पति को छोड़ बॉयफ्रेंड के साथ भागी, मिला कंकाल:प्रेमी बोला- मैं उसे घर छोड़कर आया; कुत्तों ने निकाली लाश तब मर्डर का खुलासा

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मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात एक ऐसी मर्डर मिस्ट्री की जिसने कई महीने तक कटनी पुलिस को उलझाए रखा। दरअसल, ढीमरखेड़ा इलाके की पहाड़ी पर ग्रामीणों को एक इंसानी कंकाल मिला था। जानवरों ने इसे नोच कर बिखेर दिया था। खोपड़ी, पसलियां, और पैरों की हड्डियां अलग-अलग पड़ी थीं। पुलिस ने जब इस मामले की जांच शुरू की तो ये एक सनसनीखेज हत्या का मामला निकला। आखिर वो कंकाल किसका था, हत्या किसने की और क्या पुलिस हत्यारे तक पहुंची। पढ़िए एमपी क्राइम फाइल्स का पार्ट-1… बच्चों ने जंगल में देखा कंकाल
3 फरवरी, 2021 की एक सर्द सुबह। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा गांव के कुछ बच्चे खेलते हुए जंगल की ओर निकल गए थे। पहाड़ी के किनारे खेलते-खेलते उनकी नजर खाई के नीचे कुछ अजीब सी चीजों पर पड़ी। कुछ पुराने कपड़े और बिखरी हुई हड्डियां। बच्चों की स्वाभाविक उत्सुकता उन्हें खाई में नीचे खींच ले गई, लेकिन यहां जो मंजर उन्होंने देखा, उसने उनके होश उड़ा दिए। वहां एक इंसानी कंकाल पड़ा था, जिसे शायद जानवरों ने नोच-नोच कर बिखेर दिया था। खोपड़ी, पसलियां, और पैरों की हड्डियां अलग-अलग पड़ी थीं। डर से कांपते हुए बच्चे बदहवास हालत में गांव की ओर भागे और सीधे गांव के कोटवार, राजेश, के पास पहुंचे। राजेश ने बच्चों की बात सुनी और बिना देर किए मौके पर पहुंचा। खाई का नजारा देखकर वह भी सन्न रह गया। जमीन पर एक कंकाल था, जिसके आसपास फटे-पुराने कपड़े, एक साड़ी, ब्लाउज और शॉल बिखरी पड़ी थे। पुलिस की जांच और एक अनसुलझी चुनौती
सूचना मिलते ही कुंडम थाना पुलिस की एक टीम और तहसीलदार प्रदीप कुमार कौरव घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने इलाके को घेर लिया और सबूत इकट्ठा करने शुरू कर दिए। जांच के दौरान खाई में एक 4-5 फीट का गड्ढा भी मिला, जो हाल ही में खोदा गया नहीं लग रहा था। पहली नजर में पुलिस का अनुमान था कि किसी ने महिला की हत्या करने के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए इस सुनसान पहाड़ी पर गड्ढा खोदकर दफना दिया होगा। लेकिन, जंगली जानवरों, शायद कुत्तों या सियारों ने, गंध पाकर शव को गड्ढे से बाहर निकाल लिया और उसे अपना निवाला बना लिया। शव पूरी तरह से गल चुका था, केवल हड्डियां और कुछ मांस के टुकड़े ही बचे थे। कंकाल की हालत देखकर लग रहा था कि यह घटना कई महीने पुरानी है, जिससे तत्काल पहचान की कोई गुंजाइश नहीं थी। पुलिस के सामने सवाल- किसका था कंकाल
पुलिस को फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार था। पुलिस के सामने ये तो साफ हो गया था कि ये किसी महिला का कंकाल है, मगर कई सवाल भी थे, मसलन यह कंकाल किसका था? क्या ये हत्या थी? यदि हां तो किसने, क्यों और कैसे की? क्या ये महिला इसी इलाके की रहने वाली थी या कहीं और से लाकर उसे यहां दफनाया गया था? पुलिस ने सबसे पहले आसपास के गांवों में गुमशुदा महिलाओं की जानकारी जुटानी शुरू की, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। किसी ने भी ऐसी किसी महिला के लापता होने की सूचना नहीं दी थी, जो कंकाल से मेल खाती हो। इसके बाद, पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और पड़ोसी थानों से पिछले एक साल में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट मंगवाई। गुमशुदगी की रिपोर्ट और पहचान की पहली किरण
फाइलों की छानबीन के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग मिला। लगभग 7 महीने पहले, कुंडम थाने में ही नरेश सिंह मरावी नाम के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी रुक्मणी मरावी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तुरंत नरेश को थाने बुलाया। उसे कंकाल के साथ मिले कपड़े दिखाए गए। कांपते हाथों से कपड़ों को छूते ही नरेश की आंखें भर आईं। उसने तुरंत पहचान लिया कि वह साड़ी, ब्लाउज और शॉल उसकी पत्नी रुक्मणी के ही थे। यह एक बड़ी सफलता थी, लेकिन पुलिस केवल कपड़ों की शिनाख्त पर भरोसा नहीं कर सकती थी। पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण अनिवार्य था। पुलिस ने रुक्मणी के पिता, सुरेश, से संपर्क किया और डीएनए सैंपल के लिए उन्हें जबलपुर बुलाया। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में, फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. मुकेश राय की टीम ने कंकाल की गहन जांच की। हड्डियों की स्थिति का विश्लेषण कर उन्होंने अनुमान लगाया कि कंकाल एक से तीन महीने पुराना हो सकता है। जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया खोपड़ी में एक फ्रैक्चर था। डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि मौत सिर पर किसी भारी वस्तु से किए गए हमले के कारण हुई होगी। लव ट्रायएंगल का खुलासा और उलझती पहेली
कंकाल की पहचान होते ही पुलिस की जांच ने तेज गति पकड़ ली। अब सवाल कातिल का था। पुलिस के शक के दायरे में सबसे पहले मृतका का पति नरेश और उसके पिता सुरेश ही थे। पुलिस ने दोनों से अलग-अलग और साथ बिठाकर घंटों पूछताछ की। इसी पूछताछ के दौरान एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया। रुक्मणी के पिता सुरेश ने बताया कि उनकी बेटी की शादी नरेश से हुई थी, लेकिन वह इस शादी से खुश नहीं थी। उसका गांव के ही एक दूसरे युवक पूरन सिंह के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। सुरेश ने खुलासा किया कि 11 मई, 2020 को रुक्मणी अपने पति का घर छोड़कर प्रेमी पूरन के साथ भाग गई थी। परिवार वालों ने काफी खोजबीन के बाद उसे ढूंढ निकाला और वापस घर ले आए। मामले को शांत करने के लिए गांव में पंचायत भी बुलाई गई, जहां रुक्मणी और पूरन दोनों को समझाया गया और एक-दूसरे से दूर रहने की हिदायत दी गई। प्रेमी बोला- मैंने तो उसे वापस भेज दिया था
पुलिस के सामने अब एक नई थ्योरी और एक नया संदिग्ध था प्रेमी पूरन सिंह। पुलिस ने पूरन को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पूरन ने रुक्मणी के साथ अपने प्रेम संबंध की बात कबूल कर ली। उसने बताया, “हां, मैं रुक्मणी से प्यार करता था और वह भी मेरे साथ ही रहना चाहती थी। वह अपने पति को छोड़कर मेरे पास आ भी गई थी। मैं पहले से शादीशुदा हूं और मेरी पत्नी मेरे साथ रहती है। मैं उसे अपने घर में नहीं रख सकता था।” पूरन ने आगे बताया कि पंचायत के समझाने के बाद उसने रुक्मणी को उसके पति के घर वापस भेज दिया था। उसने दावा किया कि इसके बाद रुक्मणी दोबारा कब और कैसे लापता हुई, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। दो संदिग्ध, दो कहानियां और एक अनसुलझा सवाल
अब पुलिस की शक की सुई दो लोगों पर आकर टिक गई थी पति नरेश और प्रेमी पूरन। दोनों के पास रुक्मणी की हत्या करने का मकसद हो सकता था। मामला सुलझने की बजाय और भी ज्यादा उलझ गया था। दोनों ही संदिग्ध अपने-अपने बयानों पर अड़े थे और पुलिस के पास किसी के भी खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था। पुलिस के सामने अब भी वही सवाल खड़ा था आखिर रुक्मणी का असली कातिल कौन है?
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