भाजपा सांसद का नोटिस-राहुल की सदस्यता खत्म हो:कहा- वे देश को गुमराह कर रहे; रिजिजू ने स्पीकर चैंबर में हंगामे का VIDEO जारी किया

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बजट पर चर्चा के दौरान गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे के कारण नहीं चल सका। 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा कर दिया। सांसद प्ले कार्ड और पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए। नारेबाजी भी होती रही। स्पीकर चेयर पर मौजूद केपी तेन्नेटी ने 7 मिनट के बाद ही सदन को स्थगित कर दिया। दोपहर 12 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। उधर, पीएम मोदी आज राज्यसभा में पहुंचे हैं। इधर, BJP सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है। सब्सटेंसिव मोशन वह प्रपोजल है, जिस पर सदन सीधे चर्चा करके फैसला ले सकता है। इस मोशन में स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि सदन किसी मुद्दे पर क्या फैसला ले। मोशन पर बहस और वोटिंग हो सकती है। पारित होने पर यह सदन की आधिकारिक राय बन जाती है। इधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव भी ला सकती है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू राहुल गांधी के सरकार पर लगाए आरोपों के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाने की बात कही थी।
इससे पहले, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया है। जिसमें 4 फरवरी को लोकसभा स्पीकर के चैंबर में हंगामे का जिक्र है। रिजिजू ने दावा किया है कि विपक्षी सांसदों ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में गालियां दीं। हालांकि प्रियंका गांधी ने कहा कि गालियां देने वाली बात झूठी है। उन्होंने किसी को नहीं उकसाया। वे चुपचाप थीं। आखिर में केवल शांति से अपनी बात रखी थी। क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के जरिए संसद/विधानसभा का कोई सदस्य किसी दूसरे सदस्य, मंत्री या अधिकारी के हाथों सदन के विशेषाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को सदन में रख सकता है। दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद सदस्य के विशेषाधिकारों के बारे में लिखा गया है। ताकि वे बिना दबाव के काम कर सकें। इन अधिकारों में सदन में बोलने की स्वतंत्रता, किसी बयान पर कोर्ट में मुकदमा न चलना, सही और पूरी जानकारी पाने का अधिकार शामिल है। अगर इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में संबंधित सदस्य लोकसभा/राज्यसभा अध्यक्ष को नोटिस देता है। स्पीकर तय करते हैं कि मामला गंभीर है या नहीं। यदि अनुमति मिलती है, तो इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है। समिति जांच कर रिपोर्ट देती है। सदन कार्रवाई तय करता है। दोषी पाए जाने पर सदस्य को फटकार, चेतावनी, हिरासत ( रेयर केस में) और सदन से निलंबित किया जा सकता है। संसद के दोनों सदन में बजट चर्चा से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…