पानीपत के रहने वाले व्यापारी राम अरोड़ा 31 जनवरी से लापता हैं। 1 फरवरी को उनकी मां से आखिरी बार बात हुई थी। राम ने हैंडलूम के साथ टेक्सटाइल कारोबार में कदम रखते हुए अपनी पहली डील श्रीनगर के एक व्यक्ति के साथ की थी और उसे पर्दे सप्लाई किए थे। पर्दों की 5.64 लाख रुपए की बकाया राशि लेने के लिए वह श्रीनगर गए थे, जिसके बाद से परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। तहसील कैंप थाना पुलिस ने मां की शिकायत पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पानीपत पुलिस श्रीनगर पुलिस से संपर्क कर राम का पता लगाने की कोशिश कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राम किसी साजिश का शिकार हुए हैं? क्या वह क्लाइंट, जिससे उन्हें पैसे लेने थे, असली था? इन सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन फिलहाल राम का परिवार डर में जी रहा है। पहले जानिए कौन है व्यापारी…. राम सबसे छोटा बेटा, बड़ी बहन शादीशुदा जवाहर नगर के गली नंबर 7 में रहने वाले हैंडलूम व्यापारी राम अरोड़ा का परिवार पिछले एक दशक से कई उतार-चढ़ाव देख चुका है। राम की मां सरला रानी ने भारी मन से बताया कि वह 3 बच्चों की मां हैं। परिवार में दो बेटियां और सबसे छोटा बेटा राम है। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि एक बेटी और राम अभी अविवाहित हैं। 2015 में पिता का निधन हुआ सरला ने बताया कि परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब साल 2015 में राम के पिता नंद लाल अरोड़ा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। नंद लाल खुद हैंडलूम के मंझे हुए व्यापारी थे। वे हिमाचल प्रदेश, श्रीनगर और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में फोन पर ऑर्डर लेते थे और फिर माल की डिलीवरी करने खुद जाते थे। पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी युवा राम के कंधों पर आ गई। अक्टूबर 2025 में खुद का काम शुरू किया पिता के निधन के बाद राम ने अपने मामा रमेश कुमार संदुजा के पास उनकी दुकान पर काम करना शुरू किया। वहां उसने व्यापार की बारीकियों को सीखा। कुछ समय बाद मामा और फिर ममेरे भाई का भी देहांत हो गया। दुकान की जिम्मेदारी उनकी ममेरे भाई की पत्नी के पास आ गई। राम ने वहां कुछ समय सहयोग किया, लेकिन अक्टूबर 2025 में उसने स्वतंत्र रूप से अपना काम करना शुरू कर दिया। अब जानिए राम अरोड़ा के गायब होने की कहानी…. पहली बार टेक्सटाइल डील, पर्दे सप्लाई किए राम अरोड़ा हमेशा से हैंडलूम के पारंपरिक काम में लगा रहा था, लेकिन जनवरी 2026 के अंत में उसने कुछ नया करने का प्रयास किया। उसने पहली बार ‘टेक्सटाइल’ यानी पर्दे के कपड़े का काम किया और एक क्लाइंट को माल सप्लाई किया। इसी सौदे की बकाया राशि, जो 5 लाख 64 हजार रुपए थी, वसूलने के लिए उसने श्रीनगर जाने का फैसला किया। 31 जनवरी को घर से श्रीनगर जाने के लिए निकला 31 जनवरी 2026 की दोपहर 2:20 बजे राम अपनी मां को यह कहकर घर से निकला कि वह पेमेंट लेकर जल्द वापस लौटेगा। वह पानीपत बस स्टैंड से बस में सवार हुआ। रास्ते भर वह अपनी मां के संपर्क में रहा। 1 फरवरी को राम ने श्रीनगर पहुंचने के बाद रात को अपनी मां को फोन किया। उसने बताया कि वह सुरक्षित पहुंच गया है। अगले दिन रविवार की सुबह भी उसकी मां से बात हुई। स्थितियां तब तक सामान्य लग रही थीं। 1 फरवरी की रात को आखिरी बार बात मां सरला की असली चिंता 1 फरवरी की रात सवा 8 बजे की आखिरी कॉल से शुरू हुई। राम ने अपनी मां से कहा, “मां, मुझे वह क्लाइंट नहीं मिल रहा है जिससे पैसे लेने हैं। मेरी पेमेंट भी अभी फंसी हुई है। अभी मैं खाना खाने जा रहा हूं, फ्री होकर बाद में बात करता हूं।” सरला रानी को उस वक्त यह अंदाजा भी नहीं था कि यह उनके बेटे की आखिरी आवाज होगी जो उन्होंने सुनी। उस रात के बाद से राम का मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। पहले 3 बार मोबाइल चोरी हो चुका सरला रानी ने बताया कि राम के साथ पहले भी तीन बार मोबाइल फोन चोरी होने की घटनाएं हो चुकी थीं। एक बार ट्रेन में उसका फोन छीन लिया गया था, जबकि दो बार जेब से गिर गया था। पुरानी आदतों के चलते लगा कि इस बार भी शायद श्रीनगर में उसका फोन चोरी हो गया होगा और वह किसी के फोन से संपर्क करेगा, लेकिन जब 8 दिन बीत गए और न ही राम लौटा और न उसका कोई संदेश आया। इसके बाद तहसील कैंप थाना पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस की नजर राम की कॉल और बैंक डिटेल पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जांच अधिकारी अब राम के मोबाइल की कॉल डिटेल्स और बैंक खातों पर नजर रख रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह क्लाइंट असली था या राम को किसी बड़ी साजिश के तहत श्रीनगर बुलाया गया था? 5.64 लाख रुपए की बड़ी रकम का मामला होने के कारण पुलिस इसे व्यापारिक रंजिश या धोखाधड़ी के एंगल से भी देख रही है।
साढ़े 5 लाख लेने श्रीनगर गया, 8 दिन से गायब:पानीपत के कारोबारी ने पहली बार टेक्सटाइल डील की, पेमेंट फंसने पर घर से निकला
