीब 60 प्रतिशत संभावना है कि ला-नीना एक्टिव होगा। मार्च तक इसका असर भी दिखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पश्चिमी विक्षोभ कम एक्टिव रहा, तो बारिश कम हुई
मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश बताते हैं- इस बार प्रदेश में सर्दियों के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की सक्रियता भी कम रही। इससे ठंड के सीजन में बारिश भी सामान्य से कम हुई। कई दिनों तक लगातार बादल और कोहरा छाए रहने से ठंड बढ़ती है। वह भी इस सीजन में देखने को नहीं मिला। ज्यादातर जिलों में दिन में धूप निकली। मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच यूपी में 36 फीसदी की कमी देखी गई। फरवरी का महीना अब तक कैसा रहा
बीएचयू के भू-भौतिकी विभाग के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव बताते हैं- अभी वसंत का मौसम चल रहा है। अगले 2-3 हफ्तों तक मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान सुबह और रात में हल्की ठंड रहेगी, जबकि दोपहर में धूप थोड़ी तेज महसूस होगी। वेदर एक्सपर्ट महेश पलावत के अनुसार, 18 फरवरी के आसपास यूपी के कई जिलों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। इसमें हाथरस, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, ललितपुर और झांसी जैसे इलाके शामिल हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अब ठंड अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। 2025 में फरवरी में टूटा था 125 साल का रिकॉर्ड
1901 के बाद यह पहली बार था, जब फरवरी-2025 में औसत न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा था। साल- 1901 वही समय है, जबसे भारत समेत दुनिया भर में तापमान का लेखा-जोखा रखा जाता है। दूसरी ओर, 1901 के बाद से तीसरी बार जनवरी-2025 सबसे गर्म महीना रहा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। पृथ्वी का तापमान उस साल 1.55 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था। कैसा रहेगा 2026 मार्च के पहले हफ्ते से बदलने लगेगा यूपी का मौसम
मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, मार्च के पहले हफ्ते से मौसम पूरी तरह बदलने लगेगा और गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा। दिन और रात दोनों के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं, अप्रैल में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, यूपी के कई जिलों में अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि केवल दिन ही नहीं, रात के समय भी गर्मी से राहत कम मिलेगी और उमस बनी रहेगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अभी सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि यह काफी हद तक अल नीनो की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर अल नीनो की स्थिति बनी रहती है या मजबूत होती है, तो गर्मी की हालत और ज्यादा गंभीर हो सकती है। ऐसी स्थिति में लू के दिनों की संख्या बढ़ेगी। तापमान लंबे समय तक ऊंचा रहेगा और लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। यूपी में समय से पहले बढ़ती गर्मी, हालात और बिगड़ने के संकेत
लखनऊ यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ध्रुवसेन सिंह के अनुसार, पिछले कुछ सालों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले, जो लगातार गर्मी को बढ़ावा दे रहे हैं। पेड़ों की संख्या तेजी से घटी, पानी के प्राकृतिक स्रोत जैसे तालाब, तलैया और पोखरे खत्म होते जा रहे। शहरों में कंक्रीट का जंगल लगातार बढ़ रहा और वाहनों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। ये सभी कारण मिलकर तापमान को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं। मौसम और भू-विज्ञान विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, साल 2026 में यूपी में गर्मी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हीट वेव की घटनाएं ज्यादा बार और लंबे समय तक हो सकती हैं। शहरी इलाकों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं। देश में मार्च से मई तक तापमान रहेगा सामान्य से गर्मी
आईएमडी के मुताबिक, पूरे देश में मार्च से मई के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। इसमें सिर्फ मार्च महीने में पूरे देश में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। साथ ही हीट वेव के दिनों की संख्या भी सामान्य से ज्यादा रहेगी। सिर्फ पूर्वोत्तर भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में आने वाले महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हीट वेव के दिन सामान्य रहेंगे। क्या होता है अलनीनो
अल नीनो हो या ला नीनो, ये दोनों ही भौगोलिक घटनाएं दुनिया के सबसे बड़े महासागर प्रशांत महासागर में होती हैं। जब-जब अल नीनो आता है, तब-तब भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है। इसकी वजह से देश के कई राज्यों में सूखा पड़ जाता है। हालांकि, अल नीनो को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने फिलहाल सिर्फ आशंका जताई है। उनका कहना है कि अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो देश में भयंकर गर्मी पड़ सकती है। मार्च का महीना फसलों को पहुंचाएगा नुकसान
बीएचयू के कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च का महीना इस साल किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। मार्च में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना है, जिसका सीधा असर रबी की फसल पर पड़ेगा। खासतौर पर गेहूं के लिए मार्च का समय बहुत अहम होता है, क्योंकि इसी दौरान दाना भरने की प्रक्रिया चलती है। अगर इस समय ज्यादा गर्मी पड़ती है, तो गेहूं के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। इससे पैदावार कम हो जाती है। पीके सिंह के अनुसार, मार्च में अचानक गर्म हवाएं चलने और नमी की कमी होने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है और फसलों पर तनाव पड़ता है। दुनिया भर में पड़ेगी भीषण गर्मी
एनवायरनमेंट और क्लाइमेट डाटा यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 दुनिया के अब तक के 4 सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है। इससे साफ पता चलता है कि क्लाइमेट चेंज की रफ्तार अभी भी कम नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों का लगातार बढ़ना और अल नीनो जैसी प्राकृतिक वजहें धरती का तापमान बढ़ा रही हैं। अनुमान है, 2026 में दुनिया का औसत तापमान, पुराने समय की तुलना में 1.4 से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है। इस बढ़ती गर्मी से पेरिस समझौते के लक्ष्य खतरे में पड़ सकते हैं। इसका असर यह होगा कि कई जगहों पर भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और अचानक बदलने वाला मौसम ज्यादा देखने को मिलेगा। इसका सीधा असर लोगों की सेहत, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। —————————- ये खबर भी पढ़ें… गोरखपुर के बिजनेसमैन के बेटे को गैंबलिंग डिसऑर्डर, 60 लाख हारा; ये बीमारी ड्रग्स और सिगरेट के लत जैसी गोरखपुर AIIMS में 7 फरवरी को एक बिजनेसमैन अपने 19 साल के इकलौते बेटे को लेकर पहुंचे। वह पागलों जैसी हरकत कर रहा था। परिवार ने बताया कि वह 4 साल से गेम खेल रहा था। ऑनलाइन गेमिंग और ट्रेडिंग में उसने 60 लाख रुपए गंवा दिए। पिता से बार-बार पैसे मांगे और मना करने पर आत्महत्या की धमकी देने लगा। बाद में उसने रिश्तेदारों से भी पैसे मांगने शुरू कर दिए। उसे गैंबलिंग डिसऑर्डर है। पढ़िए पूरी खबर…
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