हरियाणा के कुरुक्षेत्र में KDB मेला ग्राउंड में चल रहे राज्य स्तरीय पशु मेले में पाकिस्तान की थारपारकर नस्ल का बुल (सांड) पहुंचा है। इस बुल का नाम चांद है, जिसे फतेहाबाद जिले के मोहम्मदपुर रोही गांव के रहने वाले लोकेश गुर्जर लेकर आए हैं। 4 साल के चांद का वजन 800 किलोग्राम है। उसकी मजबूत कद-काठी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पशुपालक लोकेश गुर्जर ने बताया कि चांद (सांड) ने मेरे को कभी निराश नहीं किया है। चांद जिस भी मेले में गया, कभी खाली नहीं लौटा। चांद 5 बार का चैंपियन रह चुका है। महेंद्रगढ़ में हुई चैंपियनशिप में चांद फर्स्ट पॉजिशन पर रहा था। मैंने इसे देसी खुराक देकर पाला है। अब थारपारकर ब्रीड बहुत कम देखने को मिल रही है। लोकेश ने बताया कि थारपारकर नस्ल पाकिस्तान के सिंध और इंडिया के राजस्थान में जैसलमेर में देखने को मिलेगी। इस देसी नस्ल को थारपारकर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उनको थार यानी रेगिस्तान के बड़े-बड़े टीले आसानी से पार कर लेती है। ये नस्ल रेगिस्तान की गर्मी और सर्दी को सहन कर लेती है। पशुपालक ने बताई 800 किलोग्राम के चांद की खासियतें… 8 साल की उम्र में गिफ्ट में मिला था चांद
लोकेश के मुताबिक, उनको चांद गुजरात से गिफ्ट में मिला था। तब उसकी उम्र सिर्फ 8 महीने की थी। उस वक्त घर वालों ने चांद को वापस करने का दबाव भी बनाया था, क्योंकि उस समय ज्यादातर लोग कमाई के लिए होल्सटीन फ्रीजियन (HF) नस्ल के बुल को पाल रहे थे। मैंने चांद को कमाई के लिए नहीं रखा था। हलवा, पुरी और चूरी सब खाता है चांद
लेकेश बताते हैं कि चांद हलवा, पुरी और चूरी सब खाता है। चांद दिन में 2 बार हरा चारा खाता है। रात को उसे खल-बिनौला, दलिया, गुड़ और चारे में गेहूं का आटा मिला दिया जाता है। चांद हर रोज 3 लीटर देसी गाय का दूध पीता है। इसमें उसे मल्टीविटामिन और सप्लीमेंट भी दिया जाता है। 2 किलोमीटर की सैर भी कराई जाती है रोजाना
चांद को हफ्ते में 2 या 3 बार दूध में घी दिया जाता है। हर संडे हरा चारा की बजाय सब्जी जैसे गाजर, पत्ता गोभी और पालक देते हैं। घर में फ्रूट पड़ा है तो उसे वो भी खिलाया जाता है। ज्यादातर उसे मिक्स अनाज दिया जाता है। चांद को 2 किलोमीटर की सैर भी कराई जाती है। भिवानी में लगी 15 लाख कीमत
लोकेश ने दावा किया कि भिवानी मेले में चांद को खरीदने के लिए आंध्र प्रदेश की पार्टी आई थी। उन्होंने पहले 13 लाख और फिर 15 लाख रुपए में चांद को खरीदने में इंटरेस्ट दिखाया था। मगर, मैंने चांद को बेचने से इनकार कर दिया। चांद उनको गिफ्ट में मिला था, इसलिए उसे बेचना गलत होगा। 20 बच्चों का पिता बन चुका चांद
चांद 20 बच्चों का पिता बन चुका है। वे HLDB हिसार के साथ मिलकर नस्ल सुधार और थारपारकर नस्ल को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। थारपारकर नस्ल खत्म होती जा रही है, जबकि ये एक शानदार नस्ल है। इस नस्ल का बुल और गाय मजबूत कद-काठी और हर कंडीशन में रहने के लायक है। कुरुक्षेत्र पशु मेले में ₹1 करोड़ का घोड़ा अतिबल भी पहुंचा
पशु मेले में ₹1 करोड़ का घोड़ा पहुंचा है। यह घोड़ा कैथल के गुहला-चीका के पूर्व MLA के फॉर्म से लाया गया। मारवाड़ी नस्ल के घोड़े का नाम अतिबल है। मजबूत कद-काठी, चमकदार रंग, संतुलित चाल और बेहतरीन ग्रूमिंग अतिबल की पहचान है। 34 महीने का अतिबल मेले में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में सेंकेंड चैंपियन रहा। अतिबल का रंग काला है, लेकिन उसके माथे पर सफेद निशान है। अतिबल को मेले में लेकर पहुंचे एडवोकेट कपिल जगत ने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद के व्यापारी शेरू खान ने उनके घोड़े को खरीदने के लिए ₹1 करोड़ रुपए का ऑफर दिया था, लेकिन मैंने इसे ठुकरा दिया। —————- ये खबर भी पढ़ें….
₹50 लाख के घोड़े बादशाह को दूध संग बादाम पसंद:कुरुक्षेत्र के पशु मेले में आया, हफ्ते में 4 बार तेल मालिश, सर्दी-गर्मी अलग डाइट कुरुक्षेत्र के KDB मेला ग्राउंड में चल रहे पशु मेले में 50 लाख का एक घोड़ा पहुंचा। यह फतेहाबाद के लहरियां गांव से लाया गया है। नुकरे नस्ल के इस घोड़े का नाम बादशाह है, जो सिर से पैर तक पूरी तरह सफेद है। बादशाह की उम्र 28 महीने है और यह 65 इंच ऊंचा है। इसकी कीमत सुनकर पशु मेले में आए पशुपालक भी हैरान हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
पाकिस्तान की थारपारकर नस्ल का ‘चांद’ हलवा-पुरी का शौकीन:कुरुक्षेत्र पशु मेले में पहुंचा, 800 किलो वजन, 5 बार का चैंपियन; रेगिस्तान की गर्मी-सर्दी बेअसर
