योगी सरकार ने चुनावी साल में भी उम्मीदें लटकाईं:लोकलुभावन घोषणाएं नहीं, लेकिन कोर वोटरों को साधा

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यूपी के बजट में वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने कलाबाजी दिखाई… पुरानी योजनाओं को नया कलेवर दे दिया। इसकी सबसे बड़ी बानगी है कन्यादान योजना। इसके लिए खन्ना ने बजट भाषण में कहा- कन्यादान की राशि 51 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 1 हजार रुपए कर दी गई है। हकीकत यह है कि यह राशि पहले से यानी 23 मई, 2025 को शासनादेश के जरिए पहले ही एक लाख कर दी गई थी। सिर्फ एक हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, बजट में सरकार ने अपने कोर वोटरों का खास ख्याल रखा है। युवाओं, महिलाओं और किसानों से जुड़ी स्कीमों पर ज्यादा फोकस किया है। धार्मिक पर्यटन को इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है। दैनिक भास्कर एनालिसिस में पढ़िए बजट के राजनीतिक मायने… …तो क्या हर बार की तरह ही है बजट CA आशीष पाठक कहते हैं- इस बार का बजट भी पिछली बार की तरह संतुलित और अनुशासित है। लेकिन, इस बार डॉटा और AI सेंटर्स जैसे नए और जरूरी सेक्टर्स पर फोकस किया गया है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा 1 लाख करोड़ खर्च होगा। इसके अलावा युवाओं को साधने के लिए हर जिले में स्किल डेवलपमेंट के एक बड़े केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसे हब और स्पोक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत सरदार वल्लभभाई पटेल इंप्लायमेंट जोन के लिए भी घोषणा की गई। इसमें 50 से लेकर 100 एकड़ क्षेत्रफल के एक बड़े क्लस्टर में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम चलाया जाएगा। वहीं, वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन योजना के तहत स्थानीय खाद्य पदार्थों की ब्रांडिंग की जाएगी। इसको प्रोत्साहित करने के लिए 75 करोड़ दिए गए। ग्रामीण विकास की योजनाओं पर अधिक फोकस किया गया है। पंचायती राज विभाग का बजट पिछली बार की तुलना में 67% बढ़ाया गया है। इसी तरह ग्राम्य विकास विकभाग का बजट भी 25 हजार करोड़ किया गया है। यह पिछली बार की तुलना में 25% अधिक है। बजट में कोर वोटरों पर मेन फोकस भाजपा के कोर वोटरों में शामिल युवा, महिला और किसानों पर अधिक फोकस किया गया है। इसकी वजह भी है। प्रदेश में 18 से 29 साल वाले युवा वोटर 30% हैं। संख्या में बात करें, तो लगभग 4 करोड़ हैं। एसआईआर के बाद महिला वोटरों की संख्या लगभग 5.67 करोड़ है। जबकि ग्रामीण वोटर 9.56 करोड़ हैं। इनमें बड़ी संख्या किसानों की है। इसीलिए बजट के बाद सीएम योगी ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बजट सुरक्षित नारी, सक्षम युवा, खुशहाल किसान, हर हाथ को काम, तकनीकी निवेश से समृद्ध होते उत्तर प्रदेश को समर्पित है। बजट की थीम भी सुरक्षित नारी, सक्षम युवा और खुशहाल किसान है। लखनऊ यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एमके अग्रवाल कहते हैं- यह बजट भी पिछले कई बजट की दिशा को ही आगे बढ़ाते हुए दिख रहा। इस बार बजट में कुछ नए सेक्टर्स उभारने की कोशिश की गई है। जैसे एआई, डाटा सेंटर्स, इको टूरिज्म, मेडिकल सेक्टर और एजुकेशन, टेक्निकल वोकेशनल पर सबसे अधिक जोर दिया गया है। एमएसएमई, टूरिज्म व इंडस्ट्रियल पर फोकस किया गया है। बजट रोजगारपरक है। एक लाख युवाओं को 5 लाख रुपए तक का कर्ज बिना ब्याज और गारंटी के मिलेगा। मेडिकल की सीटें बढ़ा दी गई हैं। राज्य के बजट में केंद्र की स्कीम को इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ने की साफ झलक दिख रही है। यही डबल इंजन की ताकत है। 