गाजियाबाद में 3 बच्चियों का सुसाइड। केस जितना सीधा दिखा, अब उतना ही उलझता जा रहा। कभी पिता का बयान सवालों के घेरे में आता है, तो कभी दोनों मां का सामने न आना केस को संदिग्ध बनाता है। तीनों बच्चियां जिस जगह से नीचे गिरीं, वहां से उनका एक साथ कूदना संभव नहीं। एक बच्ची की लाश अपार्टमेंट की दीवार से महज 1 फीट दूर पड़ी थी। यह भी एक सवाल है। चेतन पहले जिस अपार्टमेंट में रहते थे, वहां उनकी साली की गिरकर मौत हो चुकी है। परिवार ने इसे एक दुर्घटना माना था। लेकिन, ताजा घटना के बाद लोग उस हादसे को इससे जोड़कर देख रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले के हर पहलू को लगातार आप तक पहुंचा रही है। संडे बिग स्टोरी में हम इस केस पर उठे सवालों को जानेंगे… चेतन ने 3 शादियां कीं, बच्चियों पर ध्यान नहीं दिया
गाजियाबाद के भारत सिटी सोसाइटी में फ्लैट नंबर- 907 में चेतन अपने परिवार के साथ रहते हैं। चेतन कुमार ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग करते हैं। उनके साथ उनकी 3 पत्नियां रहती हैं। इनके नाम सुजाता, हिना और टीना हैं। सुजाता और हिना सगी बहन हैं। इनकी एक और बहन नेहा भी अक्सर यहां आती रहती है। 3 शादियों की वजह अभी तक यह निकलकर सामने आई है कि चेतन को सुजाता से शुरुआत में बच्चे नहीं हुए। इसलिए उसने हिना से शादी की। हालांकि बाद में दोनों (सुजाता-हीना) से बच्चे हुए। सुजाता से निकिता और लविश हुआ। हिना ने प्राची और पाखी को जन्म दिया। 4 साल की देबू नाम की बच्ची टीना की है। चेतन के ससुर दिलीप कुमार दिल्ली के सीलमपुर में रहते हैं। पहले टैक्सी चलाते थे। पैर में दिक्कत के चलते 2 साल से घर पर ही रहते हैं। वह कहते हैं- मेरे कुल 14 बच्चे हैं। इनमें 11 बेटियां और 3 बेटे हैं। चेतन से हमने अपनी बड़ी बेटी सुजाता की शादी की थी। कुछ साल उससे कोई बच्चा नहीं हुआ। इस पर हमने हिना की भी शादी चेतन से कर दी। चेतन पहले छोटा-मोटा काम करता था। बाद में वह प्रॉपर्टी का काम, गाड़ियों के फाइनेंस का काम, पुराने मकान को ठीक कराकर बेचने का काम करने लगा। उसने अच्छा पैसा कमाया। उस वक्त वह फॉर्च्यूनर से चलता था। बिजनेस में घाटा हुआ, बच्चियों की पढ़ाई रोक दी
चेतन पहले दिल्ली के एकता पार्क स्थित शालीमार गार्डेन के फ्लैट में रहते थे। बाद में साहिबाबाद के राजेंद्र नगर चले गए। वहां शुभधाम अपार्टमेंट में रहने लगे। लेकिन, धीरे-धीरे बिजनेस खराब होता गया। ऑनलाइन ट्रेडिंग में चेतन को घाटा हुआ। इसके बाद उन पर कर्ज हो गया। इसी के चलते बेटियों की पढ़ाई भी छुड़वा दी। निकिता चौथी, प्राची तीसरी और पाखी दूसरी क्लास तक ही स्कूल जा सकी थीं। इसके बाद ये लड़कियां घर में ही रहने लगीं। दिन भर मोबाइल में कोरियन कल्चर से जुड़े ड्रामा और वीडियो देखती रहती थीं। लड़कियों पर हावी हुआ कोरियर कल्चर
