वित्तमंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को यूपी विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। चुनावी साल में सरकार क्या सौगात देगी, यह तो बजट वाले दिन ही पता चलेगा। लेकिन, पिछले बजट का भी लेखा-जोखा जरूरी है। पिछला बजट पेश हुए 11 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। प्रदेश सरकार ने स्वीकृत बजट 865079.46 करोड़ में से महज 470835.97 करोड़ (54.42 फीसदी) ही विभागों को जारी किया है। सीएम योगी की ओर से बजट खर्च की समय-समय पर समीक्षा के चलते सरकारी महकमों ने जारी राशि 470835.97 करोड़ रुपए में से 428495.95 करोड़ (91 फीसदी) खर्च कर लिया है। विभागवार बजट की क्या स्थिति है? किसको अब तक कितनी रकम मिली? उसमें से कितना खर्च हुआ? पढ़िए पूरा लेखा-जोखा… पहले डालिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट पर नजर
वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने 20 फरवरी, 2025 को विधानसभा में 2025-26 के लिए 8,08,736 करोड़ का बजट पेश किया था। उसके बाद वित्तमंत्री ने मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र में दो बार अनुपूरक बजट पेश किया। इस तरह वर्तमान वित्तीय वर्ष में बजट का कुल आकार 8,65,079.46 करोड़ रुपए हुआ। वित्त विभाग ने बजट में से विभिन्न सरकारी विभागों के लिए 6 फरवरी तक 5,17,168.91 करोड़ (59.78) फीसदी बजट स्वीकृत किया। 4,70,835.97 करोड़ (54.42 फीसदी) बजट विभागों को आवंटित किया गया। विभागों ने 31 जनवरी तक 4,17,305.32 करोड़ (48.23 फीसदी) और 6 फरवरी तक 4,28,495.95 करोड़ (49.53 फीसदी) बजट खर्च किया है। शिक्षा विभाग- थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है
वित्त मंत्रालय ने बजट आवंटन में बेसिक, माध्यमिक, उच्च, व्यावसायिक शिक्षा विभाग पर मेहरबानी की है। इन विभागों ने बजट भी 85 फीसदी से अधिक खर्च किया है। सुरक्षा से समझौता नहीं
वित्त मंत्रालय ने बजट खर्च में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है। गृह विभाग के अधीन पुलिस और होमगार्ड को 95 फीसदी से अधिक बजट आवंटित किया है। वहीं, कारागार के लिए भी 60 फीसदी से अधिक बजट जारी किया है। हालांकि, गृह विभाग खुद सीएम योगी के पास है। खाद्य आपूर्ति के लिए खजाना खोला
सरकार ने खाद्य और रसद आपूर्ति के लिए खजाना खोला। 10 महीने में करीब 74 फीसदी बजट जारी किया है। इसी तरह गन्ना किसानों के लिए चीनी विभाग को भी 82.63 फीसदी बजट जारी किया है। परिवार कल्याण में दिखी कंजूसी
वित्त मंत्रालय ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के परिवार कल्याण विभाग में बजट आवंटन में थोड़ी कंजूसी दिखाई। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की कमी और संसाधनों की कमी की शिकायतें जगजाहिर हैं। लेकिन 11 महीने में सरकार से परिवार कल्याण विभाग को 59.75 प्रतिशत, चिकित्सा-शिक्षा को 68.44 फीसदी प्रतिशत बजट मिला है। हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग को 69.30 फीसदी से अधिक राशि जारी की गई है। दयाशंकर पर नहीं आई खन्ना को दया
वित्तमंत्री सुरेश खन्ना के महकमे ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के परिवहन विभाग पर दया नहीं की है। परिवहन विभाग को अभी तक पास बजट में से केवल 42.60 फीसदी राशि ही दी गई। सबका साथ-सबका विकास
वित्त मंत्रालय ने बजट में सबका साथ-सबका विकास की झलक भी दिखाई है। मुस्लिम वक्फ को 91.31 फीसदी बजट जारी किया। इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, बजट कमजोर
प्रदेश सरकार का पूरा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर है। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से ही व्यापार और रोजगार बढ़ता है। लेकिन, प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े महकमों को जारी बजट राशि की स्थिति कमजोर है। नगर विकास विभाग मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के ऊर्जा विभाग को 69.27 प्रतिशत और नगर विकास विभाग को 47.22 प्रतिशत बजट मिला है। पीडब्ल्यूडी को सड़कों के लिए 60 फीसदी, ब्रिज के लिए 47.81, आवास विभाग को 52.33 प्रतिशत और नागरिक उड्डयन विभाग को 61.88 फीसदी बजट मिला है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नमामि गंगे को केवल 39.11 प्रतिशत और सिंचाई विभाग को 45 प्रतिशत बजट ही अभी मिला है। सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों के लिए बजट पूरा देने की कोशिश की गई है। ओबीसी और दिव्यांगों से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 90 फीसदी बजट जारी किया है। श्रम कल्याण के लिए भी 70 फीसदी बजट जारी किया गया। प्रदेश सरकारी में एकमात्र महिला कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य के महिला कल्याण विभाग को मंजूर बजट का 69.77 प्रतिशत दिया है। केशव और राजभर के विभाग को 59 फीसदी बजट मिला
