Jakhia Pahadi Spice: उत्तराखंड के बागेश्वर और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में ‘जखिया’ केवल एक मसाला नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. सरसों जैसे दिखने वाले इन छोटे काले-भूरी दानों का तड़का लगते ही रसोई भीनी खुशबू से महक उठती है. आलू के गुटके, साग और पहाड़ी कढ़ी जैसे व्यंजनों में जखिया का महत्व वही है, जो मैदानी इलाकों में जीरे का होता है. स्थानीय जानकार संतोषी देवी के अनुसार, समुद्र तल से 800-1500 मीटर की ऊंचाई पर उगने वाले इस पौधे के बीज और पत्ते दोनों ही खाने में उपयोग किए जाते हैं. स्वास्थ्य की दृष्टि से भी डॉ. संगीता इसे बेहद गुणकारी बताती हैं, क्योंकि यह विटामिन ई, सी, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर है, जो पाचन सुधारने और गैस जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक है. आज जखिया का बेमिसाल स्वाद पहाड़ों से निकलकर वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड की एक खास पहचान बन चुका है.
जब कढ़ाई में चटकता है ये पहाड़ी मसाला, तब बाकी मसाले लगते हैं फीके, महक उठती है रसोई, विदेशी शेफ भी इसके दीवाने