12% अधिक बजट…कहां से लाएंगे पैसे? बजट की सबसे बड़ी घोषणा कौन-सी हैं? चार्टर्ड एकाउटेंट आशीष पाठक कहते हैं कि ये बजट पूरी तरह से समावेशी है। एक तरफ शहरों में डाटा सेंटर्स की बात हो रही है, दूसरी तरफ गांवों में भी डिजिटल लाइब्रेरी, बारातघर बनाने की बात शामिल है। विधानभवन के लिए 100 करोड़
लखनऊ के गोमती नगर स्थित सहारा सिटी की जमीन पर नया विधानभवन बनेगा। इसमें विधानसभा और विधान परिषद दोनों होंगे। साथ ही मंत्रियों के कक्ष और स्टॉफ के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। शिक्षामित्रों की फिर अनदेखी, बिहार जैसी महिला स्कीम भी नहीं ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की अनदेखी करके उन्हें नाराज करना चाहती है? विशेषज्ञों का जवाब है- नहीं। प्रो. एमके अग्रवाल कहते हैं- जैसे 2022 विधानसभा से पहले सरकार ने अनुपूरक बजट लाकर टैबलेट और मोबाइल युवाओं को बांटे थे। ठीक उसी तरह सरकार 2027 से पहले इस तरह की बड़ी घोषणा करेगी। वो बिहार का उदाहरण देते हैं। वहां भी महिलाओं को ठीक चुनाव से पहले 10 हजार रुपए की सीधी राशि खाते में दी गई थी। वित्त विभाग के एक अधिकारी भी कहते हैं कि अभी चुनाव में एक साल का वक्त है। अभी तो मानसून और शीतकालीन सत्र होने हैं। ऐसे में सरकार के पास लोक-लुभावन योजनाएं लाने का पूरा मौका है। गोरखपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, अयोध्या, मथुरा का ज्यादा ख्याल क्यों?
गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ का कार्यक्षेत्र है। वाराणसी से खुद पीएम नरेंद्र मोदी सांसद हैं। बजट में भी इसका असर दिख रहा। गोरखपुर और बनारस में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए बजट जारी किया है। वाराणसी का स्टेडियम अंतिम चरण में है। वहीं, गोरखपुर में ईपीसी मोड (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) में अंतर राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण होगा। इसी तरह अयोध्या, मिर्जापुर, मथुरा में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे अधिक खर्च किया जा रहा है। इसकी वजह भी सरकार ने बताई है। प्रदेश में 1 जनवरी से जून तक 122 करोड़ पर्यटक आए थे। इनमें 33 लाख विदेशी पर्यटक शामिल थे। धार्मिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट मिला है। धार्मिक एजेंडा भाजपा की पहचान भी है। ऐसे शहरों के लिए बजट में राशि देकर सरकार ने अपने वोटबैंक को साधे रखने का प्रयास किया है। ———————- ये खबर भी पढ़ें- योगी सरकार का चुनावी साल में महिलाओं पर फोकस, जानिए आपको क्या मिला? चुनाव से पहले पेश किए गए यूपी बजट 2026 में युवाओं और महिलाओं पर सबसे अधिक फोकस किया गया है। किसानों को सब्सिडी का सहारा दिया गया है। अकेले महिलाओं की विभिन्न योजनाओं पर 18 हजार करोड़ खर्च किए जाएंगे। सिर्फ महिलाओं के लिए 12 नए आईटीआई खुलेंगे। पढ़ें पूरी खबर…