मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्ति करने की तैयारी में है। बीजेपी विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद भरने जा रही है, जो सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन और दलीय अनुशासन के लिए काफी अहम माना जाता है। इस पद पर नियुक्ति के साथ ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा, जिसके चलते यह नियुक्ति और भी अहम हो गई है। इस प्रतिष्ठित पद के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के नाम पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस दौड़ में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, विधायक दल के कोषाध्यक्ष के लिए भी विश्नोई के नाम की चर्चा है। बीजेपी मुख्य सचेतक की नियुक्ति क्यों करने जा रही है? आखिर पार्टी की मंशा क्या है? इससे क्या फायदा मिलेगा? पढ़िए रिपोर्ट… सीएम और प्रदेश अध्यक्ष लेंगे आखिरी फैसला ये दोनों ही बीजेपी के कद्दावर नेता हैं और सदन की कार्यवाही का लंबा अनुभव रखते हैं, लेकिन इन्हें डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। अब पार्टी इनमें से किसी एक को मुख्य सचेतक की बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की योजना बना रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट की पूरी जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कंधों पर है। अब मुख्य सचेतक की नियुक्ति करके उनके कार्यभार को बांटा जाएगा, जिससे सरकार सदन में और अधिक मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकेगी। इस नियुक्ति पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लगेगी। क्यों महत्वपूर्ण है मुख्य सचेतक का पद?
विधानसभा या संसद में मुख्य सचेतक का पद केवल एक औपचारिक नियुक्ति नहीं है। यह किसी भी राजनीतिक दल का वह प्रमुख पदाधिकारी होता है, जो सदन के भीतर पार्टी के सभी सदस्यों को बांधकर रखता है। इसकी भूमिका पार्टी नेतृत्व और विधायकों के बीच एक पुल की तरह होती है। मुख्य सचेतक यह सुनिश्चित करता है कि पार्टी के सभी सदस्य दलीय अनुशासन में रहें और पार्टी लाइन से अलग जाकर कोई बयानबाजी या मतदान न करें। यह मुख्यमंत्री या विपक्ष के नेता के प्रमुख सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है और सदन में पार्टी की रणनीति के प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी निभाता है। महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान के समय सभी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और उन्हें पार्टी के पक्ष में वोट करने का निर्देश देना इसका सबसे प्रमुख कार्य है। क्या होता है व्हिप और सदन में कब होता है इसका इस्तेमाल? व्हिप शब्द की उत्पत्ति ब्रिटिश संसदीय परंपरा से हुई है, जहां इसका शाब्दिक अर्थ चाबुक या सचेतक होता है, जो सदस्यों को एक लाइन में रखने का प्रतीक है। संसदीय प्रणाली में, व्हिप एक लिखित आदेश या निर्देश होता है, जिसे कोई राजनीतिक दल अपने विधायकों या सांसदों के लिए जारी करता है। व्हिप का इस्तेमाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण मौकों पर किया जाता है, जैसे कि सरकार द्वारा पेश किए गए किसी विधेयक पर मतदान, अविश्वास प्रस्ताव या विश्वास मत। व्हिप जारी करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पार्टी के सभी सदस्य एकजुट रहें और पार्टी नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णय का पालन करें। व्हिप जारी होते ही पार्टी के सभी सदस्य कानूनी रूप से इससे बंध जाते हैं और उन्हें इसका पालन करना अनिवार्य होता है। हर पार्टी इस कार्य के लिए सदन में अपने एक वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त करती है, जिसे मुख्य सचेतक (Chief Whip) कहा जाता है। व्हिप का पालन न करने पर क्या होती है कार्रवाई?
यदि कोई सदस्य मुख्य सचेतक द्वारा जारी किए गए व्हिप का उल्लंघन करता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है। ऐसी स्थिति में उस सदस्य की विधानसभा या संसद की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। भारत में दल-बदल विरोधी कानून के तहत, व्हिप का उल्लंघन करने वाले सदस्य को सदन से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालांकि, इसमें एक शर्त है। यदि किसी पार्टी के एक-तिहाई सदस्य एक साथ व्हिप का उल्लंघन करते हुए पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करते हैं, तो इसे दल-बदल नहीं, बल्कि पार्टी में टूट माना जाता है और उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होता। अन्य राज्यों में भी है मुख्य सचेतक की व्यवस्था विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव इसराणी कहते हैं कि चीफ व्हिप की जरूरत हर विधानसभा में होती है। ज्यादातर राज्यों ने अपनी विधानसभाओं में सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए इस पद की व्यवस्था की है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और असम जैसे प्रमुख राज्यों में सत्तारूढ़ दलों ने अपने मुख्य सचेतक नियुक्त किए हैं। हमारे दल बदल कानून में भी इसका प्रावधान है। मुख्य रूप से चीफ व्हिप सत्र के दौरान फ्लोर मैनेजमेंट करता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद बनाए रखता है ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से जारी रहे।
बीजेपी विधानसभा में चीफ व्हिप नियुक्त करने की तैयारी में:विधायकों को साधने और फ्लोर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी; कैबिनेट मंत्री का होगा दर्जा