लड़कियों ने एक कमरे को अपना ठिकाना बना लिया था। उसी में साथ रहती थीं। कोरियन कल्चर इतना हावी हो गया था कि उसी के जैसे अपना लुक बना लिया था। नाम बदल लिया था। बात भी उसी तरह से करने लगी थीं। बच्चियों के पिता चेतन ने कहा था- मेरी लापरवाही रही है। मैंने अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दिया। बेटियां कोरियन पर्सनैलिटी से प्रभावित थीं। मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि कोरियन वीडियो, सीरियल और अन्य सभी गेम बंद किए जाएं। मेरे बच्चों की तरह कोई दूसरा परिवार इसका शिकार न हो। इसका बच्चों पर बहुत गलत असर पड़ता है। आर्थिक तंगी में बेचा लड़कियों का मोबाइल
इन लड़कियों के पास 2 मोबाइल फोन थे। चेतन की आर्थिक तंगी ऐसी थी कि 6 महीने पहले उसने एक फोन बेच दिया था। दूसरा फोन भी उसने 15 दिन पहले बेटियों से छीनकर बेच दिया था। इसके बाद बच्चियां अकेली हो गईं। हालांकि जांच में ये भी सामने आया है कि बच्चियां बीच-बीच में मां सुजाता का मोबाइल इस्तेमाल कर रही थीं। सोसाइटी के कुछ लोगों के मुताबिक, 3 फरवरी की रात चेतन के घर से गाली-गलौज की आवाजें आ रही थीं। इसी दौरान रात के 2 बजे बच्चियों के बिल्डिंग से नीचे गिरने की आवाज आई। बच्चियों की दोनों माएं दौड़ते हुए नीचे पहुंचीं और लाशों के पास बैठकर दहाड़े मारकर रोने लगीं। सुजाता अपने कपड़े उतारकर बच्चियों के ऊपर डाल रही थी। अपने चप्पल को हाथ में लेकर सीने पर मार रही थी। लगातार गालियां दे रही थी। कह रही थीं- सब बता दूंगी, तूने क्या-क्या किया है। कुछ देर बाद पुलिस पहुंची। लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। इसके बाद से दोनों महिलाएं बाहर नहीं निकलीं। 3 बच्चियों की मौत के मामले में कुछ हद तक पिता चेतन ही सवालों के जवाब दे रहे हैं। चेतन के घर में कलह चल रही थी
3 शादियों के चलते चेतन घर में कलह थी। इससे बचने के लिए चेतन लगातार फ्लैट बदलते रहते थे। भारत सिटी में ही उन्होंने एक और फ्लैट ले रखा था। 6 फरवरी को वह उस फ्लैट की बिजली का रिचार्ज करने पहुंचे, तो लोग उन्हें पहचान गए। अब बताया जा रहा कि इस फ्लैट में टीना रहती थी। चेतन भी यहां आते-जाते रहते थे। घटना के बाद से टीना कहीं दूसरी जगह चली गई है। साली की भी गिरने से मौत हुई थी
दैनिक भास्कर की टीम ने इस मामले में चेतन के ससुर दिलीप से बात की। वह बताते हैं- आज से करीब 6-7 साल पहले निशिका का जन्मदिन था। तब मेरी छठे नंबर की बेटी आंचल चेतन के घर गई थी। उस वक्त चेतन एकता पार्क के शालीमार गार्डेन की बिल्डिंग में तीसरे फ्लोर पर रहता था। आंचल बालकनी में फैलाए गए कपड़े उतार रही थी। तभी फिसलकर गिरी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उस वक्त परिवार ने इसे दुर्घटना माना था। पुलिस में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई थी। आंचल की उस वक्त उम्र 16 साल के आसपास थी। इतनी छोटी खिड़की से कैसे कूदीं?
बालकनी पर जहां से तीनों बहनों ने कूदकर सुसाइड किया, वहां अच्छे से खड़े होने तक की जगह नहीं थी। जिस जगह से बच्चियों के कूदने की बात कही जा रही, वह कमरे से करीब 4 फीट की ऊंचाई पर है। मौके पर देखा गया कि लड़कियों ने वहां प्लास्टिक का स्टूल रखा था। जिस जगह से कूदीं, उस खिड़की की ऊंचाई ढाई फीट और चौड़ाई 1.75 फीट है। मतलब, एक साथ तीनों लड़कियां खिड़की पर खड़ी होकर नहीं कूद सकतीं। एक लड़की की लाश नीचे बिल्डिंग की दीवार से महज 1 फीट की दूरी पर सटकर पड़ी थी। दूसरी और तीसरी बच्ची 8 और 9 फीट की दूरी पर पड़ी थीं। पुलिस इस चीज को भी समझने की कोशिश कर रही है कि ये अंतर कैसे है? दो बच्चियां दूर तो एक इतने करीब कैसे गिरी? इतनी ऊंचाई से दीवार से सटकर गिरना संदेह पैदा कर रहा। सुसाइड नोट की राइटिंग की जांच कर रही पुलिस
पुलिस को कमरे से एक छोटी डायरी मिली, इसमें 8 पेज में सुसाइड नोट लिखा है। कोरियन कल्चर, वहां के ड्रामा का जिक्र है। एक जगह यह भी लिखा है, ‘पापा सॉरी… गेम नहीं छोड़ पा रही हूं। अब आपको एहसास होगा कि हम गेम से कितना प्यार करते थे, जिसको आप छुड़वाना चाहते थे।’ पुलिस इस सुसाइड लेटर की राइटिंग की जांच कर रही है। सुसाइड लेटर में I (आई) शब्द का इस्तेमाल है, अगर तीनों लिखतीं तो WE लिखा जाता। दूसरी बात यह कि लेटर में पिता का ही जिक्र है, मां का नहीं। बच्ची सॉरी भी सिर्फ पिता से कह रहीं। लेकिन मौत के बाद महिलाएं जिस तरह से दहाड़े मारकर रो रही थीं, ऐसा लगता है कि माएं अपनी बच्चियों को बहुत प्यार करती थीं। वहीं चेतन चुपचाप खड़े थे, अगले दिन मास्क लगा लिया और फिर किसी से बात नहीं की। अब घर में ताला लगाकर कहीं और चले गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चियों की सभी पसलियां टूट गई थीं। साथ ही दिल, लिवर, फेफड़े, गुर्दे सहित सभी अंदरूनी अंग फट गए थे। रिपोर्ट में ये भी पता चला कि निशिका के पेट से 50 ग्राम ही खाना था, जबकि प्राची और पाखी के पेट से 200-300 ग्राम तक खाना मिला। इसका मतलब, निशिका ने दोपहर के बाद से खाना नहीं खाया था। जबकि दोनों बच्चियों ने रात में खाना खाया था। चेतन की मानें तो प्राची सभी की लीडर थी। अब सवाल है कि अगर लीडर प्राची थी, तो फिर निशिका ने खाना क्यों नहीं खाया? फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में अभी कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। तमाम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। DCP ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने कहा- टीम कई बिंदुओं पर जांच कर रही। जो भी बिंदु सामने आ रहे, उन्हें जांच में शामिल किया जा रहा। घर के अंदर क्राइम सीन को रिक्रिएट किया गया था, उसके भी कुछ फैक्ट सामने आए हैं। जिन मोबाइल को चेतन ने बेचा है, उन्हें रिकवर किया जा रहा है, ताकि डेटा रिकवर करके सभी तस्वीर सामने लाई जा सके। ———————– ये खबर भी पढ़ें… गाजियाबाद सुसाइड-बच्चियों की मौसी भी घर से गिरकर मरी थी, नाना बोले- दामाद फॉर्च्यूनर से चलता था ‘चेतन के पास अच्छा पैसा था। फॉर्च्यूनर गाड़ी थी। वह गाड़ियों के फाइनेंस का काम करता था। पुराने मकान खरीदकर उन्हें बेचता था। यहीं एकता पार्क (दिल्ली) के पास शालीमार बिल्डिंग में रहता था। फिर पता नहीं क्या हुआ…कर्जदार होता चला गया।… अगर ये लोग बच्चियों को अपने साथ सुलाते तो ऐसी कहानी थोड़ी होती।’ ऐसा कहना दिलीप कुमार का है। वे उन तीन बच्चियों- निशिका, प्राची, पाखी के नाना हैं, जिनकी गाजियाबाद में अब मौत हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर
गाजियाबाद सुसाइड- बच्चियों के पिता ने उलझाया केस:पहले गेम…फिर कोरियन, साली की मौत पर सस्पेंस; क्या है सच्चाई
