हरियाणा के जींद जिले की उचाना विधानसभा चुनाव पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में चुनाव अधिकारी को तलब किया है और बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 7 मार्च की डेट तय की है। सात दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक देवेंद्र अत्री की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने वोटों की दोबारा गिनती किए जाने पर रोक लगाने की मांग थी। देवेंद्र अत्री ने 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को सिर्फ 32 वोटों से हराया था। उचाना विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती को लेकर कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस चुनौती के खिलाफ अत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, ताकि हाईकोर्ट की कार्यवाही को रोका जा सके। इसके लिए स्पेशल लीव पिटीशन दायक की थी, जिसके सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब हाईकोर्ट मामले में अगली तारीख देने के लिए स्वतंत्र है। अब सिलसिलेवार ढंग से जानिए मामला… मार्च में बृजेंद्र सिंह ने दायर की थी याचिका विधानसभा चुनाव के परिणाम के खिलाफ मार्च में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कहा था कि जो कैंसिल या रिजेक्ट वोट होते हैं, यदि उसका अंतर इलेक्शन की हार-जीत के अंतर से ज्यादा है, तो गिनती खत्म होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की दोबारा से जांच रिटर्निंग अधिकारी को मौके पर करनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 150 वोट स्कैन नहीं होने के कारण कैंसिल कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने कहा था कि 150 वोट केवल इसलिए कैंसिल किए गए हैं, क्योंकि पोस्टल बैलेट के लिफाफे के ऊपर जो स्कैनर था, उनकी स्कैनिंग नहीं हो पा रही थी। इसलिए वो रिजेक्ट के डिब्बे में डाले गए। जिन वोटों की स्कैनिंग नहीं होती] तो उन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी भी प्रक्रिया है, जो गिनती के दौरान नहीं की गई। वोटों की जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का है, इसलिए यह काउंटिंग जरूरी थी। बृजेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई शुरू जुलाई 2025 में हाईकोर्ट में पिटीशन पर सुनवाई हुई। अत्री के वकील ने याचिका पर सवाल उठाए, लेकिन जज ने कहा कि अत्री को इतना डर क्यों लग रहा है। इसके बाद अत्री ने 10 आपत्तियां लगाई। सितंबर में हाईकोर्ट ने अत्री की अपील पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने बृजेंद्र की पिटीशन को खारिज करने की मांग की थी। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। अत्री की रिकाउंटिंग रोकने की मांग खारिज हाईकोर्ट ने अत्री की पिटीशन खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने बृजेंद्र की रीकाउंटिंग मांग को रोकने की अपील की थी। हाईकोर्ट में मुद्दे फ्रेम किए गए। 23 सितंबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर को तलब किया। बृजेंद्र सिंह भी कोर्ट में पेश हुए और दोहराया कि 150 पोस्टल बैलट के लिफाफे नहीं खोले गए। अत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया फरवरी 2026 में ही देवेंद्र अत्री ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की, जिसमें हाईकोर्ट की कार्यवाही रोकने और रिकाउंटिंग न कराने की मांग की। अब सुप्रीम कोर्ट ने अत्री की याचिका खारिज कर दी, जिससे हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।
उचाना इलेक्शन विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई:वोट रिकाउंटिंग का मामला, चुनाव अधिकारी तलब; 7 मार्च को होगी अगली सुनवाई