वित्त मंत्रालय ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ग्राम्य विकास विभाग को भी 11 महीने में महज 59.58 फीसदी बजट दिया है। वहीं, पंचायतीराज मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के पंचायतीराज विभाग को 59.71 फीसदी बजट मिला है। जानकार मानते हैं, ओपी राजभर पंचायत चुनाव समय पर होने का दावा कर रहे हैं। पंचायत चुनाव में ग्राम्य विकास और पंचायतीराज दोनों विभागों के कामकाज के आधार पर जनता मतदान करती है। ऐसे में दोनों विभागों को कम बजट मिलना अच्छा संकेत नहीं।
वित्त मंत्रालय ने पेंशन और भत्तों के भुगतान में कतई देरी और कंजूसी नहीं की है। भत्ते और पेंशन के लिए शत प्रतिशत बजट जारी करने के साथ उसका खर्च भी सौ फीसदी किया है। तो कैसे बढ़ेगी औद्योगिक विकास की रफ्तार
प्रदेश सरकार का पूरा फोकस प्रदेश के औद्योगिक विकास पर है। औद्योगिक विकास के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। लेकिन, वित्त मंत्रालय ने औद्योगिक विकास के लिए बजट में उतनी दरियादिली नहीं दिखाई। औद्योगिक विकास विभाग मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी के विभाग को 45 फीसदी बजट भी नहीं मिला। वहीं, एमएसएमई मंत्रीराकेश सचान के विभाग को करीब 60 फीसदी से अधिक बजट मिला। आपदा के लिए नहीं पड़ी बजट की जरूरत
प्रदेश में दैवीय आपदाओं के लिए ज्यादा बजट की आवश्यकता नहीं पड़ी है। 11 महीने में केवल 22.99 फीसदी बजट खर्च किया। अब जानिए सरकार की आय की क्या स्थिति रही नहीं हो रही लक्ष्य के मुकाबले आय
वित्त विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि सरकार को लक्ष्य के मुकाबले राजस्व नहीं मिल रहा। इसका सीधा असर विभागों को आवंटित होने वाले बजट पर पड़ रहा। जनवरी तक सरकार को विभिन्न आय के स्रोतों से 1,78,556.43 करोड़ रुपए की आय हुई है जो कि लक्ष्य का 74.1 प्रतिशत है। वित्तमंत्री सुरेश खन्ना की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी तक कर-राजस्व के तहत 178556.43 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। जबकि लक्ष्य 240980.67 करोड़ रुपए था। इस तरह लक्ष्य के सापेक्ष 74.1 प्रतिशत कर राजस्व मिला है। जीएसटी में भी कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष जनवरी की तुलना में इस वर्ष जनवरी में वैट और जीएसटी से होने वाली आय में भी खास वृद्धि नहीं हुई है। जीएसटी से जनवरी 2026 में 7,161.95 करोड़ रुपए मिले, जबकि जनवरी 2025 में 7167.29 करोड़ रही थी। वहीं वैट से जनवरी 2026 में 2,816.47 करोड़ रुपए की आय हुई, जबकि जनवरी 2025 में 2,797.32 करोड़ रुपए की आय हुई थी। बजट मंजूर करने और खर्च राशि को लेकर यूपी के पूर्व अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल कहते हैं- सरकारें अपनी सहूलियत और राजनीतिक एजेंडे के आधार पर बजट तैयार करती हैं। अधिकांश बजट का आकार ज्यादा रखा जाता है। वास्तविकता में सरकार के पास जितनी आय होती है, उतना ही बजट खर्च होता है। जब सरकार के पास उतनी आय नहीं हो रही, तो बजट कैसे जारी किया जाएगा।
————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में 12 से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं:दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार जल्द; गुजरात मॉडल अपनाने की तैयारी यूपी में योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार बहुत जल्द होने जा रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव और इस साल होने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए योगी सरकार गुजरात मॉडल की तर्ज पर आधे से अधिक मंत्रियों की छुट्टी कर नई टीम भी उतार सकती है। करीब 12 से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं। नए सामाजिक समीकरणों के साथ करीब 15 विधायक और पार्टी पदाधिकारियों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर
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