देश की न्यायपालिका में जजों की भारी कमी एक बार फिर सामने आई है। राज्यसभा में आरजेडी के सांसद प्रोफेसर मनोज झा के प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि 27 जनवरी 2026 तक देश के सुप्रीम और 25 हाईकोर्ट में कुल 1122 स्वीकृत पदों में से 308 पद खाली हैं, यानी लगभग 27.4 प्रतिशत पद खाली हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले 42 जज कार्यरत हैं। 11 पद खाली हैं। इसका मतलब है कि राज्य के हाईकोर्ट में करीब 20.75 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति ऐसे समय में है, जब प्रदेश में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मध्य प्रदेश के जिला व अधीनस्थ न्यायालय केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं, जिनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। यह कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। यानी एमपी की जिला व अधीनस्थ न्यायपालिका में SC, ST और OBC को मिलाकर 48.99% जज हैं। जबकि करीब 51 प्रतिशत अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने जिला वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा संसद में पेश नहीं किया। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर सार्वजनिक आकलन अभी सामने नहीं आया है।
देशभर की तस्वीर बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 में से 14 पद (14.9%), दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6%) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3%) खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 में से 1 पद रिक्त हैं। किस हाईकोर्ट में कितने प्रतिशत जज खाली आंकड़ों के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा कमी है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25%। कलकत्ता हाईकोर्ट में 72 में से 29 पद खाली हैं (40.3%)। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में भी हालात गंभीर हैं, जहां 44 % से ज्यादा पद खाली हैं।
एमपी हाईकोर्ट में जज का हर पांचवां पद खाली:लोअर कोर्ट में SC-ST-OBC वर्ग के जजों की संख्या आधे से भी कम
