फरीदाबाद में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले की सांस्कृतिक संध्या उस वक्त यादगार बन गई, जब पंजाबी संगीत के दिग्गज कलाकार गुरदास मान ने अपनी शानदार प्रस्तुति से समां बांध दिया। मंच पर आते ही उन्होंने हाल ही में हुए झूला हादसे में जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखवाया। इस भावुक पल ने पूरे पंडाल को गमगीन कर दिया। वहीं आज मेले की सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड सिंगर कैलाश खेर का लाइव शो होगा । जिसको लेकर विभाग ने तैयारियां पुरी कर ली है। जाबियत के रंग में रंग गया मेला इसके बाद जैसे ही गुरदास मान ने अपने गीतों की शुरुआत की, पूरा मेला पंजाबियत के रंग में रंग गया। उनके मंच पर आते ही दर्शकों की तालियों और शोर से माहौल गूंज उठा। शेरो-शायरी से लेकर अपने सुपरहिट पंजाबी गीतों तक, गुरदास मान ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान मेले में आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। आलम यह रहा कि भीड़ पहले के मुकाबले करीब चार गुना तक बढ़ गई और हजारों की संख्या में लोग गुरदास मान के गीतों को सुनने के लिए सूरजकुंड मेला परिसर पहुंचे। पंजाबी संगीत का चमकता सितारा है गुरदास मान पंजाबी संगीत को नई पहचान देने वाले गुरदास मान का जन्म पंजाब के गिद्दड़बाहा क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उन्हें लोकगीतों और कविता में गहरी रुचि थी। कॉलेज के दिनों में उन्होंने मंच से गाना और लिखना शुरू किया। गुरदास मान पंजाबी संगीत और संस्कृति का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने दशकों से अपनी गायकी और लेखनी से लोगों के दिलों पर राज किया है। 1980 के दशक में गीत “दिल दा ममला है” से उन्होंने जो पहचान बनाई, वह आज भी कायम है। इसके बाद “अपना पंजाब होवे”, “चुगलीयां”, “हीर”, “लिख के दे गया” जैसे कई सुपरहिट गानों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। सिर्फ गायक ही नहीं, गुरदास मान एक बेहतरीन गीतकार, अभिनेता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कलाकार भी हैं। उन्हें पद्मश्री सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। उनकी गायकी में पंजाब की मिट्टी की खुशबू, दर्द, प्रेम और लोकसंस्कृति साफ झलकती है। सूरजकुंड मेला बना संगीत और संस्कृति का संगम गुरदास मान की प्रस्तुति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सूरजकुंड मेला केवल हस्तशिल्प का ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और संगीत का भी बड़ा मंच है। उनकी गायकी ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि पंजाबी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम भी किया।
सूरजकुंड मेला: गुरदास मान ने गीतों से बांधा समां:झूला हादसे के शिकार इंस्पेक्टर को दी श्रद्धांजलि; आज कैलाश खेर बिखेरेंगे सुरों का जादू
